कोई तेंदुए से लड़ी तो किसी ने बाघ से लड़कर अपने बच्चे को बचाया…

कोई तेंदुए से लड़ी तो किसी ने बाघ से लड़कर अपने बच्चे को बचाया…लोकभवन में कार्यक्रम के दौरान सम्मानित महिलाएं।

लखनऊ। कोई महिला तेंदुए से लड़ी तो कोई बाघ से, मगर अपने बच्चे को बचाने के लिए उन महिलाओं ने बहादुरी से उस स्थिति का सामना किया और आखिरकार उनकी विजय हुई। लखनऊ में गुरुवार को ऐसी ही बहादुर महिलाओं को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाया गया।

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में तेंदुए से अपने 12 साल की बेटी को बचाने वाली यह महिला हैं, सिन्धु कुमारी, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर करीब 15 मिनट तक तेंदुए से बहादुरी से लड़ाई की और तब जाकर अपनी बच्ची को तेंदुए के चंगुल से निकाल पाई।

सिन्धु की तरह 125 से ज्यादा महिलाओं और बेटियों को बहादुरी और अपने क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सिन्धु कुमारी

महिला एवं बाल विकास कल्याण की ओर से हर साल प्रदेश की ऐसी महिलाओं और लड़कियों को चिन्हित किया जाता है, जिन्होंने समाज के हित के लिए लीक से हटकर काम किया हो। इन महिलाओं को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से नवाजा जाता है, इसके अलावा प्रशस्ति पत्र के साथ एक लाख रुपए की धनराशि दी जाती है। इनमें से कुछ महिलाएं ग्राम प्रधान है, तो कुछ महिला किसान हैं। कुछ वो महिलाएं भी हैं, जिन्होंने सरकारी नौकरी करते हुए अपने कार्यक्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है।

सिन्धु की तरह महाराजगंज की पुष्पा ने भी अपनी चार साल की बेटी को बाघ से बचाने पर मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। महिला एवम बाल विकास कल्याण विभाग एवम संस्कृति विभाग के साझा प्रयास से लखनऊ के लोकभवन में रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार एवम बेगम अख्तर पुरस्कार के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि शामिल रहे।

वहीं गोंडा जिले की एक बेटी जूली पाण्डेय (17 वर्ष) ने अपने ही गांव में जल बचाव अभियान शुरू करने के लिए सम्मानित किया गया। दूसरी ओर, एटा जिले की जिन्हैरा ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान लक्ष्मी उपाध्याय ने कहा, “प्रधान बनने के बाद अपनी पंचायत में सबसे पहला काम हर घर में शौचालय हो, इसके लिए गांव वालों को प्रेरित किया। हमारी ग्राम पंचायत ओडीएफ हो चुकी है। हमने सरकार को 10 लाख 80 हजार रुपए वापस कर दिए, क्योंकि हमारे यहां लोगों ने प्रेरित होकर अपने पैसे से शौचालय बनवाए हैं।” लक्ष्मी की तरह 98 महिला ग्राम प्रधानों को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रधान लक्ष्मी उपाध्याय

इस मौके पर महिला एवं बाल विकास कल्याण की कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, “इस समय देश की रक्षामंत्री और विदेश मंत्री जैसे कई सर्वोच्य पदों पर महिलाएं हैं, जो अपनी जिम्मेदारी बखूबी सम्भाल रही हैं। इसी तरह अब महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। ये सरकार महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा सजग है।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछले साल महिला हेल्प लाइन 181 पर 1,47,000 बहनों ने फोन किया था, जिसमें 15,000 बहनों के घर जाकर उनकी बता सुनी गयी। अब हर माँ-बाप अपनी बेटियों को कालेज में बेफिक्र होकर स्कूल भेज पाते हैं क्योंकि इनकी सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड टीम का गठन किया गया।”

इस मौके पर ग्रामीण क्षेत्र से आईं सैकड़ों महिलाओं से मुख्यमंत्री ने कहा, “ये पुरस्कार अपने या पराए के आधार पर नहीं दिया गया, ये पुरस्कार आपकी बहादुरी और मेहनत है। पुरस्कार देने वालों की संख्या हर साल बढ़ती रहेगी, जिससे आप जैसी सैकड़ों महिलाएं आगे आएं। सरकार की जितनी भी योजनाएं चल रही हैं, अगर सही तरीके से पात्रों तक पहुंच जाएं तो अभूतपूर्व परिवर्तन होगा।”

इस कार्यक्रम में बाराबंकी जिले के कुंवर दिव्यांश सिंह (13) को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया क्योंकि उनकी छोटी बहन को साड़ मार रहा था। कुंवर दिव्यांश ने कहा, “साड़ से लड़ते हुए मेरी तीन हड्डियां टूटी गयी थी, तीन महीने से इलाज चला । मुझे उस समय अपनी परवाह नहीं थी, बहन को बचाना ही मेरा मकसद था। तभी मैं घंटो लड़ता रहा, ये सम्मान पाकर आत्मविश्वास बढ़ा है।”

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