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महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए तालुका स्तर की शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया है। अब बीज, खाद और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों की जांच सात दिनों के भीतर पूरी होगी। खेतों का निरीक्षण, पंचनामा और लैब परीक्षण अनिवार्य रहेगा। दोषी कंपनियों और विक्रेताओं के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि अधिक शिकायतों वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त समितियां भी बनाई जाएंगी।
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए तालुका स्तर की शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया है। अब बीज, खाद और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों की जांच सात दिनों के भीतर पूरी होगी। खेतों का निरीक्षण, पंचनामा और लैब परीक्षण अनिवार्य रहेगा। दोषी कंपनियों और विक्रेताओं के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि अधिक शिकायतों वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त समितियां भी बनाई जाएंगी।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खेती में AI और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर ज़ोर देते हुए कहा कि इससे पानी और उर्वरकों की खपत कम होगी तथा फसलों में रोगों की समय रहते पहचान हो सकेगी। विदर्भ में 1,000 संतरा और 5,000 गन्ना किसानों को AI आधारित खेती से जोड़ने की योजना बनाई गई है। किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर खेती को अधिक लाभकारी और वैज्ञानिक बनाने पर फ़ोकस किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खेती में AI और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर ज़ोर देते हुए कहा कि इससे पानी और उर्वरकों की खपत कम होगी तथा फसलों में रोगों की समय रहते पहचान हो सकेगी। विदर्भ में 1,000 संतरा और 5,000 गन्ना किसानों को AI आधारित खेती से जोड़ने की योजना बनाई गई है। किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर खेती को अधिक लाभकारी और वैज्ञानिक बनाने पर फ़ोकस किया जाएगा।
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देश में चीनी की कीमतों में जुलाई के दौरान करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। उत्पादन घटने, कमज़ोर गन्ना फसल, निर्यात और एथेनॉल डायवर्जन से स्टॉक पर दबाव बना है। चालू सीज़न के अंत में शुरुआती स्टॉक 33–35 लाख टन तक सिमट सकता है। हालांकि ISMA और NFCSF का कहना है कि फिलहाल देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और जमाखोरी या घबराकर खरीदारी की आवश्यकता नहीं है। उद्योग ने समय से पेराई शुरू कर आपूर्ति बनाए रखने का भरोसा दिया है।
देश में चीनी की कीमतों में जुलाई के दौरान करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। उत्पादन घटने, कमज़ोर गन्ना फसल, निर्यात और एथेनॉल डायवर्जन से स्टॉक पर दबाव बना है। चालू सीज़न के अंत में शुरुआती स्टॉक 33–35 लाख टन तक सिमट सकता है। हालांकि ISMA और NFCSF का कहना है कि फिलहाल देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और जमाखोरी या घबराकर खरीदारी की आवश्यकता नहीं है। उद्योग ने समय से पेराई शुरू कर आपूर्ति बनाए रखने का भरोसा दिया है।
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उत्तर प्रदेश सरकार 'भूजल सप्ताह-2026' के तहत जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को जन आंदोलन बनाने के लिए अभियान चला रही है। 'जल-संवाद' कार्यक्रम में सहजन के बीज और स्कोरिया ज्वालामुखीय चट्टान से पानी शुद्ध करने की तकनीक पर चर्चा हुई। आरओ सिस्टम से निकलने वाले अपशिष्ट जल को बचाने के लिए इस तकनीक पर शोध, प्रोटोटाइप और परीक्षण की तैयारी की जा रही है। साथ ही वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और जनभागीदारी को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार 'भूजल सप्ताह-2026' के तहत जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को जन आंदोलन बनाने के लिए अभियान चला रही है। 'जल-संवाद' कार्यक्रम में सहजन के बीज और स्कोरिया ज्वालामुखीय चट्टान से पानी शुद्ध करने की तकनीक पर चर्चा हुई। आरओ सिस्टम से निकलने वाले अपशिष्ट जल को बचाने के लिए इस तकनीक पर शोध, प्रोटोटाइप और परीक्षण की तैयारी की जा रही है। साथ ही वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और जनभागीदारी को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
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जलवायु परिवर्तन के कारण भारतीय कृषि के सामने जल संकट और अनियमित मौसम जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। ऐसे में जलवायु-स्मार्ट कृषि टिकाऊ खेती का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए कम पानी में बेहतर उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ज़ोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेती को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक मज़बूत बनाए रखना है।
जलवायु परिवर्तन के कारण भारतीय कृषि के सामने जल संकट और अनियमित मौसम जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। ऐसे में जलवायु-स्मार्ट कृषि टिकाऊ खेती का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए कम पानी में बेहतर उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ज़ोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेती को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक मज़बूत बनाए रखना है।
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उत्तर प्रदेश में पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत वन विभाग 18 से 27 जुलाई के बीच चार विशिष्ट वन स्थापित करेगा। इसके तहत 18 जुलाई को समृद्धि वन, 21 जुलाई को कपि वन, 23 जुलाई को ऊर्जा वन और 27 जुलाई को समरस वन विकसित किए जाएंगे। इन वनों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, मानव-वानर संघर्ष कम करना, जलाऊ लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। अभियान में कृषि, ग्राम्य विकास, पंचायती राज और समाज कल्याण विभाग भी सहयोग करेंगे।
उत्तर प्रदेश में पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत वन विभाग 18 से 27 जुलाई के बीच चार विशिष्ट वन स्थापित करेगा। इसके तहत 18 जुलाई को समृद्धि वन, 21 जुलाई को कपि वन, 23 जुलाई को ऊर्जा वन और 27 जुलाई को समरस वन विकसित किए जाएंगे। इन वनों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, मानव-वानर संघर्ष कम करना, जलाऊ लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। अभियान में कृषि, ग्राम्य विकास, पंचायती राज और समाज कल्याण विभाग भी सहयोग करेंगे।
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भारत से साबुत इलायची का निर्यात पिछले दो वर्षों में मूल्य के लिहाज से तीन गुना से अधिक बढ़कर 436.8 मिलियन डॉलर (करीब 4,300 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में निर्यात मात्रा बढ़कर 16,399 टन हो गई। भारतीय इलायची की बेहतर गुणवत्ता, सुगंध और शुद्धता के कारण वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। यूएई, सऊदी अरब और बांग्लादेश इसके प्रमुख खरीदार हैं, जबकि केरल देश में छोटी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
भारत से साबुत इलायची का निर्यात पिछले दो वर्षों में मूल्य के लिहाज से तीन गुना से अधिक बढ़कर 436.8 मिलियन डॉलर (करीब 4,300 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में निर्यात मात्रा बढ़कर 16,399 टन हो गई। भारतीय इलायची की बेहतर गुणवत्ता, सुगंध और शुद्धता के कारण वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। यूएई, सऊदी अरब और बांग्लादेश इसके प्रमुख खरीदार हैं, जबकि केरल देश में छोटी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दौरान अपने भाषण में मुर्रा भैंस का ज़िक्र किया। इसके बाद यह नस्ल फिर चर्चा में आ गई। हरियाणा की पहचान मानी जाने वाली मुर्रा भैंस को भारतीय डेयरी सेक्टर में 'ब्लैक गोल्ड' यानी 'काला सोना' कहा जाता है। देश ही नहीं, विदेशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। आखिर इस नस्ल में ऐसी क्या खासियत है कि पशुपालक इसके लिए लाखों रुपये तक खर्च करने को तैयार रहते हैं? आइए जानते हैं कि मुर्रा भैंस क्यों इतनी खास मानी जाती है, इसकी पहचान कैसे करें और यह किसानों के लिए कमाई का बड़ा ज़रिया कैसे बनी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दौरान अपने भाषण में मुर्रा भैंस का ज़िक्र किया। इसके बाद यह नस्ल फिर चर्चा में आ गई। हरियाणा की पहचान मानी जाने वाली मुर्रा भैंस को भारतीय डेयरी सेक्टर में 'ब्लैक गोल्ड' यानी 'काला सोना' कहा जाता है। देश ही नहीं, विदेशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। आखिर इस नस्ल में ऐसी क्या खासियत है कि पशुपालक इसके लिए लाखों रुपये तक खर्च करने को तैयार रहते हैं? आइए जानते हैं कि मुर्रा भैंस क्यों इतनी खास मानी जाती है, इसकी पहचान कैसे करें और यह किसानों के लिए कमाई का बड़ा ज़रिया कैसे बनी हुई है।
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अगस्त 2026 के अंत तक प्रशांत महासागर में शक्तिशाली अल नीनो विकसित होने की संभावना जताई गई है। विश्लेषण के अनुसार, नया MLR-ARX मॉडल पारंपरिक मॉडलों से पहले इस बदलाव का संकेत दे रहा है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे का खतरा बढ़ सकता है। इससे चीनी, कोको, पाम ऑयल समेत कई फसलों का उत्पादन प्रभावित होने और वैश्विक खाद्य, ऊर्जा तथा कमोडिटी बाज़ार पर असर पड़ने की आशंका है।
अगस्त 2026 के अंत तक प्रशांत महासागर में शक्तिशाली अल नीनो विकसित होने की संभावना जताई गई है। विश्लेषण के अनुसार, नया MLR-ARX मॉडल पारंपरिक मॉडलों से पहले इस बदलाव का संकेत दे रहा है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे का खतरा बढ़ सकता है। इससे चीनी, कोको, पाम ऑयल समेत कई फसलों का उत्पादन प्रभावित होने और वैश्विक खाद्य, ऊर्जा तथा कमोडिटी बाज़ार पर असर पड़ने की आशंका है।
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भारत से चावल के निर्यात की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत चावल का रिज़र्व मूल्य बढ़ाना और कमज़ोर मानसून के कारण धान की बुआई में आई गिरावट है। वहीं, बांग्लादेश में बाढ़ से फसल प्रभावित हुई है, जबकि थाईलैंड और वियतनाम में मांग सुस्त बनी हुई है। कारोबारियों को अल नीनो के संभावित असर से इस वर्ष के अंत में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
भारत से चावल के निर्यात की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत चावल का रिज़र्व मूल्य बढ़ाना और कमज़ोर मानसून के कारण धान की बुआई में आई गिरावट है। वहीं, बांग्लादेश में बाढ़ से फसल प्रभावित हुई है, जबकि थाईलैंड और वियतनाम में मांग सुस्त बनी हुई है। कारोबारियों को अल नीनो के संभावित असर से इस वर्ष के अंत में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।