एक अनोखा प्रयास : ये किताब आपके लिए ही रखी है, पढ़िए और आगे बढ़ाइये

एक अनोखा प्रयास : ये किताब आपके लिए ही रखी है, पढ़िए और आगे बढ़ाइयेरिक्शे पर रखी किताब।

आप ऑफिस से निकले हों, दिमाग थक सा गया हो। घर पहुंचने के लिए आप मेट्रो में सीट पर बैठने ही वाले हों तभी वहां आपके लिए रखी एक किताब मिल जाए। और जब वो किताब आपकी पसंदीदा हो तो जाहिर सी बात है की आपकी सारी थकान मिट जाएगी। लेकिन दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में सार्वजनिक जगहों पर कुछ युवा ऐसे ही कर रहे हैं।

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किसी स्टेशन या पब्लिक जगहों पर किसी का इंतजार कर रहे हों और आपके पास एक किताब रखी मिल जाए। पहले तो आपको लगेगा कि ये किताब किसी और की है और यहां छूट गई होगी। लेकिन जैसे ही आप किताब को गौर से देखेंगे तो उस पर एक खास मैसेज लिखा हुआ मिलेगा, जिससे आपको यह पता चल जाएगा कि यह बुक गलती से छूटी हुई नहीं है, बल्कि जानबूझकर वो किताब आपके लिए छुपाई गई है।

ऐसा इसलिए हुआ है ताकि उस किताब को आप पढ़ सकें और पढ़कर आप भी अपनी मर्जी से उसे कहीं छिपा सकें। ऐसे ही फ्री बुक पढऩे का यह सिलसिला चलता रहे। दिल्ली, मुंबई, कोच्चि समेत देश के कई मेट्रो सिटीज में इन दिनों ऐसा ही हो रहा है। लोगों को लोकल पब्लिक प्लेसेज, कैफेज, पब्लिक ट्रांसपोर्ट एरियाज में ये बुक्स मिल रही हैं।

ऐसा करने से मिलता क्या है

बड़े शहरों के युवाओं के इस आइडिया को काफी पसंद किया जा रहा है। दिल्ली में ऐसे ही कुछ ग्रप्स एक्टिव हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीजी स्टूडेंट केशव छाबड़ा 'द बुक फेयरीज ऑफ इंडिया' मुहिम चला रहे हैं। हालांकि ऐसा करने पर इन्हें रिटर्न में कुछ नहीं मिलता। इस बारे में केशव ने गाँव कनेक्शन को बताया "ऐसा करने पर मुझे एक प्रकार की संतुष्टि मिलती है।

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मुझे दूसरों को किताबें देना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूं कि जो मैं पढ़ रहा हूं, वो और लोग भी पढ़ें।" बुक फेयरीज ऑफ इंडिया शहर में कोने-कोने में बुक छिपाकर जाता है। दिल्ली मेट्रो और स्टेशंस पर बुक्स को छोड़कर जाते हैं। केशव कहते हैं "यह उम्मीद करना एक बेहतरीन अनुभव है कि आपकी छोड़ी हुई बुक कोई दूसरा पढ़े और वह भी पढ़कर उसे दूसरे के लिए छोड़ जाए।"

एक घटना का जिक्र करते हुए केशव बताते हैं "एक बार मैंने अपने कॉलेज में एक उपन्यास छिपाकर रख दिया था। कॉलेज की कुछ लड़कियां वहां से जब गुजर रही थीं तो उनकी नजर उस किताब पढ़ी। पहले तो उन्हें लगा गलती से किसी की किताब यहां छूट गई होगी। लेकिन जब उन्होंने उस पर लिखा मैसेज लिखा तो वो खुशी उछलने लगीं। वो उनकी पसंदीदा किताब थी।" फ्री में किताब देने वाले ऐसे ग्रुप्स सोशल मीडिया पर भी एक्टिव हैं।

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केशव छाबड़ा।

तेजी से बढ़ रह या कम्युनिटी ग्रुप्स ग्लोबल मूवमेंट्स से जुड़ा है। जिसमें 'द बुक फेयरीज' लंदन बेस्ड ग्रुप है। इसमें ब्रिटिश एक्टर एमा वाटसन जुड़ी हैं, वहीं न्यूयॉर्क का 'बुक्स ऑन द मूव ग्लोबल' भी यही काम करता है। केशव बताते हैं "एक अनुमान के मुताबिक, इंडिया में करीब 50 एक्टिव बुक फेयरीज हैं। यह कम्युनिटी तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली, मुंबई व बेंगलूरु जैसी मेट्रो सिटीज के बाद ये ग्रुप स्मॉल सिटीज की ओर भी बढ़ रहे हैं। कोच्चि व वडोदरा में भी बुक्स ड्रॉप करना शुरू किया है।"

किताबें मिलती कहां से हैं

सबसे पहले तो यही सवाल उठता है कि ऐसे ग्रुप्स को फ्री में देने के लिए किताबें मिलती कैसे हैं। इस बारे में केशव बताते हैं "हम सोशल साइट्स पर काफी सक्रिय रहते हैं। किताबों के लेखक और प्रकाशक हमसे संपर्क करते हैं। वो फ्री में प्रचार चाहते हैं और हम किताबें।

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हम उनकी किताबों को सार्वजनिक जगहों जैसे, मेट्रो या रेलवे स्टेशन, म्यूजिय और पार्कों में रख देते हैं। और उस पर मैसेज लिख देते हैं कि इसे पढ़ने के बाद दूसरों को दे दें। इस तरह से हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक फ्री में किताबें पहुंचा देते हैं, इनमें हिंदी और अंग्रेजी साहित्य की किताबें शामिल रहती हैं"।

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