बाढ़ से सैकड़ों परिवार सड़क पर, हजारों एकड़ फसलें बर्बाद

यूपी के अधिकतर जिलों बाढ़ आई हुई है। कन्नौज के साथ-साथ फर्रूखाबाद, रायबरेली, हरदोई और औरैया में पानी ही पानी दिख रहा है। बाढ़ की वजह से हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है।

बाढ़ से सैकड़ों परिवार सड़क पर, हजारों एकड़ फसलें बर्बाद

अजय मिश्र/मोहम्मद परवेज

कन्नौज। ''मैं रामादेवी इंटर कालेज जरेरा, हरदोई में कक्षा नौ में पढ़ती हूं। पानी में तीन किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल पहुंचती हूं। रात में पढ़ने के लिए प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं। अधिकारी आते हैं और देखकर चले जाते हैं। पुलिस विभाग में नौकरी करने का सपना है।'' यह कहना है 15 साल की रिंकी का। यह परेशानी किसी एक छात्रा या किसान की नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की है जो बाढ़ और बारिश की वजह से खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं।

यूपी के अधिकतर जिलों बाढ़ आई हुई है। कन्नौज के साथ-साथ फर्रूखाबाद, रायबरेली, हरदोई और औरैया में पानी ही पानी दिख रहा है। बाढ़ की वजह से हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है।

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रिंकी के छोटे भाई ने बताया, ''दीदी के साथ साइकिल पर बैठकर मैं भी पढ़ने जाता हूं। रात में रोशनी की व्यवस्था नहीं है। अधिकारी व्यवस्था करें तो अच्छा रहेगा। पता नहीं अभी कितने दिनों तक सड़क पर रात गुजारनी पड़ेगी।"

कन्नौज जिले के बख्शीपुर्वा निवासी प्रताप (58वर्ष) बताते हैं, ''खेतों में धनिया, सोया और मेथी की फसल थी। पानी की वजह से सब खराब गई। कुछ दिन पहले अधिकारी आए थे और कुछ राशन दे गए हैं। ''

हरदोई के रामेश्वर पुर्वा निवासी जगरानी (38वर्ष) बताती हैं, ''अनाज-गल्ला सड़ गया है। गोरू को भूसा नहीं मिल पा रहा है। घरों में पानी भर गया है, जितने लोग रहते थे सबका नुकसान हुआ है। करीब 100 लोग हरदोई जिले के यहां पर रह रहे हैं। बाढ़ से धान-मकई सब चली गई।''

''पांच बीघा में मक्का और 10 बीघा में धान थी। बारिश के बाद सैलाब आ गया। गेहूं-गल्ला भी नहीं निकाल पाए। हरदोई-कन्नौज के बार्डर पर रहने की वजह से परेशान हैं। हरदोई से कोई आता नहीं है और कन्नौज से सहायता नहीं मिलती। सिर्फ दो दिन पूड़ी-सब्जी मिली थी।'' यह कहते हुए रामेश्वर पुर्वा के पप्पू राजपूत (35वर्ष) फफक कर रो पड़े।

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प्राथमिक स्कूल बख्शीपुर्वा, कन्नौज में पढ़ने वाले कक्षा दो के छात्र सुधांशू का कहना है, ''स्कूल और आस-पास पानी भरा है। करीब 10-11 दिन से स्कूल बंद है। दूसरी जगह बच्चे पढ़ने जाते हैं।''

इसी तरह मथुरापुर्वा के गंगाचरण नाव पर खड़े होकर बताते हैं, सामान निकालने के लिए नाव का प्रयोग कर रहे हैं। राहत सामग्री जब बंटती है तो हम लोगों के बच्चे लेने को दौड़ते हैं, लेकिन पास के गांव के लोग अफसरों के सामने विरोध कर देते हैं कि हम लोग दूसरे गांव के रहने वाले हैं।

गंगानदी से दो गांव प्रभावित हैं कासिमपुर और बख्शीपुर्वा। खाद्यान्न की व्यवस्था कर दी गई है। पहले 100 पैकेट बंटवाए गए थे, अब फिर 100 पैकेट आ गए हैं। एक कार्टून 26 किलो का है। इसमें हफ्ता-दस दिन तक की सामग्री है। रहने को टेंट दिया गया है। पानी लगातार कम हो रहा है। जो लोग हरदोई के हैं उनके लिए हरदोई प्रशासन सहायता करेगा।

महेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम- कन्नौज (सदर)

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यह है सरकारी मदद में

गत्ते में पीड़ितों के लिए 10-10 किलो आंटा और चावल है। दो किलो भुने चावल, एक पैकेट मोमबत्ती, दो किलो अरहर की दाल, 250 ग्राम मिर्च, 500 ग्राम नमक, 250 ग्राम हल्दी, इतनी ही धनिया, एक पैकेट माचिस, 10 पैकेट बिस्किट, एक लीटर रिफाइंड, 10 किलो आलू और पांच किलो लाई देने का नियम है।

क्षेत्र में काफी जगह बारिश का पानी भर गया था। बाढ़ का भी प्रकोप है। जिससे आस-पास के लोग प्रभावित हैं। राहत और बचाव कार्य जारी हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद की जा रही है। राजस्व विभाग की ओर से टीमें लगी हुई हैं।

शालिनी प्रभाकर, एसडीएम रायबरेली

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