बीमा कंपनी और बैंक के चक्कर में लुट गए किसान

बीमा कंपनी और बैंक के चक्कर में लुट गए किसानफसल बीमा योजना के तहत किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर किसानों में रोष है।

स्वयं प्रोजेट डेस्क

गोरखपुर। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर फसल बीमा योजना के तहत किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर किसानों में रोष है। बता दें कि विभिन्न बैंकों की ओर से किसानों की फसलों का बीमा होता है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में किसानों को फौरी मदद मिल सके।

किसानों के मुताबिक विभिन्न इलाकों में आपदा की रिपोर्ट के बावजूद बैंक व बीमा कंपनी ने उनकी आंख में धूल झोंककर लाखों रुपए का चूना लगा दिया। वे बैंक व बीमा कंपनी का चक्कर लगाते-लगाते थक-हारकर घर बैठ गए हैं लेकिन उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिल रहा है।

बड़हलगंज ब्लॉक के खड़ेसरी निवासी शिवाकांत तिवारी (65 वर्ष) ने बताया, “बैंक की ओर से केसीसी के माध्यम से हर साल बीमा के प्रीमियम की धनराशि काट ली जाती है, लेकिन सूखा पड़ने के बावजूद कोई मदद नहीं मिलती है। यह अन्याय बैंक व बीमा कंपनी की मिलीभगत से हो रहा है। बैंक में जाने पर कोई सुनवाई नहीं होती है।”

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दरअसल, किसानों को केसीसी जारी होते ही रबी और खरीफ की फसल के दौरान बैंक के मानक पर खरे उतरने वाले किसानों की फसल का बीमा कराया जाता है। इसका प्रीमियम बैंक की ओर से आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनी को भेजा जाता है। इस साल ओलावृष्टि और सूखे से फसल की बर्बादी के बावजूद किसानों को बीमा का लाभ नहीं दिया गया है। किसानों का आरोप है कि बैंक व बीमा कंपनी की मिलीभगत से इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बड़हलगंज ब्लॉक के खड़ेसरी निवासी प्रदुम्न तिवारी (55 वर्ष) ने बताया, “बैंकों की मनमानी के चलते किसानों को काफी परेशानियों का समाना करना पड़ रहा है, बीमा कंपनी को प्रीमियम देने के बावजूद इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है, शिकायत करने पर कोई ध्यान नहीं देता है। किसानों के हित के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।”

पाली ब्लॉक के चुरियरा निवासी मुन्नेलाल चौरसिया (45 वर्ष) ने बताया, “किसानों की कहीं कोई सुनवाई नहीं होती, बैंक व बीमा कंपनी वालों को किसानों के हित से कोई मतलब नहीं है। प्रशासन भी इनकी नकेल नहीं कस पाता है। किसान परेशान हैं, ऐसे फसल बीमा से क्या फायदा कि उसका लाभ ही नहीं मिले।”

बड़हलगंज ब्लॉक के दुबौली निवासी दिनेश दुबे (45 वर्ष) ने बताया, “बीमा के लिए बैंक वाले प्रीमियम की धनराशि काट लेते हैं, लेकिन आपदा पड़ने पर तहसील की रिपोर्ट का हवाला दिया जाता है, तो टरकाने लगते हैं। ऐसे में बैंक व बीमा कंपनी की मिलीभगत से किसानों के हित के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

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बैंक व बीमा कंपनी मालामाल हो रहे हैं।” वहीं पाली ब्लॉक के नेवास निवासी बलराम तिवारी (65 वर्ष) ने बताया, “केसीसी के माध्यम से बीमा के नाम पर प्रीमियम की धनराशि काट ली जाती है, लेकिन आपदा पडऩे पर किसानों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। किसान बैंक का चक्कर लगाकर परेशान हैं पर उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिल रहा है।”

मुख्य महाप्रबंधक एसबीआई आरके सिंह ने बताया, फिलहाल मैं टूर पर हूं, 12 जून को वापस आऊंगा। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। किसानों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। जांच कराई जाएगी, दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैंक व बीमा कंपनी की जवाबदेही तय होगी।

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