'गाय गांव' से विलेज टूरिज्म को बढ़ावा दे रहे बीएचयू के छात्र

बीएचयू दृश्य कला संकाय के छात्रों द्वारा रामेश्वर गांव में दीवारों पर बनाई जा रही गाय की पेंटिंग, दीवारों पर गाय की तस्वीरें उकेर कर उनके महत्व को दर्शाया जा रहा

गाय गांव से विलेज टूरिज्म को बढ़ावा दे रहे बीएचयू के छात्र

लखनऊ। वाराणसी में विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जा रहा है। बीएचयू के दृश्य कला संकाय के छात्रों द्वारा दीवारों पर गाय की तस्वीरें उकेर कर उनके महत्व को दर्शाया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी गौरांग राठी के सहयोग से छात्र-छात्राओं द्वारा स्थापित होप संस्था द्वारा "काउ विलेज" प्रोजेक्ट के तहत रामेश्वर गांव में विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसी के अंतर्गत बीएचयू दृश्य कला संकाय के छात्रों ने दीवारों पर गाय के अलग अलग चित्र बनाए।

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प्रोफेसर सुरेश के नायर के नेतृत्व में छात्रों ने दो दिन लगातार लगभग पचासी फीट वॉल पेंटिंग का कार्य किया है। जल्द ही गांव के अन्य दीवारों पर वॉल पेंटिंग का कार्य किया जाएगा। प्रो. सुरेश ने बताया, " रामेश्वर गांव में चार गौशालाएं हैं, जिसमें एक हजार से अधिक गाएं रहती हैं। इसमें से एक गौशाला करीब 70 वर्ष पुरानी है, जिसकी स्थापना महामना मदन मोहन मालवीय ने किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए रामेश्वर गांव में वॉल पेंटिंग किया जा रहा है।

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होप संस्था के दिव्यांशु ने बताया, " इस गांव की विशेषता है कि यहां पर अतिथियों का स्वागत गाय के दूध से बने उत्पाद लस्सी, रबड़ी, छांछ और दही से किया जाता है। गाय की स्थिति आज बहुत ही दयनीय है, इसलिए हम लोगों ने गाय के दूध और गाय को प्रोत्साहित करने के लिए कॉउ विलेज विषय चुना है।"


रामेश्वर बनारस एयरपोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित करीब 1200 अबादी का यह गांव वरुणा नदी के तट पर बसा हुआ है।

इसी वजह से इस गांव की खूबसूरती और बढ़ जाती है जिसको देखने देश - विदेश के लोग आते हैं। इस गांव में लगभग 11 धर्मशाला है जहां आसानी से रुक कर छुट्टियां मनाई जा सकती हैं। गांव का एक विधान यह भी है इस गांव में जो आता है वह एक रात रुकता है। काशी में विख्यात पंचकोशी यात्रा का तीसरा पड़ाव इसी गांव में पड़ता है। यहां रामेश्वर भगवान शिव का मंदिर है। ऐसा कहते हैं कि इस शिवलिंग की स्थापना खुद भगवान राम ने की थी।

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