जौनपुर के एक गाँव की बेटी का मायानगरी में चमकने का सपना 

जौनपुर के एक गाँव की बेटी का मायानगरी में चमकने का सपना फोटो: गाँव कनेक्शन 

बीसी यादव/स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

मछलीशहर(जौनपुर)। गाँव की बेटी मायानगरी में अपनी आवाज का जादू बिखेर कर अपना और अपने जिले का नाम रोशन करना चाहती हैं। उनकी आवाज और सुरों पर पकड़ की कई बड़े गायकों और गायिकाओं ने तारीफ भी की है। यही नहीं ,श्रुति ने आवाज का जादू बिखेर कर कई अवार्ड भी जीते हैं।

जौनपुर जिले की मीरगंज थाना के बभनियांव गाँव निवासी राजेन्द्र प्रसाद चौहान की बेटी श्रुति इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शास्त्रीय संगीत सीख रही हैं। उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शास्त्रीय संगीत सिखाने के लिए उनके पिता राजेंद्र प्रसाद जो ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में चालक के पद पर तैनात हैं, उन्होंने अपना तबादला जौनपुर से इलाहाबाद करवा लिया। ताकि बेटी को आगे बढ़ने में किसी तरह की रुकावट न आए। एक बार वह जिले के सुजानगंज में तृप्ति शाक्य के साथ भक्ति गीत गा रही थीं, जब उनके भक्ति गीत पर भक्तजन झूम उठे थे।

श्रुति की मां प्रमिला भी पुराने गाने सुनने की शौकीन हैं। वह आकाशवाणी पर आने वाले गीतों को सुनती हैं। उनका भी यही सपना है कि उनकी बेटी एक बड़ी गायक बने। इलाहाबाद विवि में एडमिशन के बाद प्रथम वर्ष में वह संगीत में होनहार पांच छात्रों में जगह बनाने में कामयाब रहीं। इसके साथ ही उन्होंने कई बड़े कार्यक्रम में भी गीत प्रस्तुत किए। अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ वह आकाशवाणी व दूरदर्शन में अपना गीत भी प्रस्तुत कर रही हैं।

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इतना ही नहीं वह त्रिवेणी महोत्सव, प्रयाग मे पंजाब की गायिका हर्षदीप कौर के अलावा तमाम अन्य गायकों की भी वाहवाही लूट चुकी हैं। उन्होंने इंटर तक शिक्षा नागरिक इण्टर कालेज ,जंघई से पूरी की है। श्रुति सिंह सोशल मीडिया पर भी छा चुकी हैं,जहां स्टार मेकर को सर्च करके उनके गानों को लाइक व फॉलो किया जा सकता है।

बॉलीवुड में है जाने का ख्वाब

सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद में ‘चलो मन गंगा जमुना तीर’ में भी जलवा बिखेर चुकी श्रुति का लक्ष्य आगे बढ़कर बॉलीवुड में कदम रखने का है। वह परिवार के साथ जनपद का नाम रोशन करना चाहती हैं। अपनी अभी तक की सफलता के पीछे माता-पिता का योगदान और उनका आशीर्वाद मानती हैं। वह कहती हैं, “पिता ने मेरा करियर बनाने के लिए जौनपुर से इलाहाबाद तबादला करा लिया इसलिए मैं बड़ी गायिका बनकर पिता का नाम रोशन करूंगी। मेरी आइडियल कोई और नहीं लता मंगेशकर हैं। मैं उनकी तरह गीत गाना चाहती हूँ।”

शास्त्रीय संगीत को मानती हैं अहम

श्रुति ने बताया, “शास्त्रीय संगीत से बेसिक ज्ञान मिलता है। सुरों पर अच्छी पकड़ बन जाती है। अच्छा गायक या गायिका बनने के लिए शास्त्रीय संगीत सीखना बहुत जरूरी है। मैं हर रोज एक से दो घंटे तक रियाज करती हूं, और छुट्टी के दिनों में दो से तीन घंटा रियाज करती हूं।”

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