देश में पहली बार मिट्टी की डॉक्टर बनेंगी झारखंड की महिलाएं

झारखंड में 8,000 से ज्यादा महिलाओं को मिट्टी की डॉक्टर दीदी बनाया जाएगा। जो गाँव-गाँव जाकर किसानों के खेत की मिट्टी जांच करेंगी। अगर एक डॉ दीदी एक दिन में 3 खेत की जांच खुद करती है तो महीने में उनकी आमदनी 14,000 रुपए होगी।

Neetu SinghNeetu Singh   21 Aug 2019 1:15 PM GMT

देश में पहली बार मिट्टी की डॉक्टर बनेंगी झारखंड की महिलाएंरांची के टाना भगत स्टेडियम में पहुंची डॉक्टर दीदी। (सभी फोटो- रघुबर दास के ट्वीटर हैंडल से साभार)

विभिन्न क्षेत्रों में महारथ हासिल कर चुकी झारखंड की महिलाएं अब मृदा परीक्षण कर देश की पहली मिट्टी की डॉ बनेंगी। मिट्टी की जांच के लिए हर पंचायत स्तर पर दो महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें मिट्टी की डॉक्टर दीदी बनाया जाएगा।

मिट्टी की डॉ दीदी पंचमी देवी ने मंच पर अपना अनुभव साझा किया, "मिट्टी की जांच करने के बाद किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड देते हैं। पहले हमें कोई नहीं जानता था अगर जानता भी था तो पति के नाम से। लेकिन अब सब डॉ दीदी के नाम से जानते हैं।" पंचम देवी की राज्य में 4367 ग्राम पंचायतों से 2-2 महिलाओं को ट्रेनिंग दिलवाकर 8734 महिलाओं को मिट्टी की डॉ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मिट्टी जांच के लिए पंचायत स्तर पर 3164 प्रयोगशालाओं की स्थापना हो चुकी है, 1203 प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।

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झारखंड में 8,000 से ज्यादा महिलाओं को मिट्टी की डॉक्टर बनाया जाएगा। जो गाँव-गाँव जाकर किसानों के खेत की मिट्टी जांच करेंगी। अगर एक डॉ दीदी एक दिन में 3 खेत की जांच खुद करती हैं तो महीने में उनकी आमदनी 14,000 रुपए होगी। खेत की मिट्टी जांच कर किसानों को ये बतायेंगी कि उनके खेत में किन-किन पोषक तत्वों की कमी है। जिससे किसान जरूरी पोषक तत्वों को खेत में डालकर मिट्टी को ठीक कर अच्छा उत्पादन ले सकेंगे।

मिट्टी की डॉ दीदियों का सम्मान समारोह 21 अगस्त 2019 को रांची के टाना भगत स्टेडियम, खेलगांव में मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज से पूरी दुनिया आपको मिट्टी के डॉक्टर दीदी के रूप में जानेगी। आपकी मदद से किसानों की पैदावार बढ़ेगी, धरती मां का स्वास्थ्य अच्छा होगा। आप सभी मिट्टी की डॉक्टर दीदी मेहनत और ईमानदारी से काम करें। आपके प्रयास से झारखंड के अन्नदाता समृद्ध होंगे। इससे आपकी भी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, आप अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर सकेंगी।

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मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए कृषि विभाग और जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया। उन्होंने ये भी कहा कि झारखंड की महिलाएं मेहनती हैं। खासकर आदिवासी महिलाओं ने तो घर के साथ-साथ खेती, व्यापार, सिलाई-बुनाई, बकरी पालन, अंडा उत्पादन और शौचालय निर्माण में पूरे देश के सामने मिसाल पेश की है। उसी तरह डॉक्टर दीदियाँ भी किसानों की मिट्टी को सेहतमंद बनाकर उनकी आय को दोगुनी करने में मदद करेंगी। अभी तक 17 लाख किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड मिल चुके हैं। जल्द ही 25 लाख किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड मिल जाएंगे।

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल ने कहा कि इन डॉ दीदी की मदद से अब पंचायत स्तर पर मिट्टी की जांच हो सकेगी। किसानों को मिट्टी में मौजूद बीमारी बताई जायेंगी। क्योंकि गांव का हर परिवार मिट्टी से जुड़ा हुआ है। अगर मिट्टी के सही उपयोग का पता चल जाए तो उत्पादकता जरूर बढ़ेगी। आज मिट्टी की डॉक्टर दीदियों को मिट्टी जांच हेतु किट दिया जा रहा है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

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कार्यक्रम के दौरान मिट्टी जांच की किट मिट्टी की डॉक्टर दीदियों को दी गयी। इस उपकरण से वैज्ञानिक तरीके से खेत की बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सांकेतिक तौर पर कुछ महिलाओं को मिट्टी की डॉक्टर के रूप में पहचान पत्र एवं प्रोत्साहन राशि दी। कुछ को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया गया।

झारखंड की कृषि विकास दर 14.5 प्रतिशत, जो दर कई राज्यों से ज्यादा

कृषि विकास दर में झारखण्ड के किसानों ने देश के कई राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2014 में राज्य की कृषि विकास दर -4 प्रतिशत थी। साढ़े चार साल में यही विकास दर 14.5 प्रतिशत हो गयी।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि बिहार की कृषि विकास दर 6.62 प्रतिशत, उड़ीसा की 10.7 प्रतिशत, बंगाल की 5.5 प्रतिशत और आंध्रप्रदेश की 11.39 प्रतिशत है और हमारी 14.5 प्रतिशत है। इस दर को और बढ़ाने में मिट्टी की डॉक्टर की भूमिका मायने रखेगी। आने वाले दिनों में राज्य के 100 किसानों को फिर इजरायल भेजा जाएगा। जिसमें 50 पुरुष किसान, 25 सखी मंडल की बहनें और 25 महिला किसान शामिल होंगी।

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मिट्टी जांच से किसान मिट्टी का स्वास्थ्य ठीक कर सकेंगे

कृषि व पशुपालन विभाग की सचिव पूजा सिंघल ने कहा कि इन डॉक्टर दीदियों के लिए प्रशिक्षण का कार्यक्रम रखा गया है जो 8 दिनों तक चलेगा। प्रथम चरण में 3,000 महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद ये मिट्टी की डॉक्टर गाँव-गाँव में खेत की मिट्टी की जांच करेंगी। मिट्टी में क्या क्या कमी है ये बात ये किसान को बताएंगी। जिससे किसान उर्वरक एवं दवाओं का उचित मात्रा में प्रयोग कर मिट्टी के स्वास्थ्य को ठीक कर सकें।


इस मौके पर कृषि निदेशक छवि रंजन, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार, रांची उपायुक्त राय महिमापत रे, डीडीसी रांची अनन्य मित्तल, राज्यभर से आईं मिट्टी की डॉक्टर दीदियां, सखी मंडल की महिलाएं, कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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