बढ़ता तापमान मुर्गियों के लिए खतरनाक

बढ़ता तापमान मुर्गियों के लिए खतरनाकबढ़ता तापमान मुर्गियों के लिए खतरनाक हो सकता है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। बढ़ता तापमान मुर्गियों के लिए खतरनाक हो सकता है, अगर मुर्गीपालकों ने व्यवस्था नहीं की है तो अंडा उत्पादन पर असर पड़ सकता है इसके साथ ही ब्रायलर के लिए प्रयोग किए जाने वाले पक्षियों की बढ़त भी रुक सकती है।

नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पशु वैज्ञानिक डॉ मुकेश कुमार बताते हैं, “ब्रायलर के लिए जो पक्षी पाले जाते हैं अगर उनका ठीक से ध्यान नहीं रखा तो उनकी बढ़वार रुक जाती है, जिससे पशुपालक को नुकसान भी हो सकता है।”

वो आगे बताते हैं, “इसलिए उन्हें सुबह 11 बजे शाम 4 बजे तक खाना न दे और एक लीटर पानी में करीब 2 ग्राम इल्क्ट्रोकेयर का छिड़काव बाड़े में जरुर करें। हवा आने का अच्छा प्रबंध रखे ताकि उनको कोई बीमारियां न हो।”

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उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान समय में प्रदेश में प्रतिदिन 52 लाख अंडे का उत्पादन हो रहा है जबकि प्रदेश में अंडे की प्रतिदिन खपत एक करोड़ की है। मौसम का बढ़ता तापमान मुर्गियों की जान के लिए आफत न बन जाए इसलिए उनका उचित प्रबंध करे।

मु्र्गियों के बाड़े में जल प्रबंधन

गर्मी के मौसम में मुर्गियों को कम से कम 4 बार मिट्टी के बर्तन में पानी देना चाहिए। पानी साफ और ताजा रखें। पानी का तापमान कमरे के तापमान से कम से कम 40 से 70 डिग्री फारेनहाइट तक रखना चाहिए मुर्गियों को पानी की आवश्यकता प्रति डिग्री तापक्रम पड़ने पर 4% बढ़ जाती है। समानता मुर्गियों को 2 लीटर पानी प्रति किलोग्राम दाने पर आवश्यक होता है। पानी की पाइप लाइन पर सफेदी एवं टैंक पर बोरे का टुकड़ा भिगोकर लपेट देना चाहिए, जिससे उसकी शीतलता बनी रहे। पानी में शीरा और गुड़ मिलाना लाभदायक होता है।

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आवास प्रबंधन

मुर्गियों के लिए बनाए गए आवास की लंबाई पूरब से पश्चिम होनी चाहिए और हवा के उचित आगमन के साथ छत की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर और दोनों तरफ पूरी होनी चाहिए। छत पर पानी के छिड़काव से अंदर का तापमान 5 से 10 डिग्री फारेनहाइट कम हो जाता है। आवास के पास पेड़ और छत पर हरी लताएं लगाना फायदेमंद होता है। संभव हो तो कूलर या एग्जॉस्ट फैन का भी प्रयोग कर सकते हैं।

मुर्गियों के बाड़े में बिछावन का प्रबंध

मुर्गियों के बाड़े में बिछावन 23 इंच मोटा हो जिसे समय समय पर पलटते रहना चाहिए। बिछावन में ज्यादा धूल ना हो वरना मुर्गियों को सांस संबंधी बीमारियों का प्रकोप हो सकता है।

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