जैविक गुड़ बनाकर एक एकड़ गन्ने से कमा रहे डेढ़ से ढाई लाख रुपए मुनाफा

जैविक गुड़ बनाकर एक एकड़ गन्ने से कमा रहे डेढ़ से ढाई लाख रुपए मुनाफामध्यप्रदेश के इस जैविक गुड़ की मांग है विदेशों में 

गुड़ के शौकीन लोगों को अगर जैविक गुड़ का स्वाद चखना है तो मध्यप्रदेश के इस किसान का गुड़ जरूर खाएं। जो न सिर्फ स्वादिष्ट जैविक गुड़ बना रहे हैं बल्कि इससे अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं।

नरसिंहपुर (मध्यप्रदेश)। कई ऐसे गन्ना किसान हैं जो अपनी फसल के लिए मेहनत तो बहुत करते हैं लेकिन उन्हें उसका उचित दाम नहीं मिलता। ऐसे किसान जो गन्ने की खेती को घाटे का सौदा मान रहे हैं, वो मध्यप्रदेश के इस किसान से जरूर मिलें। जिसने बाजार में सीधे गन्ना न बेचकर उसके जैविक उत्पाद बनाकर बेचना शुरू किया, जिससे वो एक एकड़ में डेढ़ से ढाई लाख रुपए कमा रहे हैं। पिछले साल उन्होंने 14 एकड़ गन्ने का गुड़ बेचकर 20 लाख रुपए से ज्यादा का मुनाफा कमाया था।

मध्यप्रदेश के किसान राकेश दुबे गन्ने की खेती करने वाले अपने क्षेत्र के सफल किसानों में से एक हैं। जो पिछले 20 साल से गन्ने की खेती कर रहे हैं। इनके पास 40 एकड़ खेत है जिसमें 25 से 30 एकड़ में ये हर साल गन्ने की खेती करते हैं। राकेश दुबे गन्ने की खेती का अपना 20 साल का अनुभव साझा करते हुते बताते हैं, “गन्ना किसानों को बाजार में गन्ने का न तो सही भाव मिलता है और न ही समय से पैसा मिलता है। इसलिए हमारे जिले के किसान ज्यादातर गन्ने का उत्पाद बनाकर ही बेचते हैं। मैंने ये काम बड़े पैमाने पर जैविक तरीके से करना शुरू कर दिया है।”

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नरसिंहपुर में बनता जैविक गुड़

उनका कहना है, “जैविक गन्ने में लागत कम आती है, जैविक गुड़ का भाव अच्चा मिलता है। गन्ने की फसल के साथ सहफसल में गेंहूँ, चना, मटर, लहसुन, राजमा की फसलें इतना उत्पादन दे देती हैं जिससे उस साल की पूरी लागत निकल आती है। पिछले साल 14 एकड़ गन्ने में 20 लाख से ज्यादा मुनाफा कमाया था।” नरसिंहपुर में राकेश दुबे ही तरह कई किसान है जो जैविक गुड़ बनाकर अच्छा उत्पादन ले रहे हैं।

देखें राकेश दुबे का वीडियो-

नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर करताज गाँव के रहने वाले राकेश दुबे वर्ष 1994 से गन्ने का गुड़ बनाकर बेच रहे थे। जब ये रासायनिक खेती से जैविक खेती की तरफ बढ़े तो इन्होंने वर्ष 2014 से जैविक गुड़ बनाने की शुरुआत चार एकड़ से कर दी।

राकेश बताते हैं, “उस समय जब रासायनिक गुड़ बाजार में 18 रुपए में था उस समय मेरा गुड़ 32 रुपए किलो बिका। लोगों ने पहली साल हमें जैविक गुड़ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। पिछले साल हमने 14 एकड़ का जैविक गुड़ 430 कुंतल बनाया था जिसमें दो से ढाई लाख रुपए प्रति एकड़ का इजाफा हुआ था। इस साल मैं 28 एकड़ का जैविक गुड़ बनाऊंगा।” वह बताते हैं कि एक कुंतल गन्ने से 13 किलो जैविक गुड़ बनता है।

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राकेश दुबे बरसात में गन्ने का सिरका भी बनाते हैं

वो आगे बताते हैं, “मेरे बनाए जैविक गुड़ की मांग पूरे भारत में होती हैं। अगले महीने दुबई और श्रीलंका में गुड़ जाएगा। इस समय गुड़ का भाव अगर कोई 10 किलो का पैकेट लेता है तो 65 रुपए किलो है, फुटकर 72 रुपए किलो है। गुड़ के अलावा चीनी, राब (सीरा गुड़), बरसात में सिरका भी बनाते हैं।”

राकेश ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी 40 एकड़ जमीन में से 35 एकड़ जमीन को पूरी तरह से जैविक तरीके से करना शुरू कर दिया है। जिसमें 28 एकड़ गन्ना है। इन्होंने गन्ने की पौध नर्सरी तरीके से बुआई करके एक एकड़ में 30 से 40 कुंतल बीज की बजाए दो से ढाई कुंतल बीज से अच्छा उत्पादन लिया है।

और भी किसान कर रहे हैं जैविक गुड़ का उत्पादन

राकेश की तरह चौधरी हरेन्द्र सिंह एवम चौधरी भूपेन्द्र सिंह 16 एकड़ गन्ने से जैविक गुड़ बनाकर अच्छा उत्पादन ले रहे हैं। वहीं, नरसिंहपुर के गन्ना किसान चौधरी हरेन्द्र सिंह का कहना है, “पिछले डेढ़ साल से मैं साकेत संस्था से जुड़ा हूँ, जो जैविक खेती पर ट्रेनिंग देती हैं। पिछले साल मैंने जैविक गुड़ बनाकर 60 रुपए किलो में बेचा था, उम्मीद है इस साल 100 रुपए किलो से ज्यादा बिकेगा। इस गुड़ में आंवला, हर्र, पुदीना, अदरक, सोंठ जैसी कई चीजें डालते हैं।”

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कुशल मंगल नाम से प्रसिद्ध है ये जैविक गुड़

साधारण किसान भी कर सकता है जैविक गुड़ बनाने की शुरुआत

एक पेराई की मशीन लगाने में 10 लाख रुपए का खर्चा आता है। इसे कई किसान मिलकर लगा सकते हैं, या फिर लोन लेकर भी इसे लगाया जा सकता है। राकेश बताते हैं, “मैंने एक फॉर्मर प्रोड्यूसर कम्पनी बनाई है जिसमें 22 किसान है। अब ये किसान भी जैविक गन्ने के उत्पादन के साथ ही जैविक गुड़ बनाने की शुरुवात कर चुके हैं। इसमे सबसे ज्यादा ध्यान देने की एक ही बात है, मार्केटिंग किसान को खुद करनी पड़ेगी तभी उसे अच्छा लाभ मिल सकता है।” वो आगे बताते हैं, “अगर आप उत्पाडी बड़े पैमाने पर बनाना शुरू करते हैं तो आप अपने गांव के कई लोगों को रोजगार भी मुहैया करायेंगे। गांव के लोगों को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।”

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ये है देशी राब (सीरा वाला गुड़)

कुशल मंगल नाम से है प्रसिद्ध

इनके जैविक गुड़ का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में पिछले साल लगे कृषि मेले में इनके गुड़ की खूब मांग बढ़ी थी। कस्टम एजेंट की मदद से भी राकेश दुबे के गुड़ की मांग विदेशों में बढ़ी है। ये गुड़ ऑनलाइन अमेज़न पर भी उपलब्ध है, कार्गो सर्विस पोस्टल सर्विस, कोरियर ट्रांसपोर्ट के द्वारा दूसरे स्टेट में ये गुड़ भेजा जाता है।

राकेश बताते हैं, “एक एकड़ में जैविक गुड़ 30 से 35 कुंतल निकलता है जबकि रासायनिक गुड़ 50 से 60 कुंतल निकलता है। जैविक गुड़ की मार्केटिंग खुद करनी पड़ती है, भाव अच्छा मिलने से मुनाफा ज्यादा होता है। जैविक गन्ने की लागत भी कम आती है।” अभी सबसे ज्यादा इनका गुड़ चंडीगढ़ जाता है, हैदराबाद, जयपुर, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान में भी इसकी मांग है।

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ऐसे बनती है देशी राब

राकेश को कई अवार्ड से किया जा चुका है सम्मानित

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2016 के लिए गन्ने की नर्सरी पद्यति के इनोवेशन के लिए जैविक खेती के लिए राकेश दुबे को ‘कृषक फेलो अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान इन्हें गन्ना में बीज की लागत मूल्य कम करने के प्रयासों, जैविक उत्पादों के उपयोग एव गुड़ उत्पाद की गुणवत्ता सुधार के लिए दिया गया है।

जवाहर लाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा ‘कृषक फेलो सम्मान 2016 प्रदान किया गया, यह सम्मान गन्ना में बीज की लागत मूल्य कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों, जैविक उत्पादों के उपयोग एव गुड़ उत्पाद की गुणवत्ता सुधार के लिए दिया गया।

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गन्ने की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए इन्हें किया जा चुका है सम्मानित

वर्ष 2017 में आत्मा परियोजना के अंतर्गत इन्हें गन्ने की जैविक खेती व पौध रोपण की नई तकनीकी को विकसित करने के लिए सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा राकेश को किसान मेला सह-प्रदर्शनी में जैविक खेती को व्यापारिक स्वरूप प्रदान करने के लिए ‘कृषि उदय सम्मान’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय कृषि मेला 2017 में जैविक गुड़ के स्टाल को ‘उत्कृष्ट स्टाल’ से भी सम्मानित किया गया है। सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए इफको के 50 वें स्थापना दिवस पर डॉ. उदयशंकर अवस्थी प्रबंध निर्देशक द्वारा इन्हें सम्मानित किया गया।

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जैविक गुड़ की ऐसे होती है पैकेजिंग

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