कासगंज में ग्रामीणों ने स्कूल को बनाया कूड़ा घर

Mo. AmilMo. Amil   22 July 2017 2:53 PM GMT

कासगंज में ग्रामीणों ने स्कूल को बनाया कूड़ा घरप्राथमिक विद्यालय के पीछे पड़े कूड़े का ढेर दिखाते बच्चे

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

कासगंज। जनपद के तराई इलाकों में मौजूद प्राइमरी विद्यालयों की हालात बदतर है। विद्यालयों में पढ़ाई न के बराबर होती है तो वहीं बच्चों को सांप-बिच्छुओं का सामना भी करना पड़ता है। अधिकतर विद्यालयों में गाँव के लोग कूड़ा डालते हैं तो वहीं कई विद्यालयों के कमरों में भूसा भरकर कब्जा कर लिया गया है। गाँव कनेक्शन टीम ने जब गंगा किनारे विद्यालयों का हाल जाना तो देखा कि बच्चे जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।

मल्लाहनगर के जूनियर विद्यालय में मौजूद कक्षा सात के छात्र शाकिब से पूछा तो उसने बताया, “पढ़ाई के वक़्त मच्छर काटते हैं। कई बार कमरे में सांप आ जाते हैं।” कक्षा आठ के छात्र जहूर (13 वर्ष) ने बताया, “स्कूल में पढ़ाई कम होती है। टीचर मोबाइल पर लगे रहते हैं, यहां दिन में भी मच्छर काटते हैं।”

ये भी पढ़ें- गाय की मदद से हो सकेगा एचआईवी का इलाज, अमेरिकी शोध में खुलासा

जब इस सम्बन्ध में विद्यालय के प्रधानाचार्य छोटेलाल कहना है, “मैं पिछले 14 वर्षों से विद्यालय में तैनात हूं, यहां कभी भी दवा का छिड़काव नहीं किया गया, विद्यालय के समीप ही गाँव के लोग कूड़ा डालते हैं।” ठठेरपुर के प्राथमिक विद्यालय के बाहर गंदगी का आलम है। नालियों में गंदा पानी भरा रहता है। कक्षा तीन के छात्र अभिषेक ने बताया, “मच्छर बहुत काटते हैं। पढ़ने में परेशानी होती है।” विद्यालय के प्रधानाचार्य उपेन्द्र कुमार ने बताया, “विद्यालय में सफाई कर्मचारी नहीं है। हम अपने निजी खर्चे पर सफाई कराते हैं। कई बार प्रधान से व अधिकारियों से कहा पर कोई नहीं सुनता, विद्यालय के बाहर गंदगी रहती है।”

कादरवाडी के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए फर्श पर टाटपट्टी बिछी है। यहां बच्चों को पीने का पानी मयस्सर नहीं है। विद्यालय में जो हैंडपम्प है उसमें से खारा पानी निकलता है। विद्यालय के सामने गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। कक्षा तीन के छात्र नवीन ने बताया, “हमें पीने का पानी नहीं मिलता। नल से खारा पानी आता है, मच्छर भी काटते हैं।”

ये भी पढ़ें- जान जोखिम में डालकर स्कूल पढ़ाने जाती है ये सरकारी टीचर, देखें वीडियो

विद्यालय की प्रधानाचार्य नीता बतातीं हैं, “विद्यालय में सफाई कर्मचारी सप्ताह में एक बार आता है, बाकी दिनों में अपने निजी खर्च पर या सफाई करानी पड़ती है। यहां कभी भी दवा का छिड़काव नहीं किया गया।” उढेरपुख्ता के प्राथमिक व जूनियर विद्यालय के कमरों में ग्रामीणों का कब्जा है। एक कमरे में भूसा भरा हुआ है। परिसर में बड़ी-बड़ी घास खड़ी है।

बीएसए गीता सिंह ने बताया सफाई कर्मचारी की जिम्मेदारी प्रधान पर होती है। मच्छर रोधी दवा का छिड़काव स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराया जाता है। हमारे पास इससे सम्बंधित बजट नहीं होता। जिन विद्यालयों के कमरों में भूसा भरा हुआ है उन्हें संज्ञान में लिया जाएगा और सम्बंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top