ढाई साल बाद 10 सितंबर को भारत आएगी पाकिस्तानी दुल्हन, पति ने वीजा के लिए सरकार से लेकर सोशल मीडिया तक लगाई थी गुहार

जनवरी 2019 में भारत से तीन बारातें पाकिस्तान के सिंध गई थीं। लेकिन पुलवामा हमले के बाद तीनों दूल्हे बिना दुल्हन ही अप्रैल में वापस आ गए थे। लंबी मशक्कत के बाद 2 दुल्हनें मार्च 2021 में भारत आ गईं थी, लेकिन विक्रम की दुल्हन का वीजा ब्लैक लिस्ट हो गया था। अब ढाई साल बाद विक्रम की लंबी जद्दोजहद के बाद उनकी दुल्हन को वीजा मिला है।

Madhav SharmaMadhav Sharma   8 Sep 2021 12:31 PM GMT

ढाई साल बाद 10 सितंबर को भारत आएगी पाकिस्तानी दुल्हन, पति ने वीजा के लिए सरकार से लेकर सोशल मीडिया तक लगाई थी गुहार

जनवरी 2019 में हुई थी पाकिस्तानी दुल्हन निर्मला और भारतीय दूल्हे विक्रम की शादी।

जयपुर (राजस्थान)। आखिरकार पाकिस्तान में ढाई साल से ससुराल वापस आने का इंतजार कर रही निर्मला वापस हिंदुस्तान आ रही हैं। साल 2019 में शादी के बाद से निर्मला जैसलमेर स्थित अपने ससुराल आने के लिए इंतजार कर रही थीं। अब विदेश मंत्रालय ने इन्हें वीजा जारी कर दिया है। उन्हें वापस लाने के लिए उनके पति काफी जतन किए हैं। पाकिस्तान में स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि 10 सितंबर को 203 भारतीय, 31 NORI और 47 पाकिस्तानी वैद्धय नागरिक वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत लौटेंगे।

इससे पहले बाड़मेर के महेन्द्र सिंह और जैसलमेर के नेपाल सिंह की पत्नियां भी लंबे इंतजार, जयपुर से लेकर दिल्ली तक जद्दोजहद के बाद मार्च 2021 में करीब 2 साल बाद अपनी ससुराल आ पाईं थी। गांव कनेक्शन ने तब इनकी कहानी प्रकाशित की थी। मार्च 2021 में विक्रम सिंह भाटी (26 वर्ष) की पत्नी निर्मला का पासपोर्ट ब्लैकलिस्ट होने के कारण उन्हें भारत आने का वीजा नहीं मिल सका था।

क्या है पूरी कहानी?

भारत के जैसलमेर-बाड़मेर और पाकिस्तान के सिंध इलाके के लोगों के बीच शादियों का सिलसिला देशों के बंटवारे के बाद भी जारी है। हर साल कई शादियां सरहद पार होती हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक जब थार एक्सप्रेस चालू थी तब 20-40 शादियां होती थीं, लेकिन पुलवामा हमले के बाद वीजा मिलना बंद हुआ, फिर कोविड के चलते इधर डेढ़ साल से सब बंद है।

बाड़मेर जिले के 'खेजड़ का पार' गांव निवासी महेन्द्र सिंह, जैसलमेर के बइया गांव के नेपाल सिंह और इनके भाई विक्रम सिंह जनवरी 2019 में बारात लेकर पाकिस्तान के अमरकोट जिले में गए थे। अमरकोट गांव के सिनोई गांव में इनकी शादियां हुई।

महेंद्र की तरह नेपाल सिंह की शादी भी सिनोई गांव में 22 जनवरी 2019 को कैलाश कंवर के साथ हुई। जबकि इसी गांव में 25 जनवरी 2019 को विक्रम सिंह की शादी निर्मला बाई से हुई।

तीनों की शादी के अगले महीने यानी 14 फरवरी को पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने कश्मीर के पुलवामा में हमला कर दिया, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। आतंकी हमले और भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे देश के लिए वीजा पर भी पाबंदी लगा दी। इसीलिए तीनों दुल्हनों को भी भारत आने का वीजा जारी नहीं हुआ। तीनों दूल्हे महेन्द्र सिंह, विक्रम सिंह और नेपाल सिंह बिना दुल्हनों की विदाई के अप्रैल (2019) महीने में वापस वतन आ गए थे।

मार्च 2021 में नेपाल सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया था, "पुलवामा में आतंकी हमला होने के बाद दोनों देशों ने आने-जाने की पाबंदी लगा दी थी। मुझे इसी कारण वहां अप्रैल तक रुकना पड़ा था। वीजा मिलने के बाद थार एक्सप्रेस से हम भारत आ गए। इसके बाद से ही मैं और मेरा भाई विक्रम सिंह अपनी-अपनी पत्नियों को भारत लाने की कोशिश कर रहे थे।"

दोनों देशों के बीच तल्खी और आने-जाने पर सख्ती के चलते 2019 और 2020 में इन्हें वीजा नहीं मिला। तीनों के परिजनों ने इसके बाद बाड़मेर से बीजेपी सांसद और केन्द्रीय मंत्री मंत्री कैलाश चौधरी के पास दुल्हनों को वीजा दिलाने की मांग की। कैलाश चौधरी के प्रयासों से मार्च 2021 में महेन्द्र और नेपाल सिंह की पत्नी तो वापस आ गईं, लेकिन विक्रम सिंह की पत्नी निर्मला का पासपोर्ट विदेश मंत्रालय ने ब्लैक लिस्ट कर दिया।

तब से ही पति विक्रम सिंह मीडिया, सोशल मीडिया और नेताओं के चक्कर लगाकर पत्नी को भारत लाने की मांग उठा रहे थे।

केंद्रीय मंत्री चौधरी के सहायक पंकज कड़वासरा गांव कनेक्शन को बताते हैं, "निर्मला के पासपोर्ट ब्लैक लिस्ट होने के कारण मंत्रालय ने नहीं बताए, लेकिन हम लगातार प्रयास कर रहे थे कि विक्रम की पत्नी भी भारत आए। हमारी लगातार कोशिशों का नतीजा रहा कि 14 अगस्त 2021 को मंत्रालय ने निर्मला का पासपोर्ट ब्लैकलिस्ट श्रेणी से हटा दिया। उनका वीजा भी जारी हो चुका है। अब कभी भी निर्मला अपने ससुराल आ सकती हैं।"

निर्मला के पति विक्रम सिंह (26 वर्ष ) पत्नी के भारत आने की खबर से बेहद खुश हैं। वे कहते हैं, "सरकार और सांसद (कैलाश चौधरी) की कोशिशों से ही मेरी पत्नी भारत आ पा रही है। शादी के बाद वो पहली बार अपने ससुराल आ रही। अब बस यही चाहता हूं कि आने की तारीख तय हो ताकि उन्हें लेने परिवार सहित वाघा बॉर्डर पर जाऊं।" विक्रम को उम्मीद है वीजा मिलने के बाद आगे की प्रकिया शुरु होगी और जल्द उनकी दुल्हन घर आएगी और वो ये दिवाली साथ मनाएंगे।

विक्रम, नेपाल, और गोपाल सिंह तीनों सगे भाई हैं, दो की शादी पाकिस्तान के सिंध के अमरकोट स्थित सिनोई गांव में हुई है। जबकि गोपाल सिंह की शादी भारत में ही हुई है

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पाकिस्तान में भारत की बारात। फोटो- अरेंजमेंट

सरहदें बटी लेकिन रुकावट के साथ जारी रहा शादियों का सिलसिला

बाड़मेर के सामाजिक कार्यकर्ता और इस मुहिम का हिस्सा रहे मनोज चौधरी पाकिस्तान से रोटी-बेटी के रिश्ते की बारीकियों को समझाते हैं। वे कहते हैं, 'पाकिस्तान के सिंध में सोढ़ा राजपूतों के हजारों परिवार रहते हैं। ये परमार राजपूत कुल के वंशज हैं। परमार राजपूतों का नौवीं सदी में मध्य भारत के मालवा क्षेत्र में शासन था। 13वीं सदी में अलाउद्दीन खिलजी के मालवा पर आक्रमण के बाद ये राजपूतों का शासन भारत से खत्म हो गया। पाकिस्तान के सिंध में आज भी सोढ़ा राजपूत परिवार अपनी सदियों पुरानी परंपराओं को निभाता है। इसीलिए भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद भी वे भारत में राजपूतों से अपनी बेटियां ब्याहते रहे हैं।'

मनोज चौधरी कहते हैं, 'रेगिस्तान के इन दोनों जिले जैसलमेर और बाड़मेर में सोढ़ा राजपूतों की कई बहुएं शादी के बाद एक बार भी अपने ससुराल यानी हिंदुस्तान नहीं आई हैं। वजह दोनों देशों के बीच वीजा बगैरह जैसी तकनीकी खामियां ही बनती हैं, लेकिन इसके बाद भी साल में 20-40 शादियां पाकिस्तान से भारत में की जाती हैं।'

निर्मला बाई का वीजा।

बाड़मेर में रहने वाले कवि दीप सिंह भाटी भारत-पाकिस्तान के उतार-चढ़ाव वाले रिश्ते, पुलवामा हमला, सर्जिकल स्ट्राइक और फिर कोरोना को रिश्तों में आई कमी के लिए जिम्मेदार मानते हैं। वे कहते हैं, "आजादी के बाद सीमाओं पर जैसे-जैसे तारबंदी होने शुरू हुई, शादियों में भी कमी आने लग गई। हालांकि जब दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य होते हैं तो शादियों की संख्या भी बढ़ जाती है। लेकिन बीते सालों में एक-दूसरे देश में शादियां कम होने लगी हैं। "

भाटी आगे बताते हैं, "पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर में भाटी, राठौड़ और चौहान राजपूतों की संख्या ठीक-ठाक है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अमरकोट, छाछरौ, थारपारकर जैसी जगहों पर परमार राजपूत अधिक हैं। उन्हें अपनी जाति और गोत्र के हिसाब से उधर लड़के नहीं मिलते, इसीलिए पाकिस्तान के परमार राजपूत यहां शादी करने आते हैं। पाकिस्तान की ओर से पुलवामा हमले और भारत की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक से कई दुल्हनों को वीजा नहीं मिला। वे दो-ढाई साल से शादी के बाद भी पाकिस्तान में अटकी हुई हैं। स्थानीय नेताओं के प्रयासों से कुछ को वीजा मिल रहा है, लेकिन कई अभी भी वहीं अटकी हुई हैं।"

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