वर्ल्ड निमोनिया डे : बच्चों को अब और निमोनिया नहीं, पीसीवी से मिलेगी निजात 

वर्ल्ड निमोनिया डे : बच्चों को अब और निमोनिया नहीं, पीसीवी से मिलेगी निजात हर साल लाखों बच्चों की हो जाती है असमय माैत। 

लखनऊ। देश में बच्चों में होने वाली बीमारी निमोनिया को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब और निमोनिया नहीं थीम पर अभियान की शुरुआत करने जा रही है। इसके तहत बच्चों को पीसीवी के टीके लगाए जाएंगे।

विश्व में निमोनिया से हर साल 10 लाख बच्चों की मृत्यु हो जाती है। भारत में यह आंकड़ा विश्व की तुलना में और भी खराब है। वर्ष 2010 की विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल भारत में 3.5 लाख बच्चे निमोकोकल निमोनिया से मरते हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश में निमोनिया से 71 फीसदी मौतें होती हैं।

निमोनिया के बारे में जानकारी देते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आशुतोष वर्मा बताते हैं, ‘’इस बार नो मोर निमोनिया थीम रखी गई है। बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने न्यूमोकोकल कॉन्ज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) अभियान की शुरुआत की है।’’

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वह आगे बताते हैं, ‘’पीसीवी की पहली डोज़ छठवें हफ़्ते में, दूसरी 14वें हफ़्ते में जबकि तीसरी डोज़ 9वें महीने में बच्चों को लगवाएं। वैक्सीन लगाने के बाद बच्चे को हल्का दर्द, सूजन या बुखार की संभावना हो सकती है, लेकिन घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।” आगे बताते हैं, “देश में 20 फीसदी बच्चों की मृत्यु निमोनिया से होती है। इसमें भी करीब 30 फीसदी मौतों का कारण न्यूमोकोकल निमोनिया होता है। इस टीका के लगवाने से निमोनिया से छुटकारा मिल जाएगा।’’

निमोनिया किसी एक चीज से नहीं होता है, निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तीनों से होता है। हिंदुस्तान में बच्चों में होने वाली कोई भी बीमारी होती है उसका मानक पांच वर्ष के अंदर की मौत के बाद ही होता है। हिन्दुस्तान में इसका रेट काफी कम है इससे सबसे ज्यादा होने वाली मौतें निमोनिया और डायरिया से होती हैं।

निमोनिया की समस्या को खत्म करने के लिए यूआईपी के तहत गावी के साथ मिलकर भारत सरकार अभियान चलाने जा रही है। जिसमें 21 लाख बच्चों को कवर किया जाएगा।
डॉ़ आशुतोष वर्मा

निमोनिया में होने वाली वजहों में सबसे खतरनाक बैक्टीरिया होती है, इन बैक्टीरिया में सबसे ज्यादा एक तिहाई जो बैक्टीरिया होती हैं वो स्टेप्टोकोकसनिमोनी होती है। ये सबसे ज्यादा खतरनाक होता है जैसे ही ये गले के द्वारा फेफड़े में पहुँचता है वैसे निमोनिया शुरू कर देता है।’’ यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक का सबसे प्रमुख संक्रामक कारण बनी हुई है, प्रति दिन 2,500 बच्चों की मौत। निमोनिया में पांच से कम पांच मौतों की 15 फीसदी हिस्सेदारी होती है और 2015 में दुनियाभर में 9 20,000 बच्चे मारे गए थे।

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किन कारणों से होता है निमोनिया

निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस, और फफूंद के द्वारा होता है। जब सुक्ष्मजीवी सांस के माध्यम से हमारे फेफड़ो में प्रवेश कर लेते हैं, तो यह वहां जाकर जमा होने लगते हैं और यह धीरे-धीरे कई गुना हो जाते हैं और उसे तरल द्रव और पिप से भर देते हैं। निमोनिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के निकट संपर्क के कारण फैलते हैं। यह संक्रमण तब फैलता है जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर खांसता या छींकता है।

क्या हैं निमोनिया के लक्षण

  • निमोनिया के आम लक्षणों में खांसी, सीने का दर्द, बुखार और सांस लेने में मुश्किल आदि होते हैं।
  • सांस तेज लेना, कफ की आवाज आना आदि भी निमोनिया का संकेत हो सकते हैं ।
  • उल्टी होना, सीने या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।
  • होंठों और नाखून का रंग नीला पड़ना।
  • तेज बुखार, कंपकंपी, कफ, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द भी निमोनिया के लक्षण हैं। 6-हालांकि बुखार बहुत विशिष्ट लक्षण नहीं है क्योंकि यह सामान्य बीमारियों में भी होता है।
  • पांच साल से कम उम्र के ज्यादातर बच्चों में निमोनिया होने पर उन्हें सांस लेने तथा दूध पीने में भी दिक्कत होती है और वे सुस्त भी हो जाता है।
  • छोटे बच्चों में निमोनिया की शुरुआत हल्के सर्दी-जुकाम से होती है, जो धीरे-धीरे निमोनिया में बदल जाती है। ऐसे में बच्चों को बाद में सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।

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मिशन इन्द्रधनुष है कारगर

प्रधानमंत्री द्वारा लांच किया गया मिशन इन्द्रधनुष का लक्ष्य यही है कि बच्चों को किसी भी प्रकार के टीकाकरण से वंचित न रखा। उत्तर प्रदेश में अभी 76 प्रतिशत ही टीकाकरण होता है, जिसे बढ़ाने के लिए कार्य किये जा रहे हैं। यहां भी हर साल पांच साल से कम आयु के औसतन 3.8 लाख बच्चों की मौत हो जाती है। 2020 तक 80 फीसद और 2030 तक शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब सघन मिशन इन्द्रधनुष की शुरुआत के बाद इसे बदलकर 2018 तक कि 90 प्रतिशत टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है।

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