उन्नाव के युवक को शेख ने कुवैत में बनाया बंधुआ मजदूर

Update: 2016-04-09 05:30 GMT
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लखनऊ। परिवार के भविष्य को सुधारने की जुगत में उन्नाव के बीघापुर क्षेत्र के पवन कुमार कुवैत तो गए लेकिन वहां धोखे से उन्हें बंधुआ मजदूर बना दिया गया। पवन की पत्नि, उन्हें वहां से वापस लाने के लिए तमाम अधिकारियों से गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन कोशिश विफल रही।

बीघापुर नगर पंचायत के मोहल्ला अंबेडकर नगर निवासी पवन कुमार बेरोजगार थे। चमियानी में रहने वाले मौसेरे भाई अनिल की मदद से वो 28 अप्रैल 2013 को, पत्नी ममता और तीन साल की बच्ची आस्था को छोड़ वीजा लेकर कुवैत गए। वहां के जहरा शहर में उन्हें एक शेख अब्दुल सेमरी ने अपनी लॉन्ड्री में रखा। वहां तनख्वाह मांगने पर पहले तो पवन को शेख ने टाल दिया और बाद में चोरी के इल्जाम में फंसाने की धमकी देकर उसका पासपोर्ट और वीज़ा ले लिया और बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराने लगा।

पत्नी ममता ने गाँव कनेक्शन को बताया कि नौकरी के दो महीने के बाद पवन ने शेख से जब घर भेजने के लिए पैसे मांगे तो शेख ने एक साथ चार-पांच महीने का पैसा देने की बात कहकर उसे टाल दिया। छह माह बाद भी शेख ने जब तनख्वाह के पैसे नहीं दिए और धोखे से उसका वीजा और पासपोर्ट ले लिया तो परेशान होकर पवन ने शेख की लांड्री में काम छोड़कर दूसरी जगह नौकरी कर ली। ये जानकारी मिलने पर शेख ने रुपए देने के नाम पर धोखे से पवन के हस्ताक्षर एक खाली कागज़ पर ले लिए और फिर तीन हज़ार दिनार चुराने के शिकायत दर्ज कराने की धमकी देकर अपने पास बंधुआ मजदूर की तरह काम करने को मजबूर कर दिया।

पत्नी ममता ने बताया कि पवन एक दिन वहां से किसी तरह भागा और इंडियन एंबेसी पहुंचा लेकिन पासपोर्ट और वीजा कुछ भी न होने से एंबेसी भी उसकी मदद नहीं कर पाई। ममता ने बताया कि फंसा पवन वहां पासपोर्ट और वीजा के बिना कहीं आ-जा भी नहीं पाता। जब कभी उसे मौका मिलता है तो वह परिवार से बात कर लेता है।

पवन की पत्नी ममता ने अपने पती की मदद के लिए एक विडियो शेयर किया है जिसमें वो अपने पती को वापस भारत लाने के लिए मदद की मांग कर रही हैं

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