हम टिक-टिक करते टाइम बम पर बैठे हैं… कहां जायें?

ऐसे कई मरीज़ हैं जिनकी जिंदगियां जॉनसन के खराब इम्प्लांट ने तबाह की है, इन इम्प्लांट्स की वजह से क्रोमियम और कोबाल्ट के अवशेष खून में पाये जा रहे हैं जो कैंसर की बीमारी का कारण बन सकते हैं

Hridayesh JoshiHridayesh Joshi   10 Jan 2019 5:47 AM GMT

हम टिक-टिक करते टाइम बम पर बैठे हैं… कहां जायें?

"मैं किसी काम का नहीं रह गया हूं। ज़मीन पर पड़ी पेंसिल तक नहीं उठा सकता। चलने फिरने में दिक्कत होती है। कभी सोचता हूं कि मैं क्यों जिन्दा हूं। इस उम्र में छड़ी लेकर चलता पड़ता है मुझे शर्म आती है।" पुणे से आये 49 साल के दिनेश पिल्लई पहली नज़र में देखने में ठीक-ठाक लगते हैं लेकिन 2004 में हुई हिपइम्प्लांट सर्जरी ने उनकी ज़िंदगी तबाह कर दी। पिछले 2004 से 2012 के बीच 4 बार उनको ऑपरेशन कराना पड़ा है। सारा दोष मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के खराब (faulty) हिपइम्प्लांट्स का था। इसके कारण आज भारत में हज़ारों मरीज़ बरबाद हो चुके हैं। देश भर से दिल्ली पहुंचे इन मरीज़ों ने अपनी आपबीती मीडिया के आगे सुनाई।

पुणे के दिनेश पिल्लई की चार बार सर्जरी हो चुकी हैपुणे के दिनेश पिल्लई की चार बार सर्जरी हो चुकी है।

ये भी पढ़ें: जलवायु परिवर्तन सम्मेलन: मेजबान पोलैंड को क्यों है कोयले से इतना प्यार?

पुणे, विशाखापट्टनम, जबलपुर, बैंगलोर, मुंबई, कोलकाता और गाज़ियाबाद समेत देश के तमाम शहरों से 40 से अधिक मरीज़ या उनके परिवार के लोगों ने केंद्र सरकार के द्वारा नियुक्त की विशेषज्ञ समिति से मुलाकात की और जॉनसन एंड जॉनसन से पर्याप्त और न्यायोचित मुआवजा दिलवाने की मांग की है। 2004 से 2010 के बीच देश के भीतर 4700 हिपइम्प्लांट सर्जरी हुई। 2010 में जॉनसन एंड जॉनसन ने घोषित किया कि उसके इम्प्लांट खराब थे और बाज़ार से उन्हें वापस लिया गया।

उच्चतम न्यायालय ने अमेरिका स्थित फार्मा कंपनी जान्सन एंड जान्सन के खिलाफ मरीजों के त्रुटिपूर्ण कूल्हे के प्रत्यारोपण का मामला शुक्रवार ( ११ जनवरी) को यह कहते हुये बंद कर दिया कि केन्द्र ने उन्हें 1.22 करोड़ रूपए तक मुआवजा दिलाने के लिये कदम उठाये हैं।

इस बीच जिन मरीज़ों को ये इम्प्लांट लगे उन्हें काफी परेशानियां होनी लगीं थी। कंपनी ने उनकी फ्री दोबारा सर्जरी करवाने का वादा किया। कई मरीज़ों को तो जॉनसन एंड जॉनसन की घोषणा का पता ही नहीं चला लेकिन जिन्हें पता चला और जिन्होंने रिविज़र सर्जरी करवाई वे भी परेशान हैं। इन इम्प्लांट्स की वजह से क्रोमियम और कोबाल्ट के अवशेष खून में पाये जा रहे हैं जो कैंसर की बीमारी का कारण बन सकते हैं।


ये भी पढ़ें:जलवायु परिवर्तन की लड़ाई में अमीर देशों की गरीबों के खिलाफ चाल: बांटो और राज करो

बुधवार को सरकार ने जॉनसन के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की है ताकि मुआवज़े पर समझौता हो सके। कंपनी ने अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। विशेषज्ञ समिति के द्वारा तय फॉर्मूले के हिसाब से कंपनी को 30 लाख से 1.2 करोड़ के बीच मुआवज़ा देना है। अगर मरीज़ की उम्र कम और नुकसान अधिक तो मुआवजा 1.2 करोड़ तक हो सकता है और अगर मरीज़ की उम्र काफी अधिक और नुकसान कम तो ये 30 लाख होगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से ये मुआवज़ा कुछ भी नहीं है। अमेरिका में इसी कंपनी ने 2.5 अरब डॉलर तक के मुआवजे इसी इम्प्लांट के शिकार लोगों को दिये हैं।

विशाखापटट्म की ज्योति रानी (बायें से दूसरी)को डॉक्टरों ने बताया कि वह मां नहीं बन सकती क्योंकि बच्चे को कैंसर का ख़तरा होगा

विशाखापटट्नम से आई 35 साल की ज्योति बताती हैं कि 2008 में उनके बायें कूल्हे में ये इम्प्लांट लगाया गया। फिर उनके कूल्हे में लगातार दर्द रहने लगा। 2013 में उन्होंने डॉक्टरों से पूछा कि क्या वह शादी कर सकती हैं। डॉक्टरों ने उन्हें कहा कि वह ठीक हैं और शादी कर सकती हैं और मां भी बन सकती हैं। ज्योति ने शादी कर ली लेकिन उनका दर्द बढ़ता गया और उन्हें मिसकैरिज का सामना करना पड़ा। फिर उन्हें पता चला कि उनके ख़ून में कोबाल्ट और क्रोमियम के अवशेष दिख रहे हैं जो कैंसर कारक होते हैं। "मेरे पति और मेरे लिये तो यह बड़े सदमे वाली बात थी जब डॉक्टरों ने बताया कि वह मां नहीं बनेंगी क्योंकि ये खतरा बच्चे को भी हो सकता है।"


ऐसे कई मरीज़ हैं जिनकी जिंदगियां जॉनसन के खराब इम्प्लांट ने तबाह की है। अभी तक हेल्पलाइन के ज़रिये करीब 1000 लोगों की पहचान हो पाई है। वैसे मरीज़ों और उनके परिवार वालों ने Hip Implant Patient Support Group यानी (HIPS) के नाम से एक ग्रुप बना लिया है। कई मंत्रियों और सांसदों और विधायकों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मन्त्रीजे पी नड्डा को इस बारे में पत्र भी लिखा है।

"इस सर्जरी के कारण मरीज़ के शरीर के भीतर जो इम्प्लांट गया वह एक दुश्मन की भीतर बैठा है। ज़िंदगी तो तबाह कर ही दी है शरीर में कैंसर जैसी बीमारियों के तत्व पैदा हो गये हैं। रिवीज़न सर्जरी बहुत पीड़ादायक होती है। उससे कितना फायदा होगा पता नहीं लेकिन शरीर के भीतर एक विस्फोट का खतरा मौजूद है। हम टिक-टिक करते टाइम बम पर बैठे हैं। कहां जायें?" दिल्ली के राजीव ठुकराल ने बताया जो कि अपनी पत्नी ममता का इलाज करा रहे हैं।

न्यायालय ने गलत हिप इम्प्लांट मामले में जान्सन एंड जान्सन के खिलाफ मामला बंद किया

उच्चतम न्यायालय ने अमेरिका स्थित फार्मा कंपनी जान्सन एंड जान्सन के खिलाफ मरीजों के त्रुटिपूर्ण कूल्हे के प्रत्यारोपण का मामला शुक्रवार को यह कहते हुये बंद कर दिया कि केन्द्र ने उन्हें 1.22 करोड़ रुपए तक मुआवजा दिलाने के लिये कदम उठाये हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने इस मामले में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के जवाब पर विचार किया। मंत्रालय ने कहा कि उसने मुआवजे की एक योजना तैयार की है ताकि त्रुटिपूर्ण कूल्हा प्रत्यारोपण के पीड़ितों के लिये उचित मुआवजा सुनश्चिति किया जा सके।

शीर्ष अदालत ने अरूण गोयनका की जनहित याचिका का निस्तारण करते हुये केन्द्र से कहा कि मुआवजा योजना का व्यापक प्रचार किया जाये ताकि ऐसे प्रत्यारोपण के शिकार सभी पीड़ित अपनी समस्याओं के लिये मदद ले सकें। इससे पहले, केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया था कि कथित त्रुटिपूर्ण कूल्हा प्रत्यारोपण के बारे में उसकी समिति की रिपोर्ट तैयार है और एक सप्ताह के भीतर उसे पेश कर दिया जायेगा। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि 2005 से कूल्हे की सर्जरी कराने वाले 4525 भारतीय मरीजों के शरीर में त्रुटिपूर्ण और घातक कृत्रिम कूल्हों का प्रत्यारोपण किया गया है।


ये भी पढ़ें: पानी की कमी: चुनाव बुझाएंगे राजस्थान की प्यास?

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top