भावान्तर के भंवर में उलझे किसान, पर्ची लेकर भुगतान के लिए लगा रहे है मंडी के चक्कर 

भावान्तर के भंवर में उलझे किसान, पर्ची लेकर भुगतान के लिए लगा रहे है मंडी के चक्कर उज्जैन ,मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा किसानों को सुविधाएं देने के लिए भावान्तर योजना चलाई जा रही है।

उज्जैन ,मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा किसानों को सुविधाएं देने के लिए भावान्तर योजना चलाई जा रही है इस योजना के पीछे सरकार की मंशा किसानों को मंडी के भावों मे उतार-चढ़ाव की चिंता से मुक्त करना था, योजना अच्छी है और मध्य प्रदेश के किसानों को इससे काफ़ी उम्मीदे भी थी लेकिन जमीनी स्तर पर देखे तो इस योजना का लाभ उठाने के किसानों को बहुत दिक्कतें आ रही है।

उज्जैन मंडी में प्याज बेचने आए किसान और घटिया तहसील के दुलेटिया गाँव के सरपंच सुरेश पटेल बताते हैं, "घटिया तहसील के ढाई सौ से तीन सौ किसान पर्ची लेकर अंतर राशि प्राप्त करने के लिए उज्जैन मंडी के चक्कर लगा रहे है।"

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मंडी में आए शर्मा बताते हैं "कुछ 80-85 किसान डिफाल्टर है जब तक उनका फाइनल नही हो जाता भुगतान नही हो पायेगा।" सुरेश पटेल बताते हैं, " भावान्तर योजना के तहत सोयाबीन का समर्थन मूल्य तीन हजार पचास रुपये था और इस समय मंडी का मूल्य तैतीस सौ से चार हजार के बीच का है अक्टूबर में मैंने जब अपनी सोयाबीन बेची थी उस समय मंडी में सोयाबीन का मूल्य छब्बीस सौ रुपये प्रति कुन्तल था।" सुरेश पटेल ने 30 बीघा सोयाबीन बोयी है, जिसमें पांच परिवार खाते है।

सुरेश आगे बताते हैं, "अभी तक शंकर पटेल, मोहन पटेल, दशरथ पटेल का भुगतान नही मिला जबकि सोयाबीन के रेट बढ़ गए है ऐसे में अगर अपनी सोयाबीन हम आज बेचते तो एक हजार का सीधा फायदा था और पैसे भी नकद मिल जाते ,दूसरे सरकार का जो प्रति हेक्टेयर उपज का पैमाना प्रति हेक्टेयर 15 कुन्तल है। वो दशकों पुराना है जबकि प्रति हेक्टेयर 25 कुन्तल की पैदावार है। बड़ी हुई उपज मंडी वाले भावान्तर योजना के तहत नही लेते।"

वहीं उज्जैन के ताजपुर में रहने वाले अरुण (32 वर्ष) जो कि प्याज और लहसुन की खेती करते है। उन्होंने बताया,"इस वर्ष बीबी 11 बीघा लहसुन बोया है। भावान्तर योजना के बारे में पूछने पर बताते हैं, "इसके विषय मे कोई जानकारी नही है अरुण का कहना हैं आमतौर पर सरकारी योजनाओं की जानकारी सही समय पर किसानों तक नही पहुंच पाती।"

भावान्तर का लाभ लेने में आ रही है दिक्कतें ,बढ़ गयी है दौडभाग

उज्जैन के पंचेड गाँव में रहने वाले पदम सिंह बिहारिया बताते हैं, "सरकार की योजना अधिकारी वातानुकूलित कक्षों में बैठकर बनाते है। उन्हें किसानों की दिक्कतों से कोई मतलब नही है मेरे गाँव में करीब 40 किसान ऐसे है जिन्हें अब तक अक्टूबर में बेचीं गयी सोयाबीन का पूरा भुगतान नही मिला,इसके अलावा मंडी में व्यापारी पंजीकृत किसानों कि सोयाबीन कि बोली व्यापारी जान बूझकर कर मार्किट रेट से 100-150 रूपये कम बोली लगती हैं।"

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पदम सिंह आगे बताते हैं, "मंडी में एक बीघे के रकबे पर तीन कुंतल सोयाबीन सरकार लेती है। जबकि सोयाबीन कि पैदावार वर्तमान समय में 4 से 5 कुंतल प्रति बीघा है। शेष उपज को भावान्तर योजना के तहत नही लिया जाता साथ ही ऑनलाइन में बहुत सी दिक्कतें आ रही है।"

योजना का लाभ लेने में आ रही दिक्कतों के बारे में पदम सिंह बिहारिया बताते हैं, "मेरा खुद का दो ट्राली सोयाबीन ऑनलाइन चढ़ने में छुट गया मंडी में बताया गया कि अब मुझे इसका भुगतान नही मिलेगा ,साथ ही मंडी में उपज बेचने के बाद 10 हजार रूपये नकद किसान के हाथ में आते है बाकी पैसा किसान के खाते में चेक या आर टीजीएस के द्वारा दिया जाता है कायदे से तो ये पैसा 24 घंटे में किसान को मिल जाना चाहिये लेकिन इसके लिए भी किसानों को तीन से चार दिन का प्रतीक्षा करना पड़ता है कही खाता संख्या या आई एफ सी कोड में फीडिंग में गलती हो गयी तो जल्दी सुधार नही हो पाता।"

-इस बारे में मंडी सचिव उज्जैन राजेश गोयल ने बताया, "किसानों का अब तक का सारा भुगतान कर दिया गया है अक्टूबर में 11000, नबम्बर में 33 हजार और दिसम्बर में 11 हजार किसानों का भुगतान किया गया है और किसी किसान का भुगतान अब शेष नही है। किसानों की उपज के लिए अभी कोई सरकारी मानक तय नही है किसानों को भावान्तर का फायदा दिया जा रहा है।"

खरीफ की फसल से इक्कीस लाख किसान लाभान्वित: मंडी बोर्ड एम पी

अपर संचालक मंडी बोर्ड मध्य प्रदेश अमर सिंह ने बताया, "खरीफ की फसल में इक्कीस लाख अठासी हजार किसानों ने पंजीकरण कराया है और रकबे के हिसाब से उडद 67 प्रतिशत मक्का 50 प्रतिशत, मूंगफली 21 प्रतिशत, तुअर18 प्रतिशत, टिल 9 प्रतिशत, रामतिल 6 प्रतिशत, रकबा पंजीकृत हुआ है।"

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प्रति बीघा औसत उपज के आंकलन पर अपर संचालक अमर सिंह ने बताया, "जलवायु के आधार पर प्रदेश को कई हिस्सों में बंट गया है हर जगह का औसत अलग-अलग है। भावान्तर योजना को जमीनी स्तर तक ले जाने के प्रयास पर अमर सिंह बताते हैं, "खरीफ की फसल के दौरान बहुत कम समय में योजना का क्रियान्वयन किया गया इधर रबी के फसल का पंजीकरण चल रहा है योजना को हर किसान तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है साथ ही किसानों को योजना में पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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