घर में रंगीन मछली पालन करके हो सकती है अतिरिक्त कमाई

Update: 2017-11-04 14:49 GMT
शहरों में रंगीन मछलियों को पालने का चलन लगातार बढ़ रहा है।

लखनऊ। शहरों में रंगीन मछलियों को पालने का चलन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में किसान मछली पालन के साथ-साथ रंगीन मछलियों को पालकर और ज्यादा मुनाफा कमा सकते है।

"जो मछली पालक देसी मछलियों का पालन कर रहे है वो रंगीन मछलियों को भी पाल सकते है। उसके लिए ज्यादा खर्चें की भी जरुरत नहीं होती है। इसके लिए कई मत्स्य संस्थानों में प्रशिक्षण भी दिया जाता है। किसानों की अाय को दोगुना करने के लिए संस्थान और विभाग द्वारा किसानों को ट्रेनिंग दी जाा रही है ताकि वो अपनी आय बढ़ा सके।" ऐसा बताते हैं, बरेली केवीके वरिष्ठ वैज्ञानिक डॅा वी पी सिंह।

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डॅा सिंह आगे बताते हैं, "अगर किसान रगीन मछली पालन की शुरुआत कर रहे है वह लाइवबियर प्रजाति यानी गप्पीज, मोली, स्वॅार्ड टेल या प्लेटी मछली से शुरुअात कर सकते है। इसके अलावा हैचरी के लिए गोल्डफिश या अन्य किसी एग लेयर प्रजाति को पाल सकते है।

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इस तरह कर सकते है शुरुआत

लाइवबियरर के छोटे स्तर पर प्रजनन और पालन के लिए हर तीन महीने में करीब 45 हजार रुपये लगेंगे। इसमें 300 वर्ग मीटर जगह पर 800 मादा, 200 नर मछलियों का पालन होगा। इस लिहाज से हर दो से तीन महीने में करीब 80 फीसदी 76800 मछलियां जिंदा बचेंगी। एक रुपये प्रति मछली के हिसाब से भी बिक्री करने पर हर तीन महीने में कम से कम साढ़े 31 हजार रुपये कमाई होगी।

इन रंगीन मछलियों का कर सकते है पालन

  • लाइव बीयरर प्रजातियां: गप्पीज, मोली, स्वॉर्ड टेल, प्लेटी।
  • एग लेयर्स : गोल्ड फिश, कोई कार्प, जेब्रा डानियो, ब्लैक विडो टेट्रा, नियोन टेट्रा, सर्पा टेट्रा। अन्य में बबल्स, एंजलफिश, रेड-लाइन तारपीडो मछली, लोचेज, लीफ-फिश।

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ऐक्वेरियम का बनाना

ऐक्वेरियम शीशे का बनाया जाता है। ऐक्वेरियम  के आकार के अनुसार शीशे की मोटाई रहती है। इसको बनाने के लिए बाजार में अच्छे-अच्छे उपकरण मिलते है जिनके द्वारा इनको तालाब जैसा आकार देकर मछली पालन किया जा सकता है।

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मछली का भोजन

रंगीन मछलियों का दाना बाजारों मे आसानी से मिल जाता है। उनको प्रतिदिन भोजन दे। मछलियों के लार्वा को पोषित रखने के लिए जिंदा खाना यानी केंचुए आदि की भी जरूरत होती है।
पानी का बदलना भी जरुर- अगर आप मछलियों को ऐक्वेरियम में पाल रहे है तो जरुरी है कि पानी को 7 से 10 दिन अंतराल में बदल दे। ऐक्वेरियम के अंदर का पीएच जरुर सही रखें और किसी भी जरह का इंफेकशन न हो वरना मछलियों को माैत भी हो सकती है।

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मछली उत्पादन

कई इलाकों में महिला मज़दूरों ने अपनी समझदारी से बचत समूह में बचत कर मछली पालन का व्यवसाय शुरू किया।

बाजारों में मंहगे दामों पर बिकती है रंगीन मछलियां

जहां देसी मछलियों को पालकर किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे है। वहीं रंगीन मछलियों को पालकर उसे बेचने से किसान दोगुनी कमाई कर सकते है। बाजार में रंगीन मछली के जोड़े का रेट एक हजार से लेकर 80 हजार रुपए तक है और इसके प्रजनन में ज्यादा खर्च भी नहीं आता है।

कहां से ले प्रशिक्षण

रंगीन मछलियों के प्रशिक्षण के उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग से भी प्रशिक्षण ले सकते है। साथ ही लखनऊ स्थित राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो में भी प्रशिक्षण ले सकते है।

रंगीन मछली पालन के लिए उत्तर प्रदेश के मत्स्य विभाग द्वारा जारी टोल फ्री नंबर पर जानकारी प्राप्त कर सकते है- 18001805661

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