योग कनेक्शन: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को दूर करेंगे ये आसन

आप शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको अपने दैनिक जीवन के क्रियाकलापों में संतुलन बनाए रखना होगा

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   22 Jan 2019 8:54 AM GMT

योग कनेक्शन: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को दूर करेंगे ये आसन

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम आजकल कम उम्र की लड़कियों में देखने को मिल रहा है। इससे महिलाओं को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके लक्षण हैं, वजन बढ़ना, थकान, अवांछित बाल उगना, बाल पतले होना, बांझपन, मुंहासे, पैल्विक पेन, सिर दर्द और नींद की समस्याएं। योगानंता, स्टूडियो ऑफ योगा की संस्थापक और योग विशेषज्ञ रेखा चर्चा कर रही हैं कुछ ऐसे योगासनों की जिनसे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को दूर किया जा सकता है।

बालासन

सबसे पहले वज्रासन की स्थिति में बैठ जायें। दोनों हाथ अपने घुटनों के ऊपर रखें। अब धीरे-धीरे आगे की तरफ झुकते चाले जाएं। अपने पेट को जंघे से अच्छे से सटा कर रखें और दोनों हाथों को परस्पर आगे की तरफ बढ़ाते जायें। ध्यान रहे आपके कूल्हे आपकी एड़ियों के ऊपर बनी रहें। इस अवस्था में आप 1 से 2 मिनट तक बने रह सकते हैं।

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भद्रासन

सबसे पहले सुखासन की स्थिति में बैठ जायें। कमर और गर्दन सीधी रखें। अब दोनों पैरों के तलवे को आपस मे मिला कर हाथों से उन्हें बंद करें। इसी अवस्था में 1 से 2 मिनट तक बने रहें। ध्यान दें कि कमर गर्दन एक सीध में हों। मेरुदंड एकदम सीधा रखें। इस आसन को 4 से 5 चक्र तक कर सकते हैं।


नौकासन

सबसे पहले अपने आसन पर दण्डासन की स्थिति में बैठ जाएं। मेरुदंड एकदम सीधा रखें। अब धीरे से आसन पर हथेलियों का दबाव बनाते हुए अपने पैरों को क्षमतानुसार ऊपर उठायें। अब धीरे से अपने हाथों को भी अपने पैरों की तरफ आगे बढ़ाएं। सारा ध्यान अपने पैरों के अंगूठे की तरफ केंद्रित करें। इस स्थिति में आपके पूरे शरीर का भार आपके नितंब पर आ जाएगा। इसी आसन में 30 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बनें रह सकते हैं। वापस आने के लिए धीरे-धीरे अपने पैरों को आसन पर लेकर आयें। अपने हाथ भी नीचे ले आएं एवं पुनः दन्डासन की स्थिति में आयें। इसे आप 4 से 5 चक्र कर सकते हैं।

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पश्चिमोत्तानासन

सबसे पहले अपने आसन पर पैरों को सामने की और फैलाकर बैठ जाए। मेरुदंड एकदम सीधा रखें। सांस लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठायें। याद रखें दोनों हाथ कनपटी से लगी हुई होनी चाहिए। सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से झुकें। ठुड्डी पंजों की तरफ, मेरुदंड सीधा रखने का प्रयास करें। अपने हाथों को पैरों पर रखें और क्षमतानुसार इसी आसन में बने रहें। सांस लेते हुए धीरे से सिर को ऊपर उठायें तथा धीरे धीरे दोनों हाथ नीचे ले आएं। इस तरह से यह एक चक्र पूरा होता है। आप इसे 3 से 4 बार दोहरा सकते हैं।

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