By Dr SB Misra
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति की कोशिशें विफल रहीं। उन्होंने दुनिया भर में तनाव बढ़ाया है। भारत अपनी पुरानी तटस्थ विदेश नीति पर चल रहा है। यह नीति भारत को सुरक्षित रख रही है। दुनिया के देश अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत सरकार स्वतंत्र निर्णय ले रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति की कोशिशें विफल रहीं। उन्होंने दुनिया भर में तनाव बढ़ाया है। भारत अपनी पुरानी तटस्थ विदेश नीति पर चल रहा है। यह नीति भारत को सुरक्षित रख रही है। दुनिया के देश अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत सरकार स्वतंत्र निर्णय ले रही है।
By Dr SB Misra
गांवों में बदलते मौसम का असर गंभीर होता जा रहा है। अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित वर्षा से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि मजदूरों की दिनचर्या परेशान हो रही है। बच्चों को शुद्ध पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है और बीमार होने पर इलाज का कोई साधन नहीं है।
गांवों में बदलते मौसम का असर गंभीर होता जा रहा है। अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित वर्षा से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि मजदूरों की दिनचर्या परेशान हो रही है। बच्चों को शुद्ध पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है और बीमार होने पर इलाज का कोई साधन नहीं है।
By Dr SB Misra
लोकतंत्र में विभिन्न तरीकों से अपनी आवाज उठाना आवश्यक है। हड़तालें और आंदोलन समाज की एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन जब ये हिंसा का रूप धर लेते हैं, तो इससे समाज को गंभीर नुकसान होता है। हाल ही में नोएडा में हुई श्रमिकों की हड़ताल और तोड़फोड़ ने व्यवसायों और रोजगार को प्रभावित किया है।
लोकतंत्र में विभिन्न तरीकों से अपनी आवाज उठाना आवश्यक है। हड़तालें और आंदोलन समाज की एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन जब ये हिंसा का रूप धर लेते हैं, तो इससे समाज को गंभीर नुकसान होता है। हाल ही में नोएडा में हुई श्रमिकों की हड़ताल और तोड़फोड़ ने व्यवसायों और रोजगार को प्रभावित किया है।
By Dr SB Misra
स्वतंत्र भारत में शिक्षण व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक रही है संस्कार और प्रेरणा का अभाव। इसके कारण हम नागरिकों की स्वाभिमान की भावना विकसित नहीं कर पाए। यह सच है कि मैकाले का मकसद क्लर्क तैयार करना ही था और हमें अब भी यही लगा है कि नौकरी पाना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
स्वतंत्र भारत में शिक्षण व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक रही है संस्कार और प्रेरणा का अभाव। इसके कारण हम नागरिकों की स्वाभिमान की भावना विकसित नहीं कर पाए। यह सच है कि मैकाले का मकसद क्लर्क तैयार करना ही था और हमें अब भी यही लगा है कि नौकरी पाना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
By Dr SB Misra
फिरोज़ गांधी, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, आज भुला दिए गए हैं। वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के दामाद और इंदिरा गांधी के पति थे। उन्होंने संसद में निर्भीकता से अपनी बात रखी और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। फिरोज गांधी के कार्यों को याद रखना देश के लिए आवश्यक है।
फिरोज़ गांधी, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, आज भुला दिए गए हैं। वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के दामाद और इंदिरा गांधी के पति थे। उन्होंने संसद में निर्भीकता से अपनी बात रखी और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। फिरोज गांधी के कार्यों को याद रखना देश के लिए आवश्यक है।
By Dr SB Misra
भारत की आज़ादी के बाद से सरकारों ने औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास पिछड़ गया और किसानों की समस्याएं बनी रहीं। समय के साथ हरित क्रांति और विभिन्न योजनाओं से कुछ सुधार हुए। वर्तमान में भी ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित है, लेकिन शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अभी भी बहुत काम बाकी है।
भारत की आज़ादी के बाद से सरकारों ने औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास पिछड़ गया और किसानों की समस्याएं बनी रहीं। समय के साथ हरित क्रांति और विभिन्न योजनाओं से कुछ सुधार हुए। वर्तमान में भी ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित है, लेकिन शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अभी भी बहुत काम बाकी है।
By Dr SB Misra
देश के विकास में सत्ता और विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। संसद का सुचारू रूप से चलाने के लिए संसद का संचालन देशहित में जरूरी है। लेकिन वर्तमान में राजनीतिक कड़वाहट बढ़ी है, जैसे विपक्ष सरकार पर अमेरिका को देश बेचने का आरोप लगाता है, विदेश नीति पर भी विवाद बढ़ रहा है, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हुआ। ऐसे में हमे सोटना होगा कि क्या पक्ष और विपक्ष
देश के विकास में सत्ता और विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। संसद का सुचारू रूप से चलाने के लिए संसद का संचालन देशहित में जरूरी है। लेकिन वर्तमान में राजनीतिक कड़वाहट बढ़ी है, जैसे विपक्ष सरकार पर अमेरिका को देश बेचने का आरोप लगाता है, विदेश नीति पर भी विवाद बढ़ रहा है, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हुआ। ऐसे में हमे सोटना होगा कि क्या पक्ष और विपक्ष
By Dr SB Misra
सरकारें मुफ्त की योजनाओं से लोगों को भिखारी बना रही हैं। इससे देश की उत्पादकता घट रही है और युवा आलसी हो रहे हैं। चीन ने खुद को जगाकर तरक्की की। भारत की पार्टियां वोट के लिए खैरात बांटकर प्रजातंत्र को कमजोर कर रही हैं। रोजगार और स्वावलंबन पर ध्यान देना जरूरी है।
सरकारें मुफ्त की योजनाओं से लोगों को भिखारी बना रही हैं। इससे देश की उत्पादकता घट रही है और युवा आलसी हो रहे हैं। चीन ने खुद को जगाकर तरक्की की। भारत की पार्टियां वोट के लिए खैरात बांटकर प्रजातंत्र को कमजोर कर रही हैं। रोजगार और स्वावलंबन पर ध्यान देना जरूरी है।
By Dr SB Misra
हर साल की तरह इस साल भी 14 फरवरी को वैलेंटाइन-डे मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने वैलेंटाइन-डे को मातृ-पितृ दिवस के रूप में मनाने की बात कही थी। यह तर्कसंगत नहीं लगता, क्योंकि वैलेंटाइन-डे मूलतः स्त्री-पुरुष संबंधों पर आधारित अवसर है, चाहे शादी ब्याह करके या उसके बिना भी। औपचारिक संबंध जरूरी नहीं। पश्चिम में लोग इसे ‘रोमांटिक लव’ का दिन कहते हैं।
हर साल की तरह इस साल भी 14 फरवरी को वैलेंटाइन-डे मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने वैलेंटाइन-डे को मातृ-पितृ दिवस के रूप में मनाने की बात कही थी। यह तर्कसंगत नहीं लगता, क्योंकि वैलेंटाइन-डे मूलतः स्त्री-पुरुष संबंधों पर आधारित अवसर है, चाहे शादी ब्याह करके या उसके बिना भी। औपचारिक संबंध जरूरी नहीं। पश्चिम में लोग इसे ‘रोमांटिक लव’ का दिन कहते हैं।
By Dr SB Misra
भले ही कबीर जीवन भर हिन्दू और मुसलमानों को फटकारते रहे, लेकिन अंत में दोनों ही उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे। पता नहीं कहाँ तक सही है, जब चादर उठाई गई तो उसके नीचे केवल फूल निकले। उन्हें हिन्दू और मुसलमानों ने आपस में बाँटकर अपने-अपने ढंग से संस्कार किया। वह न हिन्दू थे और न मुसलमान, वह थे बस एक अच्छे इंसान। सेकुलरवाद को बचाने के लिए कबीर को और निकटता से समझना और समझाना होगा।
भले ही कबीर जीवन भर हिन्दू और मुसलमानों को फटकारते रहे, लेकिन अंत में दोनों ही उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे। पता नहीं कहाँ तक सही है, जब चादर उठाई गई तो उसके नीचे केवल फूल निकले। उन्हें हिन्दू और मुसलमानों ने आपस में बाँटकर अपने-अपने ढंग से संस्कार किया। वह न हिन्दू थे और न मुसलमान, वह थे बस एक अच्छे इंसान। सेकुलरवाद को बचाने के लिए कबीर को और निकटता से समझना और समझाना होगा।