किसान आंदोलन में कब क्या हुआ? पहले दिन से 378वें दिन तक का पूरा घटनाक्रम

आखिरकार किसान आंदोलन खत्म हो गया। किसान 11 दिसंबर से घर वापसी करेंगे। दिल्ली बॉर्डर पर किसान 378 दिन से डेरा डाले हैं। कृषि कानून का मुद्दा वैसे तो करीब 18 महीने पुराना है। इसमें 14 महीने खूब हंगामेदार रहे हैं। इस आंदोलन के साथ कुछ तारीखें भी इतिहास में दर्ज हो गईं। जानिए वो प्रमुख तारीखें...

Arvind ShuklaArvind Shukla   9 Dec 2021 10:12 AM GMT

किसान आंदोलन में कब क्या हुआ?  पहले दिन से 378वें दिन तक का पूरा घटनाक्रम

9 दिसंबर 2021 को किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया। किसान नेताओं ने कहा ये एतिहासिक जीत है, जो आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों को समर्पित है। तीनों कृषि कानूनों के अध्यादेश के रुप में वजूद में आने, संसद में उनके पास होने से लेकर वापसी तक जोरदार हंगामा रहा। किसान संगठनों ने लंबी लड़ाई लड़ी और आखिरकार सरकार किसानों की सभी शर्तें माननी पड़ी। कृषि अध्यादेश 5 जून 2020 को आए थे, जबकि विरोध में किसान दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर 2020 से बैठे हैं। गांव कनेक्शन आपको बता रहा है वो प्रमुख तारीखें जब किसान आंदोलन के दौरान बड़ा घटनाक्रम हुआ।

9 दिसंबर- 2021- संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार द्वारा किसानों की सभी शर्तें मानने के बाद एक साल से ज्यादा समय से चल रहे आंदोलन को वापस लेने का फैसला किया। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसान संगठनों को संसोधित सहमति पत्र सौंपा था, संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं की बैठक में सर्वसम्मति से इसे मान लिया गया। किसानों ने इसे एतिहासिक जीत बताते हुए कहा, जब यहां आए थे लाठियां बरसाई जा रही थीं, अब जब जाएंगे, फूल बरसाए जाएंगे।"


7 दिसंबर 2021- सरकार से मिले ड्राफ्ट की कुछ शर्तों पर किसान मोर्चा ने ऐतराज जताया। जिसके बाद किसानों की तरफ से गठित 5 सदस्यीय समिति ने अपनी बैठककर सरकार को अपनी आपत्तियां बताईं और सरकार ने संसोधित प्रस्ताव मांगा जो उन्हें 8 दिसंबर को मिला। इस समझौते में पंजाब की मॉडल की तर्ज पर सभी मृतक किसानों को राज्य सरकारें मुआवजा देंगी। एमएसपी पर कमेटी बनेगी, जिसमें किसान संगठन समेत संबंधित घटक शामिल होंगे। भारत सरकार राज्यों सरकारों से अपील करेगी कि वो किसानों पर दर्ज सभी मुकदमें वापस लें।

29 नवंबर 2021- कृषि कानून वापसी बिल संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया। Farm laws repeal bill को पहले लोकसभा में पेश किया फिर राज्यसभा में, हंगामे के बीच दोनों सदनों में बिल कृषि कानून वापसी बिल पास हो गया।

27 नवंबर 2021- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पराली जलाना अपराधिक कानून नहीं होगा। किसानों ने 29 नवंबर के दिन दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च टाला।

26 नवंबर 2021- किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो गया। दिल्ली की सीमाओं पर सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, शाहजहांपुर और चीका बॉर्डर पर पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान संगठनों ने दिल्ली कूच के बाद 26 नवंबर 2020 को डेरा डाला था। कई हजार किसान 26 नवंबर 2020 के बाद से ही यहीं तंबू, टेंट में ठहरे हुए हैं। किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर बॉर्डर पर जश्न मनाया जा रहा है।

20 नवंबर 2021- सरकार के कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान और घर वापसी की अपील के बाद भी किसान संगठनों ने वापस लौटने से इनकार कर दिया। किसान नेताओं ने कहा जब तक सरकार संसद में लिखित नहीं देती वो वापस नहीं जाएंगे। सरकार से आधी लड़ाई जीतने के बाद किसानों ने लखनऊ में बड़ी किसान महापंयाचत की जिसमें उन्होंने एमएसएपी कानून बनाए जाने तक घर लौटने से इनकार किया, किसान ने नारा दिया- एमएसपी कानून नहीं तो आंदोलन वहीं।

19 नवंबर 2021- गुरु पर्व की सुबह आंदोलनकारी किसानों के लिए बड़ी खबर लेकर आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में देश से क्षमा मांगते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। पीएम मोदी ने कहा कि कृषि कानून अच्छे थे, छोटे किसानों की भलाई के लिए थे, लेकिन सरकार किसानों को कृषि सुधारों के फायदे समझाने में नाकाम रही। पीएम मोदी ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसानों को अब अपने घरों और खेतों में लौट जाना चाहिए। पीएम के ऐलान के बाद 24 नवंबर को केंद्रीय कैबिनेट ने कृषि कानूनों की वापसी के लिए कैबिनेट में औपचारिकताएं पूरी की। बिल वापसी प्रक्रिया 29 नवंबर को होगी। संबंधित खबर

12 अक्टूबर 2021- लखीमपुर हिंसा के बाद देशभर के किसान संगठनों ने मारे गए 4 किसानों और एक पत्रकार को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीद दिवस का आयोजन, देश के कई राज्यों के किसान लखीमपुर के तिकुनिया पहुंचे। इस दौरान किसान संगठनों ने शहीद किसानों की अस्थिकलश यात्रा रवाना किया। किसान संगठनों ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाए जाने गिरफ्तार करने की मांग की।

3.अक्टूबर 2021- संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब, हरियाणा और यूपी में कृषि कानूनों की वापसी तक बीजेपी नेताओं और सरकार के मंत्रियों के कार्यक्रमों का विरोध का ऐलान किया था। इस दौरान उन्होंने लखीमपुर में एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री को काले झंडे दिखाए। जिसके बाद आरोप है कि केंद्रीय मंत्री ने किसानों संगठनों को चेतावनी दी। 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने गांव में एक कार्यक्रम था, जिसमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को प्रमुख अतिथि के रुप में आना था, संयुक्त किसान मोर्चा की कॉल पर किसान विरोध करने पहुंचे, हैलीपेड को घेर लिया। जिससे केशव प्रसाद मौर्य वहां उतर नहीं सके। आरोप है कि इससे नाराज गृह राज्य मंत्री के बेटे ने किसानों पर गाड़ियां चढ़वा दीं। जिसमें 4 किसानों की मौत हो गई। इसके बाद हिंसा में 3 अन्य लोगों की मौत हो गई। लखीमपुर केस में कुल 8 लोगों की जान गई थी।

27 सितंबर 2021-कृषि कानूनों को वापस लेने, एमएमपी पर कानून बनाने समेत कई मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में देशभर के कई राज्यों में हाईवे और रेलवे ट्रैक पर उतरे। किसानों के भारत बंद का कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया।

5 सितंबर 2021- किसान राजनीति के गढ़ रहे पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत में लाखों की भीड़ जुटाकर किसान संगठनों ने सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराया है। संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक ये अब तक की सबसे बड़ी किसान पंचायत थी, जिसमें देशभर से लाखों किसान शामिल हुए हैं। किसान नेताओं ने साफ किया है कृषि कानून वापसी तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी अगली रणनीति का भी महापंचायत में ऐलान किया है।

28 जनवरी 2021- 26 जनवरी को लालकिले और दिल्ली में हंगामे के बाद किसान नेता बैकफुट पर। गाजीपुर बॉर्डर खाली कराने के लिए राकेश टिकैत को नोटिस जारी किया जा चुका था, भारी संख्या में पुलिसबल तैनात था लेकिन इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसमें राकेश टिकैत भावुक हो गए और उन्होंने रोते हुए कहा कि अगर किसानों को यहां से हटाया गया तो यहीं जान दे दूंगा। उन्होंने ये भी कहा कि जब तक उनके गांव से पानी नहीं आएगा वो पानी नहीं पिएंगे इसके बाद पश्चिमी यूपी से लोगों को हुजुम उमड़ पड़ा। गाजीपुर बॉर्डर आंदोलन का केंद्र बन गया और किसान आंदोलन को आक्सीजन मिल गई। इसके टिकैत आंदोलन का न सिर्फ प्रमुख चेहरा बने. बल्कि उनकी अगुवाई में देश के 20 राज्यों में किसान महापंचायतें हुई।

26 जनवरी 2021 अपनी मांगे पूरी न होने पर किसान संगठनों ने दिल्ली के अंदर ट्रैक्टर रैली निकाली। सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर और शाहजहांपुर बॉर्डर से हजारों ट्रैक्टर से किसानों ने दिल्ली कूच किया। इस दौरान पुलिस ने उन्हें बॉर्डर पर रोकने की कोशिश, मामूली झड़प के बाद किसान दिल्ली में प्रवेश कर गए, इस दौरान कई घटना, पथराव, लाठीचार्ज और आंसूगैस के गोलों का प्रयोग किया गया। किसानों का एक गुट ट्रैक्टर लेकर लालकिले में प्रवेश कर दिया। इस दौरान भारी हंगामा हुआ। पुलिस-सुरक्षा बलों के साथ ही भारी संख्या में किसान घायल हुए। वहीं आईटीओ चौक पास एक किसान की मौत हो गई। 26 जनवरी को हुई हिंसा से किसान संगठनों ने सुनियोजित और षड्यंत्र बताया। हालांकि इस घटना को लेकर देश ने तीखी प्रतिक्रिया भी दी थी।

14 जनवरी-2021 कृषि कानूनों के मुद्दे पर किसान आंदोलन के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यीय कमेटी बनाई जिसमें एक सदस्य भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र मान ने 14 जनवरी 2021 को अपना नाम वापस ले लिया।

22 जनवरी-2021 सरकार और किसान संगठनों के बीच 11वें दौर की वार्ता बेनतीजा।

12 जनवरी 2021- सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून मामले पर सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगाई और चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इससे पहले 11 जनवरी को कोर्ट से सरकार ने पूछा था कि कृषि कानूनों पर रोक आप लगाएंगे या हम।

4 जनवरी 2021- मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्री ने बयान जारी कर कहा है कि कृषि कानूनों से उनका कोई लेना नहीं है और न ही भविष्य में कॉन्ट्रैट या कॉरपोरेट फॉमिंग में आने का कोई इरादा है।

2 जनवरी 2021- संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को अल्टीमेट दिया कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च करेंगे।

26 दिसंबर 2020- कृषि कानूनों को पर जारी विवाद के बीच एनडीए में सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने राजग से नाटा तोड़ लिया। राजस्थान के बड़े जाट नेताओं में शुमार हनुमान बेनीवाल ने सरकार से नाता तोड़ लिया।

25 नवंबर 2020 को पंजाब हरियाणा, पश्चिमी यूपी, एमपी, राजस्थान समेत कई राज्यों के किसानों ने दिल्ली कूच किया। पंजाब के किसानों को रोकने के लिए हरियाणा में कई जगह सड़क खोदी गई। कटीले तार लगाए गए। पानी बौछार हुई लेकिन सभी बाधाओं को तोड़ते हुए आगे बढ़ते रहे।

29 नवंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में तीन कृषि कानूनों की देश के किसानों और कृषि में अमूलचूल परिवर्तन लाने वाला बताया।

28 नवंबर 2020 दिल्ली के बॉर्डर पर जमा किसानों से कृषि मंत्री अमित शाह ने कहा बुरारी ग्राउंड पर धरना दें तो सरकार बात करेगी। लेकिन किसानों ने इनकार कर दिया। सिंघु बॉर्डर, गाजीपुर, चीका, शाहजहांपुर और टीकरी समेत कई नाकों पर किसानों ने मोर्चा जमा दिया।

7 नवंबर- 2020- पंजाब की 32 किसान यूनियन और देश के दूसरे किसान संगठनों के मिलकर संयुक्त किसान मोर्चे का गठन किया, जिसमें देश के कई राज्यों के संगठन शामिल हुए। मोर्चे की पहली बैठक 7 नवंबर को दिल्ली में हुई। जिसमें संचालन के लिए 9 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया।

5 नवंबर 2020 को भारत बंद, लेकिन पंजाब-हरियाणा में रहा ज्यादा असर, 25-27 नवंबर के बीच दिल्ली कूच का ऐलान। भारत बंद का ये ऐलान अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के अह्वान पर हुआ था।

31 अक्टूबर 2020- पंजाब के बाद केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान की विधान सभा में कृषि संशोधन विधेयक पेश किये गए हैं। इन बिलों के तहत किसानों का उत्पीड़न करने पर तीन से सात साल की जेल हो सकती है।

20 अक्टूबर 2020- मोदी सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तीन कृषि विधेयक पेश किए।

6 अक्टूबर- 2020- नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर 17 संगठनों के कई हजार किसानों ने हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का घर घेरने कोशिश की। पुलिस ने किसानों को रोकने और उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और वैटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिसके विरोध में किसान वहीं धरने पर बैठ गए हैं।

27 सितंबर 2020 को दोनों सदनों से पास बिलों पर राष्ट्रपपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर किए। इसी के साथ कोविड लॉकडाउन के दौरान जून 2020 में कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश (Farmers' Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act, 2020) आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन (The Essential Commodities (Amendment) Bill)और मूल्य आश्वासन पर किसान (संरक्षण एवं सशक्तिकरण) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश (The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill) कानून बनकर लागू हो गए।

20 सितंबर 2020 राज्यसभा में 20 सितंबर को कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल ( Farmers' Produce Trade & Commerce (Promotion & Facilitation) Bill 2020 और कृषक (सशक्ति करण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 Farmers (Empowerment & Protection) Agreement on Price Assurance & Farm Services Bill 2020 आज यानि 20 सितंबर 2020 को राज्यसभा में ध्वनिमत से पास हुए।

17 सितंबर 2020- संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कृषिक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा प्रदान करना) विधेयक 2020, कृषि (सशक्तिकरण और और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक पास 17 सितंबर को सदन में पास गए। आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 पहले ही पास हो चुका था।

17 सितंबर 2020- नए कृषि कानूनों के विरोध में 17 सितंबर को केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफा दे दिया है। एनडीए में सहयोगी अकाली दल के कोटे से नरेंद्र मोदी कैबिनेट में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा, "मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने पर मुझे गर्व है।"

14 सितंबर- 2020 कृषि अध्यादेश पंजाब और हरियाणा से निकलकर दिल्ली पहुंचा और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने सरकार के खिलाफ बिगुल बजाया। "अपनी मंडी अपना दाम, जय जवान, जय किसान", "कॉरपोरेट भगाओ, देश बचाओ", किसान विरोधी कृषि अध्यादेश वापस लो, के नारों के साथ

10 सितंबर 2020- कृषि अध्यादेशों के विरोध में पंजाब के बाद कई राज्यों के किसान कूदते। हरियाणा ने पंजाब के किसानों के कदमताल मिलाया। 10 सितंबर को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कई जिलों के किसानों ने रैली निकाली। रैली निकालने के लिए धारा 144 लगाई गई। किसानों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें कई किसान घायल हुए।

10 अगस्त 2020-पंजाब में राष्ट्रीय किसान महासंघ ने 10 अगस्त से "अन्नदाता जागरण अभियान" शुरू किया है। इस अभियान के तहत पंजाब में भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर, जालंधर ने जेल भरो आंदोलन किया, इस दौरान सैकड़ों किसानों ने अपनी गिरफ्तारियां दी।

22-28 जून-2020- कृषि कानूनों का विरोध कर रहे पंजाब की जत्थेबंदियों ने क्रांतिकारी किसान यूनियन की अगुवाई में केंद्र के नए कृषि अध्यादेश के खिलाफ 22 से 28 जून तक मनाए जा रहे 'केंद्र विरोधी सप्ताह' के तहत गांवों, कस्बों और शहरों में मोदी सरकार की अर्थियां फूंक कर आंदोलन की शुरुआत की गई।

5 जून-2020 कोरोना की पहली लहर के बीच भारत सरकार कृषि सुधारों के नाम पर दो नए कृषि कानून और एक कानून में सुधार के लिए तीन कृषि अध्यादेश लेकर आई। 'एक राष्ट्र एक बाजार की नीति' मंजूरी देते हुए तीन जून को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़े और कई अहम फैसले लिये गये । और तीन नए कृषि कानन अध्यादेश के रुप में वजूद में आए।

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.