संक्रामक रोगों ने ली 18 मासूमों की जान

संक्रामक रोगों ने ली 18 मासूमों की जानअस्पताल में सही इलाज न मिलने से परेशान लोग

बहराइच।

मौसम मे बदलाव के कारण अस्पतालों मरीज़ों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। जिला चिकित्सालय में संक्रामक रोगों के रोगियों संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। संक्रामक रोगों के फैलने के कारण चिकित्सालय परिसर में संक्रामक रोगियों की मानो बाढ़ सी आ गई है।

भीषण गर्मी के बाद हल्की बारिश से उमस हो रही है, जिससे संक्रामक रोगों की अधिकता के चलते बर्थ एक्सपीसिया व बुखार से दो सप्ताह में लगभग 20 मासूमों की जान जिला चिकित्सालय में इलाज के दौरान गंवानी पड़ी है। वहीं दूसरीओर सैकड़ो मासूमों का इलाज चिकित्सालय परिसर में ही किया जा रहा है। सोचने की बात है अस्पताल के जिम्मेदार सबकुछ बेहतर होने का दावा कर रहे है।

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अनुराग पुत्र नन्के निवासी लौकी कला उम्र आठ माह निमोनिया से ग्रसित है। इसकी हालत भी गम्भीर बनी हुई वही अन्य रोगी सूरज पुत्र कन्हैय्या लाल वर्मा निवासी उम्र लगभग 11 माह लक्ष्मणनगर को उल्टी दस्त बुखार है। परिजनों के अनुसार दोनो ही मरीज़ों को सोमवार को भर्ती कराया गया था लेकिन अभी तक मात्र दो इन्जेक्शन के सिवा रोगी को इलाज के रूप में और कुछ भी नहीं दिया गया है।

इस सन्दर्भ में मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. डीके सिंह ने बताया,'' इस वक्त मौसम के तापमान बदलाव से लगातार हो रही संक्रामक रोगों के मरीज़ों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।इनमें सबसे ज्यादा छोटे मासूम बच्चे प्रभावित हुए है । इस माह में एक जून से 19 जून तक लगभग 6,00 से अधिक बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए हैं जिनमें से बुखार व बर्थ एक्सपीसिया व अन्य संक्रामक रोगों के मरीज़ भर्ती हुए।

जिला अस्पताल में मौजूद बेबी सिंह पुत्र अतुल कुमार सिंह निवासी कटघरी उम्र लगभग आठ माह को उल्टी दस्त व पेट दर्द की शिकयत की वजह से भर्ती किया गया है, लेकिन डाक्टरों का लचर रवैय्ये से इनके परिजनों को अपने मासूम की जिन्दगी की चिंता बनी हुई है।

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मासमों की मौतों ने एक बार फिर से जिला चिकित्सालय प्रशासन के रोगों से निपटने की पूर्व से तैयारी की पोल खोल दी है। सूबे में बनी सरकार जहां एक ओर उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था का ढोल पीट रही है वहीं परिसर में आए दिन मासूम रोगियों की मौतों का दृश्य पूरी चिकित्सीय व्यवस्था की हकीकत को बयां कर रही है।

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