लता मिश्रा, गाँव कनेक्शन में मल्टीमीडिया पत्रकार और वीडियो प्रोड्यूसर हैं। ग्रामीण भारत की अनकही कहानियां, सामाजिक मुद्दे, महिला स्वास्थ्य, बाल कल्याण और कृषि पर रिपोर्ट करती हैं। एंकरिंग, वाइस ओवर और फील्ड रिपोर्टिंग में पिछले चार साल से योगदान दे रही हैं।
लता मिश्रा, गाँव कनेक्शन में मल्टीमीडिया पत्रकार और वीडियो प्रोड्यूसर हैं। ग्रामीण भारत की अनकही कहानियां, सामाजिक मुद्दे, महिला स्वास्थ्य, बाल कल्याण और कृषि पर रिपोर्ट करती हैं। एंकरिंग, वाइस ओवर और फील्ड रिपोर्टिंग में पिछले चार साल से योगदान दे रही हैं।
By Lata Mishra
11 जून 2026 से सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे ज़्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी खत्म कर दी है। इसका मकसद पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना है। इससे गन्ना और मक्का किसानों को फायदा होगा, पर पानी, खाद्य सुरक्षा और फसल संतुलन जैसी दिक्कतें भी आ सकती हैं।
11 जून 2026 से सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे ज़्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी खत्म कर दी है। इसका मकसद पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना है। इससे गन्ना और मक्का किसानों को फायदा होगा, पर पानी, खाद्य सुरक्षा और फसल संतुलन जैसी दिक्कतें भी आ सकती हैं।
By Lata Mishra
मिडिल ईस्ट के तनाव, लाल सागर और हॉर्मुज़ में बढ़ते ख़तरों, और चीन के खाद एक्सपोर्ट बैन ने ग्लोबल फर्टिलाइज़र मार्केट को हिला दिया है। भारत भी DAP, पोटाश और यूरिया के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है। इंटरनेशनल रेट्स बढ़ने के बावजूद, किसानों को फर्टिलाइज़र फ़िक्स रेट पर मिल रहे हैं, जिससे सरकार का सब्सिडी बिल रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
मिडिल ईस्ट के तनाव, लाल सागर और हॉर्मुज़ में बढ़ते ख़तरों, और चीन के खाद एक्सपोर्ट बैन ने ग्लोबल फर्टिलाइज़र मार्केट को हिला दिया है। भारत भी DAP, पोटाश और यूरिया के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है। इंटरनेशनल रेट्स बढ़ने के बावजूद, किसानों को फर्टिलाइज़र फ़िक्स रेट पर मिल रहे हैं, जिससे सरकार का सब्सिडी बिल रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
By Lata Mishra
भारत के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं, जिनके सामने खेती की बढ़ती लागत, बाज़ार में कमज़ोर सौदेबाज़ी और बिचौलियों का दबाव बड़ी चुनौतियाँ हैं। ऐसे समय में किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों को सामूहिक ताक़त देकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने का काम कर रहे हैं। FPO किसानों को सस्ती दरों पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराने, बेहतर बाज़ार दिलाने, आधुनिक तकनीक से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने में मदद कर रहे हैं। यह मॉडल किसानों को सिर्फ़ उत्पादक नहीं,बल्कि कृषि उद्यमी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं, जिनके सामने खेती की बढ़ती लागत, बाज़ार में कमज़ोर सौदेबाज़ी और बिचौलियों का दबाव बड़ी चुनौतियाँ हैं। ऐसे समय में किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों को सामूहिक ताक़त देकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने का काम कर रहे हैं। FPO किसानों को सस्ती दरों पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराने, बेहतर बाज़ार दिलाने, आधुनिक तकनीक से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने में मदद कर रहे हैं। यह मॉडल किसानों को सिर्फ़ उत्पादक नहीं,बल्कि कृषि उद्यमी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
By Lata Mishra
लखनऊ के किसान एसी शुक्ला ने अपने बाग़ में 352 किस्मों के आमों का संग्रह तैयार किया है। यहाँ 5 ग्राम से 5 किलो तक के आम, भारतीय और विदेशी दोनों प्रकार की वैरायटी मौजूद हैं। बाग़ में हाई-डेंसिटी प्लांटेशन, ग्राफ़्टिंग तकनीक, सालभर फल देने वाली किस्में और जैविक प्रबंधन जैसे प्रयोग किए जा रहे हैं। शुक्ला का मानना है कि बदलते मौसम और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में आम की खेती को नई किस्मों और नए प्रबंधन तरीक़ों की ज़रूरत है।
लखनऊ के किसान एसी शुक्ला ने अपने बाग़ में 352 किस्मों के आमों का संग्रह तैयार किया है। यहाँ 5 ग्राम से 5 किलो तक के आम, भारतीय और विदेशी दोनों प्रकार की वैरायटी मौजूद हैं। बाग़ में हाई-डेंसिटी प्लांटेशन, ग्राफ़्टिंग तकनीक, सालभर फल देने वाली किस्में और जैविक प्रबंधन जैसे प्रयोग किए जा रहे हैं। शुक्ला का मानना है कि बदलते मौसम और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में आम की खेती को नई किस्मों और नए प्रबंधन तरीक़ों की ज़रूरत है।
By Lata Mishra
आंध्र प्रदेश के Community Managed Natural Farming (APCNF) कार्यक्रम को 2026 का प्रतिष्ठित Food Planet Prize मिला है। 18 लाख किसान परिवारों और 3.4 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ काम करने वाला यह मॉडल प्राकृतिक खेती, मिट्टी के स्वास्थ्य, कम लागत वाली कृषि और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देता है। दुनिया भर से आए 1,000 से अधिक नामांकनों के बीच इस पहल को विजेता चुना गया। यह सम्मान प्राकृतिक खेती को वैश्विक स्तर पर मिली बड़ी मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
आंध्र प्रदेश के Community Managed Natural Farming (APCNF) कार्यक्रम को 2026 का प्रतिष्ठित Food Planet Prize मिला है। 18 लाख किसान परिवारों और 3.4 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ काम करने वाला यह मॉडल प्राकृतिक खेती, मिट्टी के स्वास्थ्य, कम लागत वाली कृषि और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देता है। दुनिया भर से आए 1,000 से अधिक नामांकनों के बीच इस पहल को विजेता चुना गया। यह सम्मान प्राकृतिक खेती को वैश्विक स्तर पर मिली बड़ी मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
By Lata Mishra
पारंपरिक अंदाज़े और अत्यधिक उर्वरक (Fertilizer) के इस्तेमाल से खेतों को होने वाले नुक़सान को रोकने के लिए e-FARMS ऐप एक गेम-चेंजर तकनीक के रूप में उभरा है। यह आधुनिक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म किसानों को उनके खेत की मिट्टी के वास्तविक आंकड़ों (नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटाश आदि) की लाइव रिपोर्ट के आधार पर खेत-विशिष्ट और फ़सल-विशिष्ट सटीक सलाह देता है। मोबाइल पर ही कुछ ही सेकंड में मिलने वाली यह वैज्ञानिक सिफ़ारिश न केवल किसानों की लागत को कम करेगी, बल्कि मिट्टी के प्राकृतिक स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए देश में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पारंपरिक अंदाज़े और अत्यधिक उर्वरक (Fertilizer) के इस्तेमाल से खेतों को होने वाले नुक़सान को रोकने के लिए e-FARMS ऐप एक गेम-चेंजर तकनीक के रूप में उभरा है। यह आधुनिक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म किसानों को उनके खेत की मिट्टी के वास्तविक आंकड़ों (नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटाश आदि) की लाइव रिपोर्ट के आधार पर खेत-विशिष्ट और फ़सल-विशिष्ट सटीक सलाह देता है। मोबाइल पर ही कुछ ही सेकंड में मिलने वाली यह वैज्ञानिक सिफ़ारिश न केवल किसानों की लागत को कम करेगी, बल्कि मिट्टी के प्राकृतिक स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए देश में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
By Lata Mishra
पश्चिम बंगाल की यात्रा ने सत्ता के शोर से दूर, जमीनी हकीकत को सामने लाया। लोगों के चेहरों पर बदलाव की चाहत और थकावट दिखी। सिलीगुड़ी से सुंदरबन तक, चाय बागानों की मजदूरिनों से लेकर गंगा के टापुओं पर रहने वाले लोगों तक, हर जगह बुनियादी सुविधाओं का अभाव और गरिमा की लड़ाई दिखी।
पश्चिम बंगाल की यात्रा ने सत्ता के शोर से दूर, जमीनी हकीकत को सामने लाया। लोगों के चेहरों पर बदलाव की चाहत और थकावट दिखी। सिलीगुड़ी से सुंदरबन तक, चाय बागानों की मजदूरिनों से लेकर गंगा के टापुओं पर रहने वाले लोगों तक, हर जगह बुनियादी सुविधाओं का अभाव और गरिमा की लड़ाई दिखी।
By Lata Mishra
एक समय था जब बंगाल भारत की आर्थिक राजधानी था। राजनीतिक बदलावों और 1947 के बंटवारे ने इसकी अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया। जूट उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। लाखों शरणार्थी आए, जिससे संसाधनों पर भारी बोझ पड़ा। 1971 के युद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ा। यह सब बंगाल के पीछे छूटने का कारण बना।
एक समय था जब बंगाल भारत की आर्थिक राजधानी था। राजनीतिक बदलावों और 1947 के बंटवारे ने इसकी अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया। जूट उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। लाखों शरणार्थी आए, जिससे संसाधनों पर भारी बोझ पड़ा। 1971 के युद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ा। यह सब बंगाल के पीछे छूटने का कारण बना।
By Lata Mishra
अगर किसानों को आम की फलत अच्छी और मंडी में अच्छा दाम मिलने के साथ ही निर्यात में आसानी चाहिए तो फलों की बैगिंग जरूर करनी जाहिए। इससे फल कीटों और कीटनाशकों से सुरक्षित रहता है। बैगिंग पर थोड़ा खर्च करके बाजार में रेट अच्छा मिल जाता है।
अगर किसानों को आम की फलत अच्छी और मंडी में अच्छा दाम मिलने के साथ ही निर्यात में आसानी चाहिए तो फलों की बैगिंग जरूर करनी जाहिए। इससे फल कीटों और कीटनाशकों से सुरक्षित रहता है। बैगिंग पर थोड़ा खर्च करके बाजार में रेट अच्छा मिल जाता है।
By Lata Mishra
सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा है। भारत जैसे देशों में इसके मामले अधिक हैं। यह कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) से फैलता है। समय पर टीका लगवाने और नियमित जांच कराने से इस बीमारी को रोका जा सकता है। सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर रही है।
सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा है। भारत जैसे देशों में इसके मामले अधिक हैं। यह कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) से फैलता है। समय पर टीका लगवाने और नियमित जांच कराने से इस बीमारी को रोका जा सकता है। सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर रही है।