गेहूं उत्पादन में कृषि कर्मण पुरस्कार जिस राज्य को मिला उसका नाम सुन आप चौंक जाएंगे

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   18 March 2018 6:07 PM GMT

गेहूं उत्पादन में कृषि कर्मण पुरस्कार जिस राज्य को मिला उसका नाम सुन आप चौंक जाएंगेगेहूं। फाइल फोटो

नई दिल्ली। अगर आप से पूछा जाए कि गेहूं का उत्पादन किस राज्य में सबसे अधिक होता है तो बिना ज्यादा सोचे आप पंजाब, हरियाणा या उत्तर प्रदेश का नाम लेंगे। इस बार मध्य प्रदेश को गेहूं उत्पादन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए वर्ष 2015-16 का कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया। मध्य प्रदेश में गेहूं उत्पादन में वर्ष 2014-15 के मुकाबले वर्ष 2015-16 में 7.64 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।

पंजाब जहां गेहूं की खेती के लिए जाना जाता है, इस बार पंजाब को गेहूं के बजाय चावल की बेहतरीन खेती के लिए व अनाज की पैदावार में विस्तार करने के लिए साल 2015-16 का कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया। कुल खाद्यान्न की पैदावार करने वाले बड़े राज्यों में तमिलनाडु ने सबको पछाड़ दिया है।

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा के परिसर में कृषि उन्नति मेले (16 से 18 मार्च, 2018) का आयोजन किया गया। इस मेले का उद्देश्य आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रति लोगों को जागरुक करना तथा किसानों की प्रतिक्रिया जानना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मेले में कृषि कर्मण पुरस्कार तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया।

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केंद्र सरकार की तरफ से देश की अन्न पैदावार बढ़ाने के क्षेत्र में हर वर्ष दिया जाने वाला कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त करने वाले राज्य को 2 करोड़ रुपए की राशि के साथ-साथ एक स्मृति चिन्ह और ताम्रपत्र दिया जाता है। यह पुरस्कार अनाज पैदावार में बेहतरीन कारगुजारी के साथ-साथ गेहूं, चावल, दालें और मोटे अनाज की पैदावार में अग्रणी रहने वाले सूबों को भी दिया जाता है।

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गेहूं उत्पादन के लिए मध्य प्रदेश को कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया। मध्य प्रदेश में वर्ष 2014-15 में 171.03 लाख टन गेहूं उत्पादन हुआ था, जो 2015-16 में बढ़कर 184.10 लाख टन हो गया है। प्रदेश में गेहूं की उत्पादकता बढ़कर 3115 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। गत वर्ष यह 2850 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों, कृषि विभाग के सभी अधिकारियों और कृषि विकास से जुड़ी सभी संस्थाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

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चावल की बेहतरीन व अनाज की पैदावार में विस्तार करने के लिए पुरस्कार ग्रहण करने के बाद पंजाब के ग्रामीण विकास व पंचायत मंत्री स. तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने कहा कि कृषि सेक्टर देश में कोई लाभदायक सेक्टर नहीं है क्योंकि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का फैसला अब भी पुराने फार्मूले के आधार पर किया जाता है। पंजाब में दूसरे राज्यों के मुकाबले कृषि पर लागत अधिक आती है, जिसका केंद्रीय कमीशन की तरफ से न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के अवसर पर ध्यान नहीं रखा जाता।

बाजवा ने साथ ही कहा कि सूखे के मायने भी पंजाब में अलग हैं और फसलों की सिंचाई पर दूसरे सूबों के मुकाबले अधिक खर्चा आता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अन्य भी बहुत से पहलू हैं जिनको फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करते समय केंद्रीय कमीशन को ध्यान में रखना चाहिए।

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  • पंजाब ग्रामीण विकास व पंचायत मंत्री राजिन्दर सिंह बाजवा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांगें जानिए
  • स्वामीनाथन रिपोर्ट को संपूर्णता से लागू किया जाए।
  • फसलीय विविधता को कामयाब करने के लिए मार्केटिंग संबंधी राष्ट्रीय नीति बनाने की जरूरत है तभी
  • देश में कृषि विविधता सफल हो सकती है, विशेषकर यह पंजाब के लिए तो बहुत ही अधिक अपेक्षित है।
  • पंजाब में कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्याएं कर रहे किसानों के लिए कर्ज मुक्ति स्कीम का ऐलान हो।
  • पंजाब में फव्वारा व बूंद सिंचाई प्रणाली को और फैलाएं।
  • सदियों पुराने नहरी प्रबंध के नवीनीकरण के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता देने की अपील।

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बाजवा ने कहा कि पंजाबियों ने तो देश का पेट भरने के लिए अपना वातावरण और मिट्टी को भी जहर बना लिया है, परंतु केंद्र द्वारा पंजाब के किसानों की इस मुसीबत की घड़ी में कोई मदद नहीं की जा रही, भू-जल स्तर दिन प्रतिदिन तेजी से गिरने के कारण पंजाब की धरती बंजर होने के कगार पर खड़ी है, इसके बावजूद केंद्र का पंजाब के प्रति ऐसा व्यवहार बहुत ही निंदनीय है।

पंजाब ने कृषि कर्मन पुरस्कार 2013-14, 2012-13, 2011-12 और 2010-11 में भी प्राप्त किया था।

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