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पूसा कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बढ़ती गर्मी के मद्देनज़र खेतों में तैयार खड़ी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में हल्की सिंचाई, फसलों में उचित दवा के छिड़काव की जानकारी के साथ किन फसलों में क्या रोग लग सकता है, इन सब जानकारी दी है। सभी किसान बहन-भाई ध्यान दें और अपनी फसलों को बढ़ते तापमान के नुकसान से बचाएँ।
पूसा कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बढ़ती गर्मी के मद्देनज़र खेतों में तैयार खड़ी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में हल्की सिंचाई, फसलों में उचित दवा के छिड़काव की जानकारी के साथ किन फसलों में क्या रोग लग सकता है, इन सब जानकारी दी है। सभी किसान बहन-भाई ध्यान दें और अपनी फसलों को बढ़ते तापमान के नुकसान से बचाएँ।
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लखनऊ में पहली बार दो दिवसीय ‘मीन महोत्सव’ का आगाज़ शुक्रवार से होने जा रहा है। यह उत्सव मत्स्य पालन को नए आयाम देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। देश के अलग–अलग राज्यों से आए वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, स्टार्टअप उद्यमी और अनुभवी मत्स्य किसान अपने अनुभव और तकनीक साझा करेंगे। जानिए तारीख और जगह।
लखनऊ में पहली बार दो दिवसीय ‘मीन महोत्सव’ का आगाज़ शुक्रवार से होने जा रहा है। यह उत्सव मत्स्य पालन को नए आयाम देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। देश के अलग–अलग राज्यों से आए वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, स्टार्टअप उद्यमी और अनुभवी मत्स्य किसान अपने अनुभव और तकनीक साझा करेंगे। जानिए तारीख और जगह।
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कर्नाटक के विजयपुरा के नींबू किसानों की जिंदगी में नया मोड़ आया है। ICAR द्वारा विकसित ‘अर्का सिट्रस स्पेशल’ तकनीक अपनाने से न केवल फसल की पैदावार बढ़ी है, बल्कि किसानों की आमदनी भी पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। यह उन्नत तकनीक कम उपजाऊ मिट्टी और सीमित पानी जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करती है। ICAR के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने कागजी नींबू की खेती को न सिर्फ अधिक उपज और आय वाला व्यवसाय बनाया है, बल्कि इसे पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ और किसान के अनुकूल भी साबित किया है । एक उदाहरण जो अन्य बागवानी फसलों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
कर्नाटक के विजयपुरा के नींबू किसानों की जिंदगी में नया मोड़ आया है। ICAR द्वारा विकसित ‘अर्का सिट्रस स्पेशल’ तकनीक अपनाने से न केवल फसल की पैदावार बढ़ी है, बल्कि किसानों की आमदनी भी पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। यह उन्नत तकनीक कम उपजाऊ मिट्टी और सीमित पानी जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करती है। ICAR के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने कागजी नींबू की खेती को न सिर्फ अधिक उपज और आय वाला व्यवसाय बनाया है, बल्कि इसे पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ और किसान के अनुकूल भी साबित किया है । एक उदाहरण जो अन्य बागवानी फसलों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
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केंद्र सरकार 14 साल की किशोरियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा के लिए एक बड़े टीकाकरण अभियान की तैयारी कर रही है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन निशुल्क दी जाएगी। अनुमान है कि इस पहल से करीब 1.15 करोड़ लड़कियों को फायदा होगा। जानिए पहले टीकाकरण किस राज्य से शुरू हो रहा है और कब ?
केंद्र सरकार 14 साल की किशोरियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा के लिए एक बड़े टीकाकरण अभियान की तैयारी कर रही है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन निशुल्क दी जाएगी। अनुमान है कि इस पहल से करीब 1.15 करोड़ लड़कियों को फायदा होगा। जानिए पहले टीकाकरण किस राज्य से शुरू हो रहा है और कब ?
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एफएसएसएआई ने चेतावनी दी है कि फलों और सब्जियों पर लगे स्टीकर और उन्हें चिपकाने वाला गोंद सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। ऐसे में इनको केवल धोकर खाने के बजाय छीलकर खाना ज़्यादा सुरक्षित माना गया है।
एफएसएसएआई ने चेतावनी दी है कि फलों और सब्जियों पर लगे स्टीकर और उन्हें चिपकाने वाला गोंद सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। ऐसे में इनको केवल धोकर खाने के बजाय छीलकर खाना ज़्यादा सुरक्षित माना गया है।
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1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में मिलने वाला पेट्रोल E20 ग्रेड का होगा यानी इसमें 20% एथेनॉल और बाकी पारंपरिक पेट्रोल होगा, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर 95 तय किया गया है।एथेनॉल देश में ही बनने वाला नवीकरणीय ईंधन है, जिससे गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ती है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में चेतावनी दी गई है कि अगर मक्का की खेती जरूरत से ज्यादा बढ़ी और उसने दालों व तिलहनों की जगह ली, तो खाद्य सुरक्षा से जुड़ा जोखिम भी पैदा हो सकता है।
1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में मिलने वाला पेट्रोल E20 ग्रेड का होगा यानी इसमें 20% एथेनॉल और बाकी पारंपरिक पेट्रोल होगा, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर 95 तय किया गया है।एथेनॉल देश में ही बनने वाला नवीकरणीय ईंधन है, जिससे गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ती है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में चेतावनी दी गई है कि अगर मक्का की खेती जरूरत से ज्यादा बढ़ी और उसने दालों व तिलहनों की जगह ली, तो खाद्य सुरक्षा से जुड़ा जोखिम भी पैदा हो सकता है।
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देश के मौसम में तेज़ी से बदलाव जारी है। कई राज्यों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अगले 24 घंटों में मैदानी इलाकों का तापमान 35 से 38 डिग्री पहुँच सकता है, जबकि हिमालयी एवं पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश व बर्फबारी की आशंका बनी हुई है। जानिए किस राज्य के मौसम का क्या है हाल?
देश के मौसम में तेज़ी से बदलाव जारी है। कई राज्यों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अगले 24 घंटों में मैदानी इलाकों का तापमान 35 से 38 डिग्री पहुँच सकता है, जबकि हिमालयी एवं पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश व बर्फबारी की आशंका बनी हुई है। जानिए किस राज्य के मौसम का क्या है हाल?
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अब किसान की लिखित सहमति के बिना कोई भी चीनी मिल गन्ना आपूर्ति पर्ची पर दर्ज प्रजाति को डिग्रेड करके तौल नहीं कर सकेगी। गन्ना विभाग ने साफ कहा है कि ऐसा करना नियमों के खिलाफ है और शिकायत मिलने पर संबंधित मिल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अगर ऐसा होता है तो विभागीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत इसकी शिकायत करें। पढ़िए पूरा मामला और जानें कौनसा है शिकायत हेल्पलाइन नंबर।
अब किसान की लिखित सहमति के बिना कोई भी चीनी मिल गन्ना आपूर्ति पर्ची पर दर्ज प्रजाति को डिग्रेड करके तौल नहीं कर सकेगी। गन्ना विभाग ने साफ कहा है कि ऐसा करना नियमों के खिलाफ है और शिकायत मिलने पर संबंधित मिल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अगर ऐसा होता है तो विभागीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत इसकी शिकायत करें। पढ़िए पूरा मामला और जानें कौनसा है शिकायत हेल्पलाइन नंबर।
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जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम का मिजाज आजकल बिल्कुल बदल गया है। कभी तो अचानक गर्मी से हाल बेहाल हो जाता है, तो कभी ठंड या बारिश का मौसम अपनी चाल बदल लेता है। इसका सीधा और बुरा असर हमारे पशुधन, खासकर डेयरी गाय-भैंसों के दूध देने की क्षमता पर पड़ रहा है। ऐसे में पशुओं के लिए बढ़ते तापमान में खास इंतजाम करने चाहिए। पशु के हीट साइकल की पूरी जानकारी होना आवश्यक है, अन्यथा पशु बीमार हो सकता है। जानिए कैसे करें चारे से लेकर कई तरह के बदलाव।
जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम का मिजाज आजकल बिल्कुल बदल गया है। कभी तो अचानक गर्मी से हाल बेहाल हो जाता है, तो कभी ठंड या बारिश का मौसम अपनी चाल बदल लेता है। इसका सीधा और बुरा असर हमारे पशुधन, खासकर डेयरी गाय-भैंसों के दूध देने की क्षमता पर पड़ रहा है। ऐसे में पशुओं के लिए बढ़ते तापमान में खास इंतजाम करने चाहिए। पशु के हीट साइकल की पूरी जानकारी होना आवश्यक है, अन्यथा पशु बीमार हो सकता है। जानिए कैसे करें चारे से लेकर कई तरह के बदलाव।
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भारत सरकार ने समुद्री खाद्य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इस उद्देश्य से मछुआरों को विशेष आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निःशुल्क राष्ट्रीय पास, आधुनिक नौकाएं और ठंडा भंडारण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
भारत सरकार ने समुद्री खाद्य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इस उद्देश्य से मछुआरों को विशेष आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निःशुल्क राष्ट्रीय पास, आधुनिक नौकाएं और ठंडा भंडारण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।