माहवारी के असहास की कहानी, खुद महिलाओं की जुबानी

माहवारी के असहास की कहानी, खुद महिलाओं की जुबानीवाराणसी में महिलाओं को जागरूक किया गया।

विनोद शर्मा
स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

वाराणसी। महिलाएं माहवारी के समय के दर्द को झेलती आ रहीं थीं, किसी से उसके बार में बात नहीं करती थीं, लेकिन आज वो खुलकर इस मुद्दे पर चर्चा कर रहीं थीं।

जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर काशी विद्यापीठ ब्लॉक के भगवानपुर ग्राम सभा में रविवार सुबह करीब दस बजे गाँव कनेक्शन फाउंडेशन की टीम पहुंची। टीम की ओर से एक बैनर लगाया गया, जिसमें एक महिला, जो रंगोली, पॉयल से सजे और खाखरा से ढके घुटने तक पांव को दर्शाया गया था, जो किशोरी और महिलाओं को शिविर तक आने के लिए विवश कर रह थी।

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शिविर में मौजूद जूनियर महिला रोग विशेषज्ञ डा. बेबी और महिला सलाहकार संगीता विश्वकर्मा से किशोरी के साथ महिलाओं ने महावारी के दौरान आने वाली तकलीफों और समस्याओं को शेयर किया। डॉक्टर ने महावारी के दौरान बरते जाने वाली चिकित्सकीय पद्धति के बारे में परामर्श दिया। साथ ही महावारी को लेकर उनके मन और मस्तिष्क में मौजूद भ्रातियों को दूर किया।
कार्यक्रम में आई 17 वर्षीय की शीनू शर्मा ने पीरियड के दौरान पेट में दर्द, पानी आना आदि समस्याएं बताईं। साथ ही सवाल किया कि कितने दिन तक पीरियड रहना चाहिए।

तो 26 वर्षीय की विवाहिता पूनम का दर्द और तकलीफ डाक्टर भावुक हो गई। पूनम ने कहा, "माह में उसे दो बार पीरियड आता है। इसका भी निश्चित समय नहीं है। इसी कारणवश बच्चा पैदा नहीं हो रहा है। लगता है कि वह बांझपन की शिकार है।

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मीरा देवी (36 वर्ष) ने कहा, "दो बच्चे हैं, लम्बे समय से माह में तीन बार पीरियड आता है। पानी भी आता है। शर्म के बारे में वह किसी से इस बारे में चर्चा नहीं करती हैं। क्योंकि उन्हें डर है कि इसे लेकर समाज में तरह-तरह का दुष्प्रचार होगा। महिला डॉक्टर बेबी ने किशोरी और महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह देते हुए कहा, "गाँवों में मां-बेटी के रिश्तों में काफी गैप होता है। किशोरियां अपनी हर समस्या मां को बताने से हिचकती हैं। जागरूकता न होने कारण मां भी अपनी बेटियों पर ध्यान नहीं देती हैं। इसलिए स्कूल में ही लड़कियों को पीरियड के बारे में बताया जाना चाहिए।"

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महिला सलाहकार संगीता विश्वकर्मा ने कहा कि स्त्री के लिए महावारी एक गंभीर समस्या है, लेकिन गाँव की महिलाएं इन सब चीजों पर कम ध्यान देती हैं। शर्म और लाज की वजह से इन विषयों पर खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। इन समस्याओं से किशोरियों को दूर रखने के लिए गाँवों में शिविर लगाकर महावारी के बारे में बताया जाना चाहिए। गांव कनेक्शन फाउंडेशन का यह एक अच्छा प्रयास है।

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