किसान कोल्डस्टोर से नहीं निकाल रहे आलू, वापस कर दे रहे पर्ची

vineet bajpaivineet bajpai   25 Nov 2017 1:11 PM GMT

किसान कोल्डस्टोर से नहीं निकाल रहे आलू, वापस कर दे रहे पर्चीआलू।

विनीत बाजपेई/अजय मिश्रा

लखनऊ/कन्नौज। बाज़ार में नया आलू आ गया है, लेकिन पुराना आलू अभी भी कोल्ड स्टोर में रखा हुआ है। किसान उसे निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। क्योंकि अगर किसान आलू को कोल्ड स्टोर से निकाल कर बाज़ार में बेचे तो उससे इतना पैसा भी नहीं मिलेगा कि किसान का कोल्ड स्टोर में आलू रखने और लाने ले जाने का किराया ही निकल आए, फसल में आई लागत दूर की बात है।

किसान आलू की कीमतों में आई कमी से इतना परेशान है कि अपने खून पसीने से पैदा की हुई आलू की फसल को कोल्ड स्टोर से निकालने से मना कर दे रहा है। आलू की पर्ची कोल्ड स्टोर को ही वापस कर दे रहा है।

ये भी पढ़ें- बिहार, झारखंड सहित कई राज्यों में उत्तर प्रदेश के लाल आलू की धूम

मेवालाल यादव (62 वर्ष) का 26 कुंतल आलू कोल्ड स्टोर में रखा हुआ है। कुछ दिनों पहले जब वो अपना आलू निकलवाने के लिए पहुंचे तो व्यापारियों द्वारा लगाई गई उनकी आलू की कीमत सुनकर वो वापस घर लौट आए। मेवालाल यादव लखनऊ से करीब 40 किलो मीटर दूर पश्चिम-उत्तर दिशा में स्थित बख्शी का तालाब ब्लॉक के शाहपुर गाँव के रहने वाले हैं। ''एक कुंतल आलू कोल्डस्टोर में रखने का किराया 240 रुपया है और व्यापारी एक कुंतल आलू की कीमत 300 रुपए लगा रहे थे। इस लिए मैं वापस आ गया,'' वो बताते हैं, ''अगर आलू महंगा हुआ तभी निकालूंगा नहीं तो नहीं निकालूंगा।'' मेवालाल ने इस बार आलू की बुआई नहीं की है।

''आलू की फसल में एक लाख रुपए का नुकसान हो गया है। दो कोल्डस्टोरेज में 400 (करीब 200 कुंतल) बोरा आलू रखा था। कीमत नहीं मिलने और कोल्डस्टोर का किराया देने के चक्कर में 150-200 बोरे की पर्ची वापस कर दी। लंबे नुकसान में चले गए हैं,'' कन्नौज से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित छिबरामऊ ब्लॉक के मेरापुर गढ़िया गाँव के किसान हरिश्चन्द्र (37 वर्ष) बताते हैं, ''खेती तो करनी है इसलिए इस बार भी आलू किया है, लेकिन इस बार कम कर दिया।''

ये भी पढ़ें- मंडी जाकर आलू बेचने से मुक्ति चाहिए तो उगाइए चिप्सोना आलू

बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक एसपी जोशी ने बताया कि पिछले वर्ष 6.14 लाख हेक्टेयर में आलू की बुआई की गई थी लेकिन इस बार आभी तक सिर्फ 6 लाख हेक्टेयर तक भी नहीं पहुंच पाई है।'' हालांकि उन्होंने कहा कि किमत का बुआई पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। अभी तक करीब 96 फीसदी बुआई हुई है। आगे कुछ समय में रकबा पिछले वर्ष के बराबर हो सकता है।

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के आंकड़ों के अनुसार भारत में वर्ष 2015-16 में 2116.91 हेक्टेयर में आलू की खेती की गई थी जिसमें 43417.05 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था। जबकि उत्तर प्रदेश में 607.32 हेक्टेयर में आलू की बुआई की गई थी और 13851.76 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था।

ये भी पढ़ें- आलू की यह नई प्रजाति करेगी किसानों को मालामाल

कन्नौज के जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार चतुर्वेदी बताते हैं, ''अभी एक लाख मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है। 30 नवम्बर तक कोल्ड स्टोरेज खाली करने का समय है।''

कन्नौज से करीब 75 किमी दूर सौरिख ब्लॉक के नगला विषुना गाँव के किसान संतोश कुमार (25 वर्ष) बताते हैं, ''करीब एक हेक्टेयर में आलू की बुवाई के लिए निकासी की थी। बचे हुए आलू के 75 बोरे की पर्ची गाँव के कुछ लोगों और कोल्ड स्टोरेज संचालकों को वापस कर दी। जो भी आलू बचा है जरूरी नहीं है कि निकालूंगा।''

जयगोविंद कोल्ड स्टोरेज कन्नौज के संचालक रवीन्द्र सिंह बताते हैं, ''आलू सस्ता बिक रहा है। किसान को सही दाम नहीं मिल रहे हैं इसलिए निकासी नहीं हो पा रही है।''

ये भी पढ़ें- आलू बुवाई के लिए करें उन्नत किस्मों का चयन

आलू की कीमतों से निराश किसान आलू की खेती से दूर भाग रहा है। यही कारण है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष आलू के रकबे में कमी आई है। मनोज कुमार चतुर्वेदी बताते हैं, ''पिछले साल 48,500 हेक्टेयर में आलू की बुआई हुई थी। इस बार सिर्फ 42 हजार हेक्टेयर में बुआई हुई है।''

''किसान आलू लेने नहीं आ रहे हैं। नुकसान हो रहा है। मेरा पैसा और किराया गया। करीब 20-22 हजार बोरी आलू रखा है। अगर कोई नहीं उठाएगा तो फेक दिया जाएगा।'' अंसारी कोल्ड स्टोरेज गंगवापुर कन्नौज के संचालक अशरफ बताते हैं।

ये भी पढ़ें- इजराइल के किसान रेगिस्तान में पालते हैं मछलियां और गर्मी में उगाते हैं आलू

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top