मानव-वन्यजीव संघर्ष: हाथी और बाघ के हमलों का बढ़ता खतरा
मानव-वन्यजीव संघर्ष: हाथी और बाघ के हमलों का बढ़ता खतरा

देश में इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव तेज़ी से बढ़ रहा है। हाथी और बाघ से जुड़ी घटनाएँ कई राज्यों में जानलेवा बनती जा रही हैं।

देश में इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव तेज़ी से बढ़ रहा है। हाथी और बाघ से जुड़ी घटनाएँ कई राज्यों में जानलेवा बनती जा रही हैं।

‘हर घर चंदन’ की मुहिम, पूर्व सैनिक की नई खेती क्रांति
‘हर घर चंदन’ की मुहिम, पूर्व सैनिक की नई खेती क्रांति

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक पूर्व सैनिक ने सेना की नौकरी छोड़कर खेतों की राह चुनी। उत्कृष्ट पांडेय ने मिट्टी से रिश्ता जोड़कर अपनी ज़िंदगी का नया अध्याय शुरू किया।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक पूर्व सैनिक ने सेना की नौकरी छोड़कर खेतों की राह चुनी। उत्कृष्ट पांडेय ने मिट्टी से रिश्ता जोड़कर अपनी ज़िंदगी का नया अध्याय शुरू किया।

कैसे ट्रेन में चढ़कर दूर तक पहुँच रहे किंग कोबरा?
कैसे ट्रेन में चढ़कर दूर तक पहुँच रहे किंग कोबरा?

सोचिए, आप ट्रेन में सफ़र कर रहे हों… और उसी ट्रेन में कहीं एक किंग कोबरा भी हो। यह अब सिर्फ़ कहानी नहीं, वैज्ञानिक अध्ययन से सामने आई हक़ीक़त है।

सोचिए, आप ट्रेन में सफ़र कर रहे हों… और उसी ट्रेन में कहीं एक किंग कोबरा भी हो। यह अब सिर्फ़ कहानी नहीं, वैज्ञानिक अध्ययन से सामने आई हक़ीक़त है।

सुंदरियाबाई: एक महिला, एक गाँव और 150 देसी बीजों का खज़ाना
सुंदरियाबाई: एक महिला, एक गाँव और 150 देसी बीजों का खज़ाना

हाइब्रिड बीजों की तेज़ दौड़ में एक आदिवासी महिला ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने ठान लिया- अगर देसी बीज बचे रहेंगे, तभी खेती का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

हाइब्रिड बीजों की तेज़ दौड़ में एक आदिवासी महिला ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने ठान लिया- अगर देसी बीज बचे रहेंगे, तभी खेती का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

यमुना नदी से क्यों गायब हो रहीं देसी मछलियाँ?
यमुना नदी से क्यों गायब हो रहीं देसी मछलियाँ?

कभी मछलियों से भरी रहने वाली यमुना आज कई हिस्सों में लगभग खाली हो चुकी है। नदी में पानी है, पर जीवन सिमट रहा है।

कभी मछलियों से भरी रहने वाली यमुना आज कई हिस्सों में लगभग खाली हो चुकी है। नदी में पानी है, पर जीवन सिमट रहा है।

तमिलनाडु में लैंटाना पौधे से ब्रिकेट्स बनाकर बचाए जा रहे जंगल
तमिलनाडु में लैंटाना पौधे से ब्रिकेट्स बनाकर बचाए जा रहे जंगल

नीलगिरी की पहाड़ियों पर लैंटाना जैसी आक्रामक घास को हटाकर उससे ईको-फ्रेंडली ब्रिकेट्स बनाए जा रहे हैं। यह पहल जंगल संरक्षण, जलवायु समाधान, स्वच्छ ऊर्जा और आदिवासी आजीविका को एक साथ जोड़ते हुए सर्कुलर इकॉनमी का अनोखा मॉडल पेश कर रही है।

नीलगिरी की पहाड़ियों पर लैंटाना जैसी आक्रामक घास को हटाकर उससे ईको-फ्रेंडली ब्रिकेट्स बनाए जा रहे हैं। यह पहल जंगल संरक्षण, जलवायु समाधान, स्वच्छ ऊर्जा और आदिवासी आजीविका को एक साथ जोड़ते हुए सर्कुलर इकॉनमी का अनोखा मॉडल पेश कर रही है।

रूबी पारीक ने हज़ारों महिलाओं को दिखाई जैविक खेती की राह
रूबी पारीक ने हज़ारों महिलाओं को दिखाई जैविक खेती की राह

राजस्थान के खटवा गाँव की रूबी पारिक ने पिता को खोने के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने दर्द को ताकत में बदला और जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट, बीज बैंक और जैविक खेती की ट्रेनिंग देकर हज़ारों महिलाओं की ज़िंदगी बदल दी।

राजस्थान के खटवा गाँव की रूबी पारिक ने पिता को खोने के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने दर्द को ताकत में बदला और जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट, बीज बैंक और जैविक खेती की ट्रेनिंग देकर हज़ारों महिलाओं की ज़िंदगी बदल दी।

गाँव की बिज़नेस वूमन: बकरियों के दूध से बना रहीं साबुन
गाँव की बिज़नेस वूमन: बकरियों के दूध से बना रहीं साबुन

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले के मझगाँव में रहने वाली संजू कुशवाहा ने बकरी के दूध से साबुन बनाकर न सिर्फ़ एक नया उत्पाद खड़ा किया, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार और आत्मसम्मान भी दिया।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले के मझगाँव में रहने वाली संजू कुशवाहा ने बकरी के दूध से साबुन बनाकर न सिर्फ़ एक नया उत्पाद खड़ा किया, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार और आत्मसम्मान भी दिया।

ओडिशा के इस ज़िले में पहली बार स्ट्राबेरी की खेती
ओडिशा के इस ज़िले में पहली बार स्ट्राबेरी की खेती

ओडिशा के खोर्धा ज़िले में किसानों ने वो कर दिखाया, जो कभी यहाँ असंभव माना जाता था। गर्म और आर्द्र मौसम वाले इस इलाके में अब स्ट्रॉबेरी की खेती सफल हो रही है, यह सिर्फ़ एक फ़सल नहीं, किसानों के लिए नई उम्मीद है।

ओडिशा के खोर्धा ज़िले में किसानों ने वो कर दिखाया, जो कभी यहाँ असंभव माना जाता था। गर्म और आर्द्र मौसम वाले इस इलाके में अब स्ट्रॉबेरी की खेती सफल हो रही है, यह सिर्फ़ एक फ़सल नहीं, किसानों के लिए नई उम्मीद है।

अरहर की खेती: नई विधि से 20 गुना तक बढ़ जाएगा उत्पादन
अरहर की खेती: नई विधि से 20 गुना तक बढ़ जाएगा उत्पादन

अरहर (Pigeon Pea) की खेती पुरानी है, लेकिन अब एक नई तकनीक किसानों के लिए 20 गुना अधिक उत्पादन तक रास्ता खोल रही है।

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पेड़ों पर उगती है लाख, किसान कर रहे हैं लाखों की कमाई! जानिए कैसे बदल रही है किस्मत | Lac Cultivation | Success Story

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