छिलके भी हैं काम के...आजमाकर देख लें

ज्यादातर लोग फलों और सब्जियों का उपयोग करते समय उनके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं लेकिन, सुदूर ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों के ज्ञान को आधार मानकर इन फेंक दिए जाने वाले अंगों के औषधीय गुणों का जिक्र किया जाए तो आपको इनके गुणों को जानकर आश्चर्य होगा

छिलके भी हैं काम के...आजमाकर देख लें

ऐसा हर बार होता है कि आप जब भी केला खाते हैं, इसके छिलकों को सीधे कचरापेटी का रास्ता दिखा देते हैं। ठीक इसी तरह अन्य फलों जैसे संतरा, अनार और तरबूज के छिलकों का हाल होता है। सब्जियों जैसे तुरई, आलू की बात की जाए तो इनके छिलकों के साथ भी यही होता है। चाय बनने के बाद चाय की पत्तियों को भी फेंक दिया जाता है। लेकिन, सुदूर ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों के ज्ञान को आधार मानकर इन फेंक दिए जाने वाले अंगों के औषधीय गुणों का जिक्र किया जाए तो आपको इनके गुणों को जानकर बेहद आश्चर्य होगा। चलिए इस लेख के जरिये कुछ ऐसी ही रोचक जानकारियों की बात कर ली जाए, उम्मीद है हमारे पाठकों को इस लेख के जरिये नयी और अनोखी जानकारियों से लाभ मिलेगा।

साभार: इंटरनेट

माना जाता है कि महज एक संतरे के सेवन मात्र से दिनभर में हमारे शरीर के लिए आवश्यक विटामिन सी की मात्रा का 100 प्रतिशत प्राप्त हो जाता है। संतरे में ढ़ेर सारे फाइबर, विटामिन ए, बी, एमीनो एसिड्स, बीटा केरोटीन, पोटैशियम, फोलिक एसिड और कई अन्य महत्वपूर्ण रसायनों की भरमार होती है। संतरों को सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इसके छिलकों में भी औषधीय गुणों की भरमार है? इसके छिलकों के फेंकने से पहले जरा इनके अजब- गजब गुणों को जरूर जान लें।

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सन्तरे के छिल्कों को रात में इन्हें दुर्गन्ध मार रहे जूतों के अंदर रख दें, अगली सुबह इन छिलकों को जूतों से निकालकर फेंक दें, जूतों से दुर्गन्ध दूर हो जाएगी। जिनके पाँवों के तालुओं से गंध आती है उसे दूर करने के लिए भी संतरे के छिलके बेहद कारगर हैं। संतरे के ताजे या सूखे हुए छिलकों को 2 लीटर पानी में उबाल लिया जाए और जब यह गुनगुना रहे तो इसमें तालुओं को डुबो दिया जाए। करीब 2 से 4 मिनिट बाद तालुओं को बाहर निकाल साफ तौलिये से पोछ लिया जाए। ऐसा सप्ताह में 2-3 तीन बार करने से जल्द ही समस्या का पूर्ण निवारण हो जाता है।


कोई बाजारू क्रीम आपको गोरा नहीं बनाएगी, लेकिन ये दावा है कि इस देसी फार्मुले को आजमाकर आपकी त्वचा में निखार जरूर आ जाएगा। संतरे के छिलकों को सुखा लें, जब यह पूरी तरह से सूख जाए तो इन्हें ग्राईंडर का उपयोग कर पावडर में तब्दील कर लें। इस पाउडर की 3 चम्मच मात्रा लें और इसे 3चम्मच दही में अच्छी तरह घोल लें और चेहर पर लगाकर सूखने तक रख दें।

करीब 15से 20 मिनट बाद जब यह सूख जाए तो हथेली से हल्का-हल्का रगड़ते हुए चेहरे से इसे उतार लें और बाद में साफ पानी से चेहरा धो लें। साफ तौलिये से चेहरा साफ करके थोड़ा सा मोइस्चरायजर लगा लें। रोज नहाने से पहले सिर्फ 15 दिन करके देखिए, पारंपरिक ज्ञान है, ..असर दिखाकर दम लेगा और इस फार्मुले को अपनाने से पहले पहले अपने घर से जहरीले रसायनयुक्त क्रीम को कचरे के डिब्बे में जरूर फेंक मारें।

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छांव में सुखाए संतरे के छिलकों को बारीक पीस लें। इस चूर्ण को घी के साथ बराबर मात्रा में मिलाएं। 1-1 चम्मच दिन में 3 बार लें। बवासीर में आराम मिलेगा। संतरे के छिलकों को सुखा लें और सब्जियों में छौंक लगाते वक्त एक या दो टुकड़ों को डाल दें, ऐसा करने से ना सिर्फ सब्जी में हल्की सी सुगंध आएगी बल्कि संतरे के छिलकों के एंटीआक्सीडेंट गुण आपके शरीर के भीतर पहुंच जाएंगे।

संतरे के सूखे छिलकों या उसके पाउडर को जलते हुए कोयलों पर डालकर कमरे में धुंआ करें। ऐसा करने से मक्खी-मच्छर और खटमल भाग जाते हैं। यह नुस्खा पातालकोट के आदिवासी सालों से उपयोग करते आ रहे हैं।

संतरे के अलावा नींबू, मौसमी जैसे खट्टे फलों के छिलकों को भी आदिवासी कई तरह के नायाब तरीकों से इस्तमाल में लाते हैं। इन खट्टे फलों के छिलकों को एक बर्तन में पानी के साथ खौलाएं, खौलाने से पहले थोडी सी दालचीनी और 3-4 लौंग जरूर डाल दें। जब यह खौलने लगे तो सावधानी से हर कमरे में खौलते बर्तन को ले जाएं। इसकी सुगंध मात्र से करीब 12 प्रकार के सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और यह गजब के रूम फ्रेशनर की तरह भी काम करता है।


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नींबू के छिलके का एक और जोरदार उपयोग जान लीजिए। इसके छिलके में पाया जाने वाला एसिड आपके कार के काँच की खिडकियों, फ़्रंट ग्लास और साईड मिरर आदि पर लगे क्षारयुक्त पानी के धब्बों को निकाल सकता है। कार के काँच वाले हिस्सों की बेहतर सफ़ाई के लिए एक हिस्सा शुद्ध पानी और दो हिस्सा नींबू का रस लिया जाए और इसे अच्छी तरह से मिला लिया जाए। इस द्रव को कार के काँच वाले हिस्सों पर छिड्ककर साफ़ अखबार या वाईपर से पोछ लिया जाए, काँच बिल्कुल नए की तरह चमचमा उठेंगे।

नींबू का रस निकालने के बाद छिल्कों को फेकें नहीं, इन्हें छाँव में रखकर सुखा लें। कच्चे हरे केले का छिल्का उतारकर केले के गूदे को बारीक-बारीक टुकड़े करें और इसे भी छाँव में सुखा लें। जब दोनो अच्छी तरह सूख जाए तो दोनो की समान मात्रा लेकर मिक्सर में एक साथ ग्राइंड करलें, चूर्ण तैयार हो जाएगा।

ये चूर्ण दस्त और डायरिया का अचूक फार्मुला होता है, बस 1 चम्मच चूर्ण की फांकी मारनी होगी, हर 2 घंटे के अंतराल से, देखते ही देखते दस्त और डायरिया की समस्या का पूर्ण निदान हो जाएगा। आधुनिक विज्ञान भी इस फार्मुले की पैरवी कर चुका है। केले मे स्टार्च और नीबू के छिल्कों मे सबसे ज्यादा मात्रा में पेक्टिन, इन दोनों की सक्रियता से दस्त जैसी समस्या में तेजी से राहत मिल जाती है।

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टेबल क्लॉथ या कपड़ों पर चाय के दाग लग जाने पर दागयुक्त हिस्सों को गीला करके इस पर नमक का छिडकाव करें और फिर नीबूं के छिलके के अंदरूनी हिस्से को दाग पर रगड़ें, दाग गायब हो जाएंगे।

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अनार छीलने के बाद छिलकों को फेंके नहीं, इन्हें बारीक काटकर मिक्सर में थोडे पानी के साथ डालकर पीस लें। बाद में इसे मुंह में डालकर कुछ देर कुल्ला करें और थूक दें। दिन में करीब दो तीन बार ऐसा करने से मसूड़ों और दांतों पर किसी तरह के सूक्ष्मजीवी संक्रमण हो तो काफी हद तक आराम मिल जाता है। जिन्हें मसूड़ों से खून निकलने की शिकायत हो उन्हें यह फार्मुला बेहद फायदा करेगा।

सैकड़ों साल से आजमाए जाने वाले इस आदिवासी फार्मुलों के असर को वैज्ञानिक परिक्षण के तौर पर भी सिद्ध किया जा चुका है। स्ट्रेप्टोकोकस मिटिस और स्ट्रेप्टोकोकस संगस नामक बैक्टिरिया की वजह से ही जिंजिवायटिस और कई अन्य मुख रोग होते हैं और इनकी वृद्धि को रोकने के लिए अनार के छिलके बेहद असरकारक होते हैं।

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आलू के छिलके कमाल के होते हैं, यकीन मानिए। दुनिया भर में आलू एक प्रचलित कंद है और इसका इस्तमाल लगभग हर घर में किया जाता है लेकिन दुर्भाग्यवश जानकारी के अभाव में हम इसके छिलकों को फेंक देते हैं।

आप जब इसके औषधीय गुणों को जानेंगे तो सिवाय दांतों में ऊंगली दबाने के और कुछ ना कर पाएंगे। आपको आश्चर्य होगा कि आलू के छिलकों में आलू के अंदर के हिस्से से ज्यादा महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते हैं।

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आंखों के नीचे बैग (सूजन) बने हों या चेहरे पर दाग- धब्बे या मुहांसे, कुछ ना करें सिर्फ आलू के छिलकों के अंदरूनी हिस्से को चेहरे पर लगाए और हल्का-हल्का दबाते हुएं रगड़ें। करीब 15 दिन में ही फर्क दिखायी देने लगेगा। और तो और इन छिल्कों को ग्राईंड करें, रुई डुबोकर चेहरे पर लगाएं और फिर १५ दिनों में चेहरे की रंगत देखिए, बिल्कुल निखरने लगेगा। ध्यान रहें, छिलकों के इस्तमाल से पहले आलू को साफ पानी से खूब अच्छी तरह से धो जरूर लें।

पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार तुरई के छिलकों के छोटे छोटे टुकड़े काटकर छाँव में सुखा लिए जाए और सूखे टुकड़ों को नारियल के तेल में मिलाकर 5 दिन तक रखे और बाद में इसे गर्म कर लिया जाए। तेल छानकर प्रतिदिन बालों पर लगाए और मालिश भी करें तो बाल काले हो जाते हैं।

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केले का छिलका प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि को रोकता है। टेस्टोस्टेरोन की वजह से अक्सर प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ जाता है और अनेक शोध बताती हैं कि केले का छिलका टेस्टोस्टेरोन को सक्रिय नहीं होने देता। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार साफ केले के छिलके को धोकर सुखा लिया जाए और फिर इसे ग्राइंड कर लिया जाए, प्राप्त चूर्ण की आधा चम्मच फांकी दिन में दो बार लेने से प्रोस्टेट ग्रंथी की वृद्धि को रोकने में मददगार होता है। पके हुए केले के छिलके के अंदरूनी हिस्से को मुहांसों पर रात सोने से पहले रगड़िये और चाहें तो चेहरे को 45 मिनट बाद धो सकते हैं। बहुत जल्द ही सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।

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गुजरात के आदिवासी तरबूज के छिलके जलाकर राख तैयार करते हैं और मुंह के छालों से पीड़ित लोगों को इसे छालों पर लगाने की सलाह देते हैं। तरबूज के छिलकों की आंतरिक सतह को काटकर आदिवासी इनका मुरब्बा तैयार करते हैं, माना जाता है कि यह बेहद शक्तिवर्धक होता है।

कुछ इलाकों में लोग इसके छिलकों को बारीक काटकर सुखा लेते हैं और चूर्ण तैयार कर लिया जाता है। माना जाता है कि इस चूर्ण की आधी चम्मच मात्रा प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेने से शरीर में ताकत का संचार होता है और कई तरह की व्याधियों में राहत भी मिलती है, कुलमिलाकर ये पूर्ण रूप से सेहत दुरुस्ती के लिए कारगर होता है।


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चाय बनाकर चायपत्तियों को छानने के बाद फेकें नहीं। दिन भर में जितने बार भी चाय बने, पत्तियों को छानकर एकत्र कर लें, रात सोने से पहले सारी चायपत्ती को बड़े बर्तन में उबालें और जब यह गुनगुना हो जाए तो अपने तालुओं को इस पानी में करीब 20 मिनट तक डुबोकर रखें। जो लोग चाय नहीं पीते वे चायपत्ती (20 ग्राम, करीब 5 चम्मच) लेकर 1 लीटर पानी में 10 मिनिट उबालकर इसे तैयार कर सकते हैं।

ऐसा सप्ताह में सिर्फ एक बार ही करें, एक महीने में पैरों के तालुओं में अक्सर पसीना आने की समस्या और संक्रमण से हमेशा का छुटकारा मिल जाएगा। चाय में टैनिक एसिड पाया जाता है जो कि पसीना रोकने में सक्षम होता है और इसमें त्वचा की कोशिकाओं को ड्राय करने का गुण भी होता है साथ ही दुर्गंधकारक सूक्ष्मजीवों को मार भी गिराता है।

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