मोदी सरकार ने पहली बैठक में मजदूरों को दिया तोहफा, मिलेगी 3000 रुपए पेंशन

नई मोदी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक शुक्रवार को दिल्ली में समाप्‍त हो गई है। इस दौरान कैबिनेट बैठक में असंगठित मजदूरों को साल में 3000 रुपए पेंशन देने की योजना पास की गई है। इस योजना का ऐलान अंतरिम बजट में किया गया था।

Update: 2019-05-31 13:44 GMT

लखनऊ। नई मोदी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में असंगठित मजदूरों को साल में 3000 रुपए पेंशन देने की योजना पास की गई है। इस योजना का ऐलान अंतरिम बजट में किया गया था। इसका नाम 'प्रधानमंत्री श्रम-योगी मानधन वृहद पेंशन योजना' है। इसके साथ ही राष्ट्रीय रक्षा कोष के तहत 'प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना' में बड़े परिवर्तन को अनुमति दी है। इसके तहत शहीद पुलिस कर्मियों के बेटे को मिलने वाली राशि को 2000 रुपये से बढ़ा कर 2500 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है। वहीं, बेटियों को मिलने वाली राशि को 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री श्रम-योगी मानधन वृहद पेंशन योजना के तहत निर्माण मजदूर, बीड़ी बनाने वाले, रेहड़ी-पटरी वाले, हथकरघा कामगार, कूड़ा बीनने वाले, रिक्शा चालक, खेती कामगार, चमड़ा कामगार और ऐसे ही काम करने वाले अन्‍य असंगठि‍त क्षेत्र के मजदूरों को फायदा मिलेगा। करीब 42 करोड़ कामगारों को इससे फायदा होगा।

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वहीं एक वीडियो को ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा है 'हमारी सरकार का पहला फैसला भारत की रक्षा करने वालों को समर्पित है। राष्ट्रीय रक्षा कोष के तहत पीएम छात्रवृत्ति योजना में स्वीकृत बड़े बदलाव, जिनमें आतंकी या माओवादी हमलों में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए बढ़ाई गई छात्रवृत्ति शामिल है।'

पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश करते हुए इस योजना के बारे में कहा था, ''यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी पेंशन योजना बन जाएगी। सरकार ने इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की है। अगर जरूरत पड़ी तो इस योजना के लिए और ज्यादा राशि आवंटित की जाएगी। 

छात्रवृत्ति की दर लड़कों के लिए 2000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये प्रति महीने और लड़कियों के लिए 2250 रुपये से 3000 रुपये प्रति महीने कर दी गयी है। इसमें कहा गया कि वजीफा योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें आतंकी या नक्सली हमलों में शहीद हुए राज्य पुलिस के अधिकारियों के बच्चों को भी शामिल किया गया है। राज्य पुलिस के अधिकारियों के लिए इस कोटे का लाभ हर साल करीब 500 लोग उठा सकेंगे।

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