सरकार से पैसे मिलने के लालच में बनवाया शौचालय, आज भी खुले में जाते हैं शौच

सरकार से पैसे मिलने के लालच में बनवाया शौचालय, आज भी खुले में जाते हैं शौचप्रतीकात्मक तस्वीर।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कानपुर। एक ओर जहां सरकार देश के सभी गाँवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने की कोशिश कर रही है और लोगों को शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। इसके बावजूद लोगों की मानसिकता में कोई परिवर्तन नहीं आ रहा है और न ही लोग खुले में शौच जाना बंद कर रहे हैं।

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बिधनू ब्लॉक के मगरासर गाँव के निवासी सुखवासा देवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विनोद अग्निहोत्री बताते हैं, “आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो घर में बनाए गए शौचालय का प्रयोग नहीं करते हैं और सुबह-सुबह खुले में ही शौच के लिए जाते हैं। वह कहते हैं कि मानसिकता धीरे-धीरे बदल रही है और कुछ हद तक बदलाव भी आया है, लेकिन फिर भी अभी खुले में शौच जाने वालों की बड़ी संख्या है। बहुत से लोगों ने तो शौचालय केवल इसलिए बनवा लिए थे कि सरकार 12,000 रुपए दे रही थी, लेकिन शायद उनको इस बात की जानकारी नहीं है की खुले में शौच जाने से क्या क्या नुकसान है।”

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इसी गाँव के निवासी जगत नारायण (70 वर्ष) कहते हैं, “घर पर शौचालय बहू-बेटियों के लिए बनाया गया है और सरकार अगर किसी काम को करने के पैसे दे रही है और दूसरे ले रहे हैं हम क्यों न लें।” आज लोगों के लिए शौचालय निर्माण का महत्व केवल और केवल सरकारी अनुदान प्राप्त करने के लिए है। बहुत से लोग तो यह भी नहीं जानते हैं कि यह राशि उनको शौचालय निर्माण के लिए नहीं मिलती। यह राशि उनको पुरस्कार स्वरूप दी जाती है वह भी इसलिए कि उन्होंने अपने परिवार और अपना ध्यान रखते हुए अपने घर में शौचालय का निर्माण कराया है।

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कानपुर नगर के जिला पंचायतीराज अधिकारी डॉ. निरीश चंद्र साहू बताते हैं, “अभी भी ऐसे लोगों की संख्या काफी है, पर हम लोग उनको जागरूक करने का काम करते रहते हैं, क्योंकि शौचालय का उपयोग न करने पर किसी भी प्रकार की कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है। ग्राम प्रधान चाहें तो ऐसे लोगों का सामाजिक रूप से बहिष्कार कर सकता है स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत लोगों को इसके लिए जागरूक किया जाता है कि वह खुले में शौच न जाकर घरों में शौचालय का निर्माण कराएं और उपयोग करें।”

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बिधनू ब्लॉक के गाँव बिधनू के प्रधान पवन सिंह चंदेल बताते हैं, “इस बात से परहेज नहीं किया जा सकता कि बहुत से लोगों ने शौचालय का निर्माण केवल सरकार से पैसे प्राप्त करने के लिए कराया है। आज भी गाँव में बहुत से लोगों की संख्या ऐसी है जो शौच के लिए शौचालय में ना जाकर बाहर जाते हैं ऐसे लोगों को हम लोग भी केवल समझा ही सकते हैं।”

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कानपुर नगर जिला पंचायतीराज अधिकारी डॉ. निरीश चंद्र साहू ने बताया अभी भी ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन हम लोग उनको जागरूक करने का काम करते रहते हैं, क्योंकि शौचालय का उपयोग न करने पर किसी भी प्रकार की कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है। ग्राम प्रधान चाहें तो ऐसे लोगों का सामाजिक रूप से बहिष्कार कर सकता है स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत लोगों को इसके लिए जागरूक किया जाता है कि वह खुले में शौच न जाकर अपने घरों में शौचालय का निर्माण कराएं और उसका उपयोग करें।

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