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‘तरकारी’ नाम की इस दुकान पर मिलती हैं ‘जहर मुक्त’ सब्जियां

Neetu SinghNeetu Singh   30 Jan 2018 12:31 PM GMT

‘तरकारी’ नाम की इस दुकान पर मिलती हैं ‘जहर मुक्त’ सब्जियांइस दुकान पर मिलती हैं जैविक सब्जियां।

लखनऊ। हममें से हर कोई हर दिन बाजार से कीटनाशक के छिड़काव वाली जहरीली सब्जियां खरीदता है। हम अपने खाने में हर दिन किसी न किसी रूप में जहर खा रहे हैं। इस जहर को कम करने के लिए एक किसान ने जहर मुक्त सब्जियां देने की ठान ली है। इन्होंने एक साल पहले ‘तरकारी’ नाम की एक दुकान खोली, जहां वह सैकड़ों लोगों को ‘जहरमुक्त सब्जियां’ (जैविक) दालें और अनाज मिलता है।

हर रविवार को इस दुकान में सैकड़ों लोग इन सब्जियों को खरीदने के लिए खड़े रहते हैं। इस तरकारी की दुकान के अलावा कई जिले में इस किसान की सब्जी, अनाज और दालों की मांग रहती है, जिसे ये पार्सल के द्वारा उपलब्ध करवाते हैं। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के एक किसान की, जिन्होंने आज से सात साल पहले पांच हेक्टेयर जमीन से जैविक खेती करने की शुरुअात की थी। अभी ये 10 हेक्टेयर जमीन में जैविक सब्जियां, अनाज, दालें उगा रहे हैं।

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ग्राहकों की लगी रहती है भीड़।

मध्य प्रदेश के खरगोन जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर विसटान गांव में किसान अविनाश सिंह मंटू दांगी किसान अविनाश सिंह मंटू दांगी (46 वर्ष) जैविक खेती को लेकर अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं, "मेरे अपने परिवार का अनुभव है अब किसी को पेट में कब्ज नहीं होता। थकान नहीं होती, पिछले सात वर्षों से हमारा पूरा परिवार जहर मुक्त भोजन कर रहा है। अगर हमें अस्पताल नहीं जाना है तो अपने खेतों में रासायनिक खादें और कीटनाशक दवाईयां डालना बंद करना होगा।"

अविनाश कुमार दांगी एक साधारण किसान हैं। ये अपने पांच हेक्टेयर खेत को जैविक खेती के लिए सर्टिफाईड भी करा चुके हैं। अविनाश ने पिछले कुछ वर्षों से न तो बाजार से रासायनिक खाद खरीदी है औंर न ही कीटनाशक दवाई। इनके पास अपने खुद के देसी बीज भी हैं, जब इन्हें कोई नई प्राजाति बोनी होती है तो एक बार ही उसकी देसी वैराइटी खरीदते हैं बाद में उसका बीज खुद ही संरक्षित कर लेते हैं।

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जैविक तरीके से खेती करने में सब्जियां उगती हैं ज्यादा अच्छी।

एक शोध के अनुसार बाजार से खरीदकर लाई गई जहरीली सब्जियों को पानी से धुलने पर 17 से 39 प्रतिशत तक ही कारगर साबित होगा। अगर पानी के साथ चार ग्राम लेमन वाटर, चार ग्राम बेकिंग सोडा, 160 ग्राम एसिडिक मिलाकर इन जहरीली सब्जियों को धोया जाता है तो ये 55 से 76 फीसदी तक कारगर होगा।

"हम बाजार में दो तीन घण्टे ही अपनी तरकारी की दुकान लगाते हैं। हमारे कुछ ग्राहक तो अब परमानेंट फिक्स हो गए हैं। यहां सब्जी के अलावा दाल और गेहूं भी मिलता है। सिर्फ खरगोन में ही नहीं मध्यप्रदेश के कई जिलों में मैं जैविक सब्जियां और अनाज पार्सल के द्वारा अपने ग्राहकों को उनकी मांग पर भेजता हूँ।" अविनाश ने कहा, “उपदेश देने से ज्यादा जरुरी है कि जहरमुक्त भोजन उगाने की शुरुवात हर किसान अपने खेत से करे। बाजार में बेचने के लिए न सही पर किसान कमसे कम अपने खाने के लिए जहर मुक्त सब्जियां और अनाज जरूर उगाए। जिससे अस्पताल में हर साल जाने वाला पैसा अपने आप बचेगा। इससे किसान भी स्वस्थ्य और खेत की मिट्टी भी स्वस्थ्य।”

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बच्चे भी अविनाश दांगी के खेत पर सीखने आते हैं।

खरगोन जिले के ग्रामीण क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी पी एस बारचे गांव कनेक्शन को फ़ोन पर बताते हैं, "जैविक सब्जियों में वह सभी विटामिन्स और प्रोटीन मौजूद होते हैं जिसकी हमें अपने खान-पान ने हर दिन जरूरत होती है। अविनाश की तरह हमारे क्षेत्र के 250 किसानों से ज्यादा अपने परिवार का खाने भर का जैविक सब्जियां और अनाज उगा रहे हैं।”

वो आगे बताते हैं, “जैविक फसल उगाना शुरुआत में नदी के बहाव के विपरीत हो सकता है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम सभी के लिए बहुत उपयोगी हैं। मुझे लगता है कोई भी किसान अगर बाजार में जैविक सब्जियां नहीं बेच सकता तो अपने खाने के लिए जैविक पैदावार जरूर करे नहीं तो जितना वो पैदा करेगा उससे ज्यादा अस्पताल में पैसा दे आएगा।"

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हर कोई खाना चाहता है जहरमुक्त भोजन।

अविनाश दांगी देशी सब्जियों के साथ-साथ अब विदेशी सब्जियां ब्रोकली, पिच कोय, लेट्यूस, रेड कैबेज, जो कि पोषक तत्वों और विटामिन से भरपूर होती हैं, इनका भी जीरो बजट प्राकृतिक खेती से उत्पादन ले रहे है। अविनाश का कहना है, "ये किसानों का सिर्फ एक वहम है कि हाइब्रिड बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाईयों से ही ज्यादा पैदावर होती है। देखने में ये उपज ज्यादा तो लगती है पर किसान उस जहर की कुछ मात्रा को खाकर उससे दोगुना पैसा अस्पताल में दे आता है।"

अविनाश न सिर्फ जैविक खेती करते हैं बल्कि ज्यादा से ज्यादा परिवारों को जैविक भोजन भी उपलब्ध करवाते हैं। इनके फॉर्म हाउस पर सैकड़ों किसान जैविक खेती की ट्रेंनिग लेने भी आते हैं। अविनाश से अगर देश के बाकी किसान भी सीख लें जो अपने खेत में अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाईयां डालते हैं, जिसकी वजह से वो हर दिन जहर खा रहे हैं। अगर वो जैविक खेती करते हैं तो उन्हें बाजर में उनकी उपज का भाव भी ज्यादा मिलेगा। शुद्ध अनाज, सब्जी और दालें खरीदनें वालों की भीड़ है जो ज्यादा पैसा देकर शुद्ध भोजन करना चाहते हैं।

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तरकारी नाम की ये दुकान अपने क्षेत्र में है मशहूर।

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