बीएसपी समर्थकों ने कहा, दलित विरोधी है सरकार, हमें एकजुट होना होगा 

बीएसपी समर्थकों ने कहा, दलित विरोधी है सरकार, हमें एकजुट होना होगा मायावती के अंबेडकर पार्क न पहुंचने से निराश हुए समर्थक

जब से अंबेडकर पार्क बना है बसपा सुप्रीमो हर साल अंबेडकर जयंती पर माल्यार्पण करने अंबेडकर पार्क आती रहीं हैं, लेकिन इस बार मायावती ने अंबेडकर पार्क न आकर अपने समर्थकों को निराश किया।

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महाराष्ट्र के नागपुर से आए भारतीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष डीके रावटे केन्द्र सरकार से नाराज दिखते हैं, वो कहते हैं, "जब तक केन्द्र भारत में बीजेपी की सरकार चल रही है, तब तक ये दलितों को बर्बाद करती रहेगी, इसमें कोई दो राय नहीं है, और दूसरी बात हम ने भी गलतियां की हैं हमारे में भी बहुत सारे पार्टियां और संगठन हैं, उसमें विवाद चलते रहते हैं, इसे जबतक हम एक नहीं करेंगे, एससी, एसटी, ओबीसी तीनों को मिलना होगा।"

संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की आज (14 अप्रैल) 127वीं जयंती है। समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ व संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को बाबा साहेब के नाम से भी जाना जाता है।

2019 चुनाव में लोगों को बसपा से उम्मीद है। डीके रावटे बताते हैं, "2019 में बदलाव दिखेगा, केन्द्र में बदलाव होगा, जो जो तकलीफों को दे रही है, ये तकलीफों सिर्फ एससी, एसटी को ही नहीं है, ये ओबीसी और माइनरटी सोसाइटी को भी हो रही है, सब को हमें जागरूक करना पड़ेगा, तभी लोग समझेंगे।"

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वोट बैंक के खातिर सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियां जयंती समारोह के बहाने शक्ति प्रदर्शन में जुटी हैं। 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में हुई प्रदर्शन ने पूरी कर दी। डैमेज कंट्रोल के लिए अब अखिल भारतीय अंबेडकर महासभा अब 14 अप्रैल को सीएम योगी को 'दलित मित्र' सम्मान से नवाज रही है। वहीं सपा भी पहली बार 14 अप्रैल बाबा साहेब की जयंती धूमधाम से मना रही है।

लखनऊ के मलिहाबाद के गोपरामऊ गाँव से आए छेदीलाल कहते हैं, "बहन जी अगर आ जाती तो बहुत भीड़ हो जाती है, लेकिन बहन जी के न आने से बहुत लोग लौट गए।'

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में काफी विरोध हो रहा है। दलित समुदाय के लोग और कई संगठन इस पर अपनी आपत्ति जता रहे हैं। देशभर में इन लोगों की तरफ से ‘भारत बंद’ भी किया जा रहा है।

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लखनऊ के बीएस प्रसाद एससी-एसटी एक्ट के संसोधन के खिलाफ हैं, वो कहते हैं, 'मुझे लग रहा कि दलितों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, पिछले कई साल में दलितों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। एससी-एसीटी एक्ट में संसोधन करके उसे कमजोर बनाया गया है, उदाहरण आपके सामने है, उन्नाव में लड़की के साथ रेप हुआ, उसके पिता की हत्या हो गई, उसे पीटा गया, जेल में बंद कर दिया गया। इसके लिए दलित, एससी, एसटी सबको एकजुट होना पड़ेगा, तभी हमारा कुछ भला हो पाएगा।

First Published: 2018-04-14 15:49:37.0

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