कैसे करें धान की उन्नत खेती, वैज्ञानिकों ने किसानों को किया जागरूक 

कैसे करें धान की उन्नत खेती, वैज्ञानिकों ने किसानों को किया जागरूक गाँवों में किसानों को धान की खेती के बारे में जानकारी दी गई|

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

औरैया। किसानों को धान की फसल को रोग-कीटों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को खेत में जाकर जागरूक किया। सीएसआर-36 प्रजाति की धान पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया।

जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर विकास खंड अछल्दा के गांव साहपुर में सीएसआर-36 प्रजाति की धान पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। विषय विशेषज्ञ (सस्य विज्ञान) डा.संदीप कुमार सिंह ने सीएसआर-36 प्रजाति के महत्व को किसानों को बताते हुए कहा “इस धान की पैदावार अन्य प्रजातियों से अधिक होती है इससे कमाई भी अच्छी की जाती है, जिन किसानों के यहां पर इस प्रजाति का प्रदर्शन किया गया है उसकी कटाई वैज्ञानिकों के सानिध्य में की जायेगी। सीएसआर-36 का खेतों पर पहुंच कर किया निरीक्षण और कहा किसानों को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं उठाने दिया जायेगा।”

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कम नमी में अच्छी पैदावार

कृषि वैज्ञानिक डा.आईपी सिंह बताते हैं, “सीएसआर-36 प्रजाति की धान कम नमी में पैदा होती है यह 9.5 पीएच मान वाली मिटटी में होती है, प्रति हेक्टेयर 34 हजार रूपये की शुद्ध कमाई है इस प्रजाति से।”

प्रति हेक्टेयर है 60 से 65 कुंतल की पैदावार

धान की सीएसआर-36 प्रजाति सभी धान की प्रजातियों से अधिक पैदावार देती है। प्रति हेक्टेयर सीएसआर-36 की पैदावार 60 से 65 कुंतल के बीच की है। इसका चावल खाने में अन्य धानों से स्वादिष्ट होता है।

चार गाँव के 25 किसानों ने लगाई सीएसआर

जिले में पहली बार सीएसआर-36 धान की प्रजाति लगाई गई है। कृषि विज्ञान केंद्र ने इस प्रजाति को बढावा देने के लिए जिले के चार गाँवों को चिन्हित किया है। चार गाँव के 25 किसानों ने सीएसआर-36 की प्रजाति प्रदर्शन किया है।

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