वनग्रामों से कोसों दूर हैं सरकारी विकास के एजेंडे

वनग्रामों से कोसों दूर हैं सरकारी विकास के एजेंडेवनग्रामों की मूलभूत सुविधाओं को सुधारने की ज़रूरत है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर दौरे पर प्रदेश के सभी वनग्रामों का संपूर्ण विकास करने और थारू जनजाति के लिए विशेष योजना बनाकर वनग्रामों को राजस्व ग्रामों का दर्जा देने की बात कही है, लेकिन इन वनग्रामों को समग्र गाँवों की श्रेणी में लाने से कहीं ज़्यादा इन गाँवों की मूलभूत सुविधाओं को सुधारने की ज़रूरत है।

बहराइच की नई बस्ती वनग्राम में रहने वाली भानमति (62 वर्ष) पिछले 10 वर्षों से बिछिया और मिहिपुरवा जैसे वनवासी क्षेत्रों में महिलाओं को खेती व सामाजिक मामलों के प्रति जागरूक कर रही हैं। भानमति बताती हैं, ‘’वनग्रामों में आजतक कोई भी आवासीय योजना नहीं चलाई गई है। चाहे वो इंदिरा आवास योजना हो या लोहिया आवास, आज तक यहां पर एक भी पक्का मकान सरकारी खर्चे पर नहीं बना है।’’

उत्तर प्रदेश के बहराइच, गोरखपुर, लखीमपुर, महाराजगंज, पीलीभीत, बुंदेलखंड, सोनभद्र जिलों के कई हिस्सों में वनग्राम मौजूद हैं। इन वनग्रामों में लगभग 50,000 से अधिक आबादी निवास करती है। प्रदेश में थारू, बुक्सा, माहगीर, शोर्का, खरवार, राजी और जॉनसारी जैसी जनजातियां निवास करती हैं।

ये भी पढ़ें- किसान आगबबूला : महाराष्ट्र से लेकर मध्यप्रदेश तक सड़कों पर उतर ऐसे जताया विरोध

बहराइच जिले में पिछले 15 वर्षों से वनग्रामों में जनजागरुकता और वनवासियों को उनका अधिकार दिलाने का काम कर रही गैर सरकारी संस्था डेवलपमेंटल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन एडवांस्मेंट (देहात) के प्रमुख जितेंद्र चतुर्वेदी बताते हैं, “भारत सरकार की अनुसूचित जनजाति एवं वनवासी (वनाधिकार मान्यता) अधिनियम-2006 के तहत भारत सरकार ने वनग्रामों को ग्राम पंचायतों की श्रेणी देने का फैसला लिया था।’’

वनवासियों की उदासीनता की बात पर उन्होंने आगे बताया कि इस अधिनियम में संशोधन कर श्रेणी पांच के तहत ज़मीनों पर मलिकाना हक के लिए खसरा-खतौनी बनवा कर वनवासियों को ज़मीनें आंवटित किया जाना और सभी को वोटर आइडी देने जैसे भी फैसले किए गए, लेकिन इसमें से अभी तक मात्र 20 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है।’’

सीएम ने अपने दौरे पर जनजाति ग्राम इमलिया कोड़र आने के खास मकसद को समझाते हुए कहा था, “वनग्रामों को खास तवज्जो देते हुए उनमें स्वास्थ्य, शिक्षा व इन गाँवों की मूलभूत सुविधाओं का विकास करना हमारा लक्ष्य है। मेरा जनजाति ग्राम इमलिया कोड़र आने का उद्देश्य है कि मैं यहां के स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकर विकास में बेहद पिछड़े इस क्षेत्र के लिए योजना बना सकूं। प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद एंटी-रोमियों दल, किसानों की कर्ज माफी और अवैध बूचड़खानों को बंद करने जैसे अहम फैसले लिए हैं। ऐसे में वनग्रामों को सुधारने का फैसला कितना सार्थक होगा, ये वक्त बताएगा।”

ये भी पढ़ें- ये है भारत की दुग्ध क्रांति के पीछे की कड़वी हकीकत

कैलाशनगर वनग्राम में आजतक किसी भी प्रकार की सरकारी योजना नहीं चलाई गई है। वनग्राम में न तो कोई सरकारी अस्पताल है और न ही बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल। कैलाशनगर वनग्राम के निवासी गीता प्रसाद (49 वर्ष) गाँव में ही 29 बीघे में धान, लौकी, करेले की खेती करते हैं। गीता ने बताया, ‘’वनग्राम में जितना गैर सरकार संगठनों (एनजीओ) ने काम किया है, उतना तो सरकार भी नहीं सोचती है।

यहां पर एनजीओ के माध्यम से सोलर लाइट और पानी के लिए पंप लगाए गए हैं पर किसी भी सरकार ने कुछ भी किया, यहां ना तो स्कूल हैं और ना ही कोई आंगनबाड़ी है, जहां बच्चे पढ़ सकें।’’सीएम योगी ने अपने बलरामपुर दौरे पर कहा है कि हमारी सरकार दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा जनजातियों और वनग्रामों के बच्चों के लिए विद्यालयों और शैक्षिक संस्थाओं की शुरुआत करेगी।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Top