मानदेय के लिए ग्राम रोजगार सेवकों की बढ़ती जा रही है नाराजगी

मानदेय के लिए ग्राम रोजगार सेवकों की बढ़ती जा रही है नाराजगीरोजगार सेवकों का आरोप है कि कहीं एक साल से भत्ता नहीं मिला है तो कहीं दो साल।

लखनऊ। ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित होने वाली विकास की योजनाओं में ग्राम रोजगार सेवक अहम कड़ी हैं लेकिन पिछले कई हफ्तों से रोजगार सेवक लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। रोजगार सेवकों का आरोप है कि कहीं एक साल से भत्ता नहीं मिला है तो कहीं दो साल। प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बीकेटी तहसील में पिछले दिनों सामूहिक इस्तीफे भी थे तो बहराइच में ग्राम रोजगार सेवकों ने सीडीओ और मनरेगा समन्वयक को ज्ञापन दिया है। इन लोगों ने 5 फरवरी से विकास भवन में धरने का अल्टीमेटम दिया है।

जबकि आजमगढ़ में युवकों ने डीएम से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में मानदेय दिलाने की अपील की है। मिर्जापुर के ग्राम रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ख़त लिखा है। लखनऊ जिले में रोजगार सेवकों से सीधा वास्ता रखने वाले जिला समन्वयक मनरेगा राजमणि वर्मा बताते हैं, “विभागीय व्यस्तता के चलते अभी इन लोगों की शिकायत की जांच नहीं हो पाई है। ये भी देखा जा रहा है कि जिले में सभी का मानदेय बाकी है या फिर सिर्फ कुछ लोगों का।’

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वहीं बहराइच में रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, “जिले में 853 रोजगार सेवक हैं, इनमें से किसी का 12 तो किसी का 20 महीने से मानदेय नहीं मिला है। ब्लॉकों में पैसा डंप पड़ा है पर ग्राम रोजगार सेवकों को नही दे रहे।” वो आगे बताते हैं, हम लोगों से मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, स्वच्छ शौचालय आदि की जियो फोन की टैगिंग के लिए दबाव बनाया जाता है जबकि अधिकांश ग्राम रोजगार सेवकों के पास एंड्रॉयड फोन तक नहीं है। पिछले दिनों हमारे प्रदर्शऩ के बाद जिले में कुछ लोगों को एक दो महीने का पैसा मिला था। हमारी हालत बहुत दयनीय हो गई है।’

इस बारे में बात करने पर बहराइच के मुख्य विकास अधिकारी श्रीरामचंद बताते हैं, “रोजगार सेवकों को मानदेय दिया जा रहा है। इनका मानदेय रोजगार सृजन के हिसाब से होता है, हालांकि उनका न्यूनतम मानदेय तय है लेकिन लक्ष्य पूरा होने पर मानदेय मिलता है जो लोग काम कर रहे हैं उन्हें जरूर मिल रहा होगा जो लोग नेतागीरी कर रहे हैं उनका काम पूरा नही होगा इसीलिए मानदेय नही मिल रहा होगा।’

उत्तर प्रदेश के हर ग्राम पंचायत में लोगों को मनेरगा समेत पंचायत स्तर पर ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिले और विकास के कार्य हो, इसकी जिम्मेदारी ग्राम रोजगार सेवक पर है। प्रदेश में कई जनपदों में ग्राम रोजगार सेवकों की समस्याओं को लेकर बात करने पर अपर आयुक्त मनरेगा (ग्राम विकास विभाग), उत्तर प्रदेश योगेश कुमार बताते हैं, “ग्राम रोजगार सेवकों का मानदेय सीधा रोजगार श्रृजन पर निर्भर है, जितना काम होगा उसी के अनुरूप भुगतान होता है।

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जिसमें सीधे-सीधे ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सेवक शामिल होते हैं। फिर भी जिलों में बोला गया है कि जहां कहीं समस्या है जल्द सुलझाया जाए। इन लोगों को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाने के लिए पिछले वर्ष के अनुपात में डेढ़ गुना रोजगार श्रृजन का लक्ष्य रखा गया है।” अपर आयुक्त आगे बताते हैं, ग्राम रोजगार सेवकों को मनरेगा और श्रम विभाग की कई लाभार्थी योजनाओं के भी लाभ दिए जाने की कवायद जारी है।

अपनी मांगों को लेकर ग्राम रोजगार सेवक संगठन के पदाधिकारी लखनऊ के चक्कर लगा रहे हैं तो जिलों में भी धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन का सिलसिला जारी है। आजमगढ़ में शनिवार को ग्राम रोजगार सेवक संघ के पदाधिकारियों ने 1039 कर्मचारियों की तरफ से डीएम को मिलकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह बताते हैं, “करीब 14 माह से मानदेय नही मिला है, जिसके चलते हमारी रोजी-रोटी चलनी मुश्किल हो गई है।

वहीं मिर्जापुर में भी रोजगार सेवकों ने प्रदर्शऩ किया। यहां उच्च अधिकारियों को भेजे अपने ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम प्रधान और खंड विकास अधिकारी मिलकर मनरेगा के अंतर्गत होने वाले विकास कार्य ठेकेदारी प्रथा से करा लेते हैं फिर फर्जी मजदूरों की लिस्ट बनाकर मास्टर रोल बनवाने का रोजगार सेवकों पर दवाब डाला जाता है और मना करने पर नौकरी से निकलवाने की धमकी दी जाती है।

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मिर्जापुर के ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष संजय सोनकर ने बताया, “यह समस्या मिर्जापुर के 12 ब्लॉक के पांच सौ पच्चीस ग्राम रोजगार सेवकों की है सीनियर अधिकारियों से शिकायत करो तो बीडीओ धमकी देते हैं। हम लोग नाउम्मीद हो गए हैं। वहीं मिर्जापुर में ब्लॉग राजगढ़ के खंड विकास अधिकारी रामचंद्र यादव ने गांव कनेक्शन से फोन पर कहा- "कमीशन बाजी के आरोप निराधार है इसकी जांच करा ली जाए।

मानदेय इन लोगों का कितना बकाया है ये अभी नही पता है या अकाउंटेंट से पूछना पड़ेगा।"हालांकि प्रधानों और रोजगार सेवकों में कई लोगों ने कमीशनबाजी के बारे में बिना नाम लिए इस बारे में बात की। नाम छापने के शर्त पर लखनऊ जनपद के प्रधान ने बताया, "सरकार की गांव स्तर पर विकास की कोई ऐसी योजना नही है जिंसमे कमीशन न चलता हो।

ब्लॉक से होने वाले निर्माण कार्य में स्टीमेट से लेकर टीएस तक एक प्रतिशत,फिर एमबी के लिए ढेड़ प्रतिशत, एडीओ पंचायत का कमीशन ढाई प्रतिशत,और खंड विकास अधिकारी का कमीशन तीन प्रतिशत जाता है ये कुल मिलाकर आठ प्रतिशत हो जाता है उसके बाद निर्माण कार्य मे प्रधान को भी बचत चाहिए होती है यही वजह है कि सरकार के मंशानुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य गॉवो में नही हो पाता है। वो आगे बताते हैं, “योगी जी व मोदी जी प्रयास तो बहुत कर रहे है पर कमीशन का तिलिस्म बहुत मजबूत है और रोजगार सेवक इसमे बिना फायदे के पीसे जा रहे हैं।’

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