महिला सशक्तीकरण की मिसाल बना तिर्वा

Ajay MishraAjay Mishra   20 July 2017 2:50 PM GMT

महिला सशक्तीकरण की मिसाल बना तिर्वातहसील तिर्वा में शिकायतें सुनतीं एसडीएम शालिनी प्रभाकर और सीओ मोनिका यादव।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। जिला मुख्यालय से 16 किमी दूर बसा तिर्वा कस्बा महिला सशक्तीकरण की एक मिसाल बन चुका है। पहली बार यहां महिला अफसरों और नागरिकों का बोलबाला है। यह कन्नौज जिले के इतिहास में पहली बार हुआ है।

पिछले महीने तहसील तिर्वा में उपजिलाधिकारी पद पर पहली बार महिला एसडीएम शालिनी प्रभाकर की तैनाती हुई थी। जुलाई में दो दिन पहले क्षेत्राधिकारी पद पर मोनिका यादव को कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दे दी गई।

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जुलाई के दूसरे तहसील दिवस में महिला एसडीएम और महिला सीओ ने मिलकर पीड़ितों का दर्द सुना। साथ ही एसडीएम के पास तिर्वागंज नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी पद का भी अतिरिक्त चार्ज मिला हुआ है। खास बात यह है कि नगर पंचायत तिर्वागंज की अध्यक्ष मीरा गुप्ता भी महिला ही हैं। कन्नौज जिले के लिए यह इतिहास बन गया है कि सितम्बर 1997 में जिला बनने के बाद पहली बार तिर्वा तहसील के दो पदों पर महिला अफसर काम कर रही हैं। इससे पहले अपर पुलिस अधीक्षक पद पर जरूर कमलेश्वरी तैनात रही थीं। हालांकि जिलाधिकारी पद पर जरूर कई महिला अफसर काम कर चुकी हैं। इसमें सेल्वा कुमारी जे और डा. सारिका मोहन का नाम मुख्य है।

एक ही बैच की है महिला अधिकारी

एसडीएम शालिनी प्रभाकर बताती हैं, ‘‘मैं और मोनिका पहले से ही एक दूसरे को जानते हैं। हम बैचमेट भी हैं। वर्ष 2014 में ट्रेनिंग के दौरान मुरादाबाद में मुलाकात हुई थी।” एसडीएम आगे कहती हैं , ‘‘एसडीएम एक पद है। इसमें महिला और पुरुष की बात नहीं। अब पुलिस और प्रशासन दोनों ही पदों पर महिलाएं हैं तो और बेहतर काम होगा। मैं महिला और बच्चों के काम को प्राथमिकता देती हूं। गलत काम कतई नहीं करूंगी। महिलाएं पीछे नहीं हैं। महिलाएं किसी काम में अपने को कमजोर नहीं समझती हैं।

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सीओ तिर्वा मोनिका यादव ने बताया महिलाओं के मामले निपटाना मेरी प्राथमिकता होगी। महिलाएं अपने को सुरक्षित महसूस करें। मेरी भी पहली पोस्टिंग है और एसडीएम की भी पहली पोस्टिंग है। महिला सशक्तीकरण का अच्छा उदाहरण है। बेहतर तालमेल से काम होगा।

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