अगर आप तम्बाकू का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाइए, हर सवा 6 सेकेंड में हो रही एक मौत 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कानपुर-लखनऊ। सुरेन्द्र सैनी आज भी अपने एकलौते बेटे अजय सैनी की मौत को नहीं भूल पाए हैं, तम्बाकू खाने की बुरी लत से 24 वर्ष की उम्र में ही अजय इस दुनिया को छोड़कर चले गए। देश में अजय नशे की गिरफ्त में मरने वाले पहले वो शख्स नहीं हैं बल्कि ये मौते होना अब सामान्य बात हो गयी है, अगर सरकार ने नशे पर सख्ती से रोक नही लगाई तो नशे से होने वाली ये मौते एक दिन विकराल रूप धारण कर लेंगी ।

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कानपुर जिला मुख्यालय 30 किलोमीटर दूर शिवराजपुर ब्लॉक के सैलाहा गाँव में रहने वाले सुरेन्द्र सैनी (45 वर्ष) नम आँखों से बताते हैं, "जब भी नशा करते देखता हूँ तो यही कहता हूँ हम करो इसे, तुम तो चले जाओगे पर माँ-बाप को जिन्दा मरा हुआ छोड़ जाओगे, मेरा बेटा कबसे नशा कर रहा है इस बात की मुझे भनक तक न थी, पता तब चला जब उसे कैंसर हो गया तबतक बहुत देर हो चुकी थी।" अपने आंसू पोंछते हुए कहते हैं, "बड़े दुलार से पाला था, अकेला होने की वजह से 20 साल की उम्र में शादी कर दी, उसका चार साल का बेटा है, इलाज में पांच लाख से ज्यादा रूपया खर्च कर दिया पर फिर भी बचा नहीं सके, जिसे बुढ़ापे का सहारा मान रहे थे आज वो जीते जी अपने मरने के लिए छोड़ कर चला गया ।"

तम्बाकू से होने वाले नुकसान को देखते हुए साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने एक प्रस्ताव द्वारा 7 अप्रैल 1988 से अन्तर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का फैसला लिया था, इसके बाद हर साल की 31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का फैसला लिया गया, तभी से 31 मई को ये दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाने लगा।

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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार (2015-2016) की रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन 5500 से ज्यादा युवा तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं, देश में प्रतिदिन 3500 से ज्यादा लोगों की मौत होती है। भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में से 40 तम्बाकू के प्रयोग के कारण मरते हैं, लगभग 95 प्रतिशत मुँह के कैंसर तम्बाकू के सेवन करने वाले व्यक्तियों में होते हैं। वर्ष 2015 में धूम्रपान से 65 लाख लोगों की मौत हुयी है, तम्बाकू के सेवनकर्ता प्रतिवर्ष 22 प्रतिशत बढ़ रहे हैं। सेकेण्ड हैण्ड स्मोक के कारण प्रतिवर्ष छह लाख प्रत्यक्ष और एक करोड़ लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं ।

कानपुर जेके कैंसर संस्थान के डॉ एके दीक्षित ने कहा, "तम्बाकू के सेवन से सवा छह सेकेण्ड में एक मौत होती है, लगभग हर साल नौ लाख भारतीय तम्बाकू के सेवन से मरते हैं जो कि क्षय रोग, एड्स और मलेरिया से होने वाली मौतों से अधिक हैं।" वो आगे बताते हैं, "तम्बाकू में चार हजार किस्म के जहर होते हैं, 50 प्रतिशत लोग तम्बाकू के सेवन से मर जाते हैं, बच्चे और युवा इसका सेवन न करें जागरूकता ही इसका मुख्य बचाव है, कानपुर शहर की लगभग 50 लाख की आबादी में 40 प्रतिशत लोग प्री कैंसर की अवस्था में पहुंच चुके हैं।"

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक आँकड़े के अनुसार तम्बाकू के विभिन्न उत्पादों के प्रयोग से किशोर और युवाओं में मनोदैहिक रोग बढ़ रहे हैं, जबकि भारत में प्रति तीन लाख आबादी पर एक मनोचिकित्सक है पूरे देश में 16 लाख नये कैंसर रोगियों के मामले दर्ज होते हैं, जबकि देश में एक प्रतिशत ही डॉ उपलब्ध हैं । वर्ष 2030 तक धुम्रपान से मरने वालों की संख्या 83 लाख हो जाएगी।

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कानपुर शहर में अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख व राष्ट्रीय निदेशक कानपुर के योग गुरु ज्योती बाबा ने वर्ष 1989 में 11 लोगों के सहयोग से नशा मुक्ति अभियान की शुरुवात की थी। आज इस अभियान में सक्रिय रूप से 2200 लोग शामिल हो चुके हैं, जो जगह-जगह पर जागरूकता अभियान कर रहे हैं।

ज्योती बाबा का कहना है, "मीठी सुपाड़ी और बाबा इलायची में तम्बाकू (निकोटीन) मिलाकर बच्चों को इसका आदी बनाया जा रहा है, जिसकी वजह से दिल, दमा, डायबिटीज के लोग शिकार हो रहे हैं तम्बाकू के सेवनकर्ता को भरपूर नींद नहीं आती है।" वो आगे बताते हैं, "मीठी सुपाड़ी खाने से बच्चों की दिनचर्या बिगड़ रही है, देर से सोना देर से उठना, असमय बाल सफेद होना, आँखों में चश्मा लगना, पेट की बीमारियाँ,याददाश्त में कमीं, चिडचिडापन, गुस्सा बहुत आना, तनाव, चिंता और कुंठा उनके मित्र बन जाते हैं ।"

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योग ज्योति इंडिया संस्था के कानपुर के 30 जूनियर हाईस्कूल में तम्बाकू व उससे सम्बंधित उत्पादों के सेवन पर एक खतरनाक रिपोर्ट सामने आयी है। जिसमे पांच वर्ष के 95 प्रतिशत बच्चे मीठी सुपाड़ी व सेंटेड इलायची का सेवन करते हैं । पांच से आठ वर्ष के बीच के 85 प्रतिशत बच्चे पान मसाला का सेवन शुरू कर चुके होते हैं, साथ ही नशे के दूसरे रूप जैसे मुन्नका बट्टी, आयुर्वेदिक चूर्ण के अलावा और कई तरह मिलते जुलते उत्पादों से बच्चों को नशे का आदी बनाया जा रहा है ।

सरकार इसकी बिक्री में रोकधाम के लिए अगर कठोर कदम नहीं उठायेगी तो आने वाले समय नशा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जायेगी और इससे होने वाली मौतों को रोकना मुश्किल होगा ।

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