कृषि वैज्ञानिक बदल रहे हैं गाँवों की तस्वीर

Divendra SinghDivendra Singh   18 Jun 2017 1:36 PM GMT

कृषि वैज्ञानिक बदल रहे हैं गाँवों की तस्वीरफसल में कोई रोग लगा हो तो कीट वैज्ञानिक अब गाँव जाकर किसानों को जानकारी देते हैं

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। फसल में कोई रोग लगा हो कीट वैज्ञानिक अब गांव जाकर किसानों को जानकारी देते हैं, यही नहीं भूमिहीन ग्रामीणों को भी रोजगार शुरु करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

लखनऊ जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी. दूर माल ब्लॉक के नबी पनाह गाँव के किसान सुरेन्द्र कुमार (45 वर्ष) फलदार पौधों की नर्सरी का काम करते हैं। सुरेन्द्र कुमार बताते हैं, "अब समय-समय पर वैज्ञानिक हमें नयी-नयी जानकारियां देते रहते हैं, पहले कलम बांधने में हमेशा पौधा सही नहीं निकलता लेकिन अब वो जानकारी देते रहते हैं, कि कैसे और किस समय में कलम बांधनी चाहिए।"

केन्द्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक अब गाँव और किसानों की तस्वीर बदल रहे हैं। केन्द्र सरकार की मेरा गाँव मेरा गौरव योजना के तहत केन्द्रीय उपोष्ण एवं बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों ने मलिहाबाद व काकोरी के 45 गाँवों को गोद लिया है। इसके लिए वैज्ञानिक गाँव को गोद लेकर किसानों को खेती और पशुपालन के आधुनिक तरीके सिखा रहे हैं।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के आदेश से देश के सभी संस्थान गाँवों को गोद लेकर वहां पर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिक किसानों को खेती के नए-नए तरीके बता रहे हैं। यह सारी कवायद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की फार्मर फर्स्ट (फार्मर फील्ड इनोवेसंश रिसर्च साइंस एंड टेक्नोलॉजी) स्कीम के तहत हो रहा है। इसमें आईसीएआर के सभी संस्थान बेहतरीन तालमेल के साथ काम कर रहे हैं।

इसमें केन्द्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान सहित 103 संस्थान और कृषि विवि शामिल हैं। लखनऊ के केन्द्रीय उपोष्ण एवं बागवानी संस्थान के 42 वैज्ञानिकों की टीम 45 गाँव में देख रही हैं।

योजना के नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष चन्द्र बताते हैं, "42 वैज्ञानिकों की नौ टीम बनायी गई हैं, हर टीम में पांच-पांच वैज्ञानिक हैं, जो किसानों को कृषि के नए नए तरीके बताते रहते हैं। अभी किसानों को लौकी, तोरई, कद्दू, लोबिया, राजमा के पौधे दिए गए थे, जिससे किसानों में सब्जियों और दालों को खाने की आदत बढ़े।"

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वो आगे कहते हैं, "हम समय-समय पर किसानों से फीडबैक भी लेते रहते हैं, जिससे उनकी जरूरतें पता चलती रहें। इसमें बागवानी, गन्ना, गेंहू, धान, दलहन, तिलहन की फसलों के साथ केंचुआ, मधुमक्खी, बकरी, बत्तख और मछलीपालन की नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।"

केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ ही भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने 65 गाँवों को गोद लिया है। ये संस्थान किसानों के साथ ही भूमिहीन किसानों व महिलाओं को भी रोजगारपरक प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिससे ये लोग अपना खुद का रोजगार शुरु कर पाएं।

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