पति के इलाज के लिए तरन्नुम ने हाथ में उठा लिए रिंच, ट्रक तक के बनाती हैं पंचर

Basant Kumar | Apr 11, 2018, 11:25 IST
Share
lucknow
पति के इलाज के लिए तरन्नुम ने हाथ में उठा लिए रिंच
लखनऊ। ‘‘शादी के बाद ज़िन्दगी बिलकुल उजड़ गयी। बीमारी के कारण पति ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे, मुझे खुद ही घर से निकलना पड़ा। किसी के घर पर काम नहीं कर सकती थी तो पति के पंचर की दुकान पर ही काम करने लगी। अब तो ऐसी आदत लगी है कि दुकान पर नहीं आती हूँ तो शरीर दर्द करने लगता है।’’ यह कहना है, पंचर बनाने वाली 35 वर्षीय तरन्नुम का।

जानकीपुरम विस्तार के मुलायम तिराहे के पास ‘तरन्नुम पंचर वाली’ नाम से दुकान चलाने वाली तरन्नुम पिछले 23 साल से अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए पंचर बनाने का काम कर रही हैं। सीतापुर जनपद के गंगापुरवा गाँव की रहने वाली तरन्नुम बताती हैं कि पति बीमार रहते थे। खाने को घर पर नहीं होता था। क्या करती, निकल गयी चहारदीवारी से और पति के काम में हाथ बटाने लगी। अब पूरा परिवार मैं ही चला रही हूं।

मोटरसाईकिल का पंचर बना रही तरन्नुम बेहद उदास होकर कहती हैं कि आप अगर गरीब होते है तो कोई पूछने वाला नहीं होता है। मेरे ससुरालवाले हो या मायके वाले किसी ने भी गरीबी में मेरा साथ नहीं दिया। मैं साईकिल से लेकर ट्रक तक के पंचर बनाती हूं। पंचर बनाने के अलावा पेंटिंग भी करती हूं। मेरे पति कमजोर थे तो मैं उनकी मदद करने आई। यहीं तो होता है कि अगर पति कमजोर होतो पत्नी साथ दे और अगर पत्नी कमजोर हो तो पति को साथ देना चाहिए।

शादी के बाद जैसे-तैसे घर चल रहा था। लेकिन जब बच्चे हुए तो उनको चीजों के लिए रोता हुआ नहीं देख सकती थी। पति का पंचर बनाने का काम था उसी में धीरे-धीरे हाथ बटाने लगी। शुरुआत में कुछ दिन तक परेशान रही थी, लेकिन अब आदत ऐसी हो गयी है कि अगर काम ना करूं तो बीमार हो जाती हूं। मैं रोजाना दो सौ से चार सौ रुपए कमा लेती हूं। ताकि मेरी बेटी सुखी रह सके।

मेरे तीन बच्चे हैं जिसमें से एक बेटी है। मैं जिस तरह की ज़िन्दगी जीने को मजबूर हूं, मैं नहीं चाहती मेरी बेटी भी ऐसी ही ज़िन्दगी गुज़ारे। मैं उसे एक खूबसूरत दुनिया देना चाहती हूं। जिस उम्र में औरतें सजती-संवरती है, उस उम्र में मैं लोहे का औजार लेकर पंचर बनाने का काम शुरू कर दी थी। मुझे याद नहीं कि आखिरीबार हाथ में मेहंदी कब लगाई थी। मैं औरत हूँ, लेकिन मेरे हाथ मुलायम नहीं है। इस हाथ में ढट्टे निकले हुए हैं।

ग्राहक महिला पंचर वाली को देखकर हैरान होते है। कुछ लोग तो मेरी तारीफ करते हुए एक्स्ट्रा पैसे दे जाते हैं, लेकिन कुछ लोग मेरा मजाक भी बनाते हैं। लोगों के मजाक बनाने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि जब मेरे पास खाने को नहीं था तब कोई खाने को देने नहीं आया था। मैं किसी की बातों का ख्याल नहीं करती अब।

तरन्नुम के पति कलीम अली भावुक होकर तरन्नुम को शुक्रिया कहते हुए बताते हैं कि मैं शुरू से ही बीमार रहता हूं। शादी के बाद जब मुझे जिम्मेदारी संभालनी थी तो मैं पीछे रह गया। मेरी पत्नी आगे आई और सब कुछ संभाल ली। मैं कभी-कभी शर्मिंदा भी होता हूँ और तरन्नुम पर गर्व भी करता हूं।

Tags:
  • lucknow
  • तरन्नुम
  • जानकीपुरम
  • मुलायम तिराहा
  • तरन्नुम पंचर वाली
  • cycle machenic women