दिल्ली से नजदीकी बनी पश्चिम के मरीजों के लिए अभिशाप 

Update: 2017-02-13 19:07 GMT
पश्चिम उत्तर प्रदेश को भी ऐसे ही चिकित्सा संस्थान की जरूरत, जैसा दिल्ली में एम्स। (साभार इंटरनेट)

लखनऊ। रायबरेली और गोरखपुर में अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) नींव पड़ने के बाद अब पश्चिम उत्तर प्रदेश से भी एम्स की मांग उठ रही है। दिल्ली से नजदीकी का हवाला देकर केंद्र सरकार लंबे समय से बड़े चिकित्सा संस्थानों से पश्चिम उत्तर प्रदेश को वंचित रखे हुए है मगर अब यहां के लोगों का कहना है कि नई दिल्ली पहुंचने में लगने वाले समय और निजी अस्पतालों की बढ़ती लूट के चलते यहां भी अब एम्स और पीजीआई जैसे सुपर स्पेश्यिलिटी सेंटरों की जरूरत बढ़ती जा रही है। इस चुनाव में भी यहां की जनता इसको मुद्दा बना चुकी है। सभी राजनैतिक दलों का ये दावा भी है कि वे एम्स बनाने में मदद करेंगे।

पश्चिम उत्तर प्रदेश में करीब 150 विधानसभा क्षेत्र जो कि लगभग 20 जिलों में फैले हुए हैं। लगभग पांच करोड़ मतदाता और करीब आठ करोड़ की आबादी इन जिलों में रहती है। मगर चिकित्सा सेवाओं के नाम पर आगरा, मेरठ, रामपुर आदि शहरों में मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं और उनके साथ संबंधित सामान्य चिकित्सालयों की व्यवस्था की गई है। छोटे जिलों का बहुत बुरा हाल है। सरकारी स्तर पर केवल जिला अस्पताल हैं। इनके अलावा गंभीर बीमारियों की दशा में मरीज दिल्ली या लखनऊ की ओर रुख करते हैं। दिल्ली एम्स में पहले ही बहुत अधिक मरीजों का दबाव होने की वजह से गंभीर मरीजों को लंबी वेटिंग से गुजरना होता है। जबकि लखनऊ की दूरी पश्चिम उत्तर प्रदेश से बहुत अधिक है। ऐसे में अब मेरठ और आगरा जैसे शहर के लिए एम्स की मांग जोर पकड़ रही है।

“लोग बोले, नेता इस बात का भी जवाब दें”

जानसठ के सिखेड़ा प्राइमरी स्कूली की प्रिंसिपल रश्मि मिश्रा कहती हैं कि, “आप मान लीजिये कि, मुजफ्फरनगर में किसी को गंभीर हेडइंजरी हो जाए तो उसका, यहां कोई भी इलाज नहीं है। मेरठ में भी कुछ खास बेहतर ट्रीटमेंट की संभावना नहीं है। ऐसे में घायल को दिल्ली ले जाना होता है। कम से कम ढाई घंटे का समय लगता है। इस दौरान जाने कितनी मौतें हो जाती हैं। मुजफ्फरनगर में सिविल कोर्ट में वकील हंसराज कहते हैं कि शामली में उनके रिश्तेदार को तेज बुखार पर मुजफ्फरनगर लाया गया। यहां एक निजी अस्पताल ने बहुत अधिक गंभीर न होने के बावजूद आईसीयू में वैंटीलेटर में डाल दिया। डेढ़ दिन बाद उनकी मौत हुई। एक लाख बिल बना दिया गया। इसी तरह से एंबुलेंस वालों की दलाली चल रही है। इतनी सरकारें आईं और गईं मगर यहां बड़े अस्पताल नहीं बनाए गए। ” बिजनौर के रहने वाले फर्नीचर कारोबारी रमेश गुप्ता बताते हैं कि “हमेशा सर्वे में ये कह दिया जाता है कि जब दिल्ली में एम्स है तो पश्चिम के अन्य जिलों में इसकी कोई जरूरत नहीं है। मगर ऐसा नहीं है। इतने बड़े क्षेत्र के लिए कम से कम दो जिलों में एम्स जैसे बड़े अस्पताल की जरूरत है।”

“अब कह रहे हैं जीते तो बनवाएंगे एम्स”

राजनेता अब कह रहे हैं कि अगर वे जीत गए तो निश्चित तौर पर एम्स को निर्माण करवा देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में कहा कि, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देंगे। अपने घोषणापत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि, प्रदेश में नये एम्स का निर्माण करवाया जाएगा। सपा के प्रवक्ता संजीव मिश्र कहते हैं कि, स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जितना काम हमने किया कोई नहीं कर पाया। वह चाहें पूरब हों या पश्चिम। जहां तक एम्स निर्माण की बात है, वह केंद्र सरकार कराती है। हमारी सरकार ने रायबरेली और गोरखपुर एम्स के लिए हमने जमीन उपलब्ध करवाई।”

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