पशुधन

ये हैं अपने ज़िले के सबसे बड़े अण्डा उत्पादक, दूसरे मुर्गीपालक इनसे लेते हैं सलाह 

रवि ने जब मुर्गी फार्म की शुरूआत की तो सबने यही कहा की नया काम है, नहीं चला पाओगे, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से अपने मुर्गी फार्म को जिले का नंबर एक अण्डा उत्पादक फार्म बना लिया है।

रवि फार्म के बारे में बताते हैं, “हमारे फार्म में पिछले 15 वर्षों से मुर्गियां पाली जा रहीं हैं। जिले भर में हमारे यहां से अण्डे की सप्लाई होती है। ब्रायलार और लेयर मुर्गियों को अलग-अलग बाड़े में रखा जाता है, साथ ही उनके खान-पान पर भी अलग ध्यान रखा जाता हैं। लेयर मुर्गियों के चूजे देहरादून से मंगाते हैं और ब्रायलर के चूजे इलाहाबाद से मंगाते हैं। गौतम लेयर फार्म में हर दिन आठ हजार अंडे का उत्पादन होता है, जो कि पूरे जिले भर में सप्लाई किया जाता है।”

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प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर दक्षिण में फैजाबाद-इलाहाबाद मार्ग पर गौतम मुर्गी फार्म पांच बीघा क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस समय गौतम मुर्गी फार्म में लगभग 25 हजार मुर्गियां हैं। रवि सिंह (28 वर्ष) ही फार्म देखते हैं।

रवि फार्म के बारे में बताते हैं, "15 साल पहले साल 2002 में पापा ने नाबार्ड से मुर्गी पालन के बारे में जाना था, लगभग 25 लाख की लागत से मुर्गी फार्म की शुरुआत की थी।’’

जो मुर्गियां अण्डा देना बंद कर देती हैं वो भी बिक जाती हैं साथ ही मुर्गियों का अपशिष्ट भी मछली पालक खरीदकर ले जाते हैं और हमारे खेतों में बढ़िया जैविक खाद भी मिल जाती है। ब्रायलर चूजे 10 दिन के रहते हैं जब फार्म में आते हैं 40 दिनों तक उन्हें फार्म में रखा जाता है जब वो डेढ़ दो किलों के हो जाते हैं तो बिक जाते हैं।

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रवि ने आगे बताया, "हर दिन लगभग पांच-छह हज़ार अंडों का उत्पादन होता है और इलाहाबाद में जो मार्केट रेट होता है उसी हिसाब से बिकते हैं जैसे कि इस समय साढे़ सात सौ रुपए हैं तो हर दिन 15000 रुपए में बिकता है जिसमें लागत निकालकर सात-आठ हजार का मुनाफा हो जाता है।’’

हर रोज पांच हजार अंडे लगभग 15 हजार के बिकते हैं। रवि के अलावा पांच और लोग भी हैं जो मुर्गियों की देखभाल करते हैं। मुर्गियों फार्म के साथ दस दुधारू गायों की एक डेयरी भी शुरु की है। गौतम मुर्गी फार्म को देखने के लिए सुल्तानपुर, फैज़ाबाद, जौनपुर जैसे जिलों के मुर्गी पालक देखने आते हैं। फार्म के अगल-बगल इन्होंने यूकेलिप्टस और सागौन के पेड़ लगाए हैं साथ ही मुर्गियो और गाय के मलमूत्र से बढ़िया जैविक खाद भी तैयार हो जाती है।

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मुर्गी पालन के साथ ही शुरु किया बकरी पालन का बिजनेस

मुर्गी पालन के साथ ही रवि ने बकरी पालन भी शुरु किया है। रवि इटावा के जसवंत नगर से बकरी के बच्चे लेकर आते हैं और कुछ महीनों में ये बकरे बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाते हैं। सबसे ज्यादा बिक्री ईद में होती है, इन्हें कहीं बाहर भी बेचने नहीं जाना पड़ता है। व्यापारी फार्म से ही बकरे खरीद ले जाते हैं।

आप भी शुरु कर सकते हैं कर्मशियल मुर्गी फार्म

उत्तर प्रदेश सरकार कुक्कुट विकास नीति 2013 के तहत दस हजार कामर्शियल लेयर फार्मिंग की यूनिट भी स्थापित की जा सकती है। कुक्कुट विकास नीति 2013 के तहत पहले 30 हजार पक्षियों की कामर्शियल यूनिट संचालित की जाती थी जिसमें मुर्गी पालकों को एक करोड़ 80 लाख रुपए की लागत आती थी, लेकिन अब किसान दस हजार पक्षियों की कामर्शियल यूनिट भी स्थापित कर सकेंगे जिसमें 70 लाख रुपए का खर्चा आएगा। इस योजना से एक लाभार्थी अधिकतम दो यूनिट स्थापित कर सकता है।